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अमेरिका की आतंकी सूची में शामिल मुहम्मद सरवर की मौत: लश्कर के लिए जुटाता था फंड; क्या थी भूमिका?

Mon, 19 Oct 2026 01:25 AM IST
निर्मल कांत पीटीआई, लाहौर।
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आतंकवादी मुहम्मद सरवर - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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अमेरिकी वित्त मंत्रालय की ओर से घोषित वैश्विक आतंकवादी मुहम्मद सरवर की रविवार को पाकिस्तान के लाहौर में मौत हो गई। पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग (पीएमएमएल) के एक प्रवक्ता ने बयान में कहा कि पंजाब में पार्टी के अध्यक्ष मुहम्मद सरवर की मौत हो गई है। वह घर से नमाज पढ़ने के लिए मस्जिद जा रहा था। इसी दौरान वह अचानक गिर पड़ा और उसकी मौत हो गई।
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पीएमएमएल ने उनकी मौत का सही कारण नहीं बताया है। हालांकि, 24न्यूजएचडी टीवी चैनल ने खबर दी कि सीढ़ियों से गिरने के बाद सिर में चोट लगने के कारण सरवर की मौत हुई।

पीएमएमएल, मुंबई हमले के मुख्य साजिशकर्ता हाफिज सईद के संगठन जमात-उद-दावा से अलग होकर बना राजनीतिक दल है। अधिकारियों के अनुसार, सईद 2019 से लाहौर की कोट लखपत जेल में बंद है। उसे आतंकवाद के लिए धन जुटाने से जुड़े कई मामलों में कई साल की सजा सुनाई गई थी।
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पीएमएमएल के नेताओं खालिद मसूद सिंधु, सैफुल्लाह कसूरी, हाफिज तल्हा सईद, याकूब शेख, खालिद नईक गुज्जर और मुजम्मिल इकबाल हाशमी ने पार्टी नेता की मौत पर दुख जताया। मुजम्मिल इकबाल हाशमी ने कहा, मुहम्मद सरवर की मौत से पार्टी ने एक मजबूत और निडर नेता खो दिया है।

सरवर की नमाज-ए-जनाजा रविवार देर रात लाहौर के चुबुर्जी इलाके में स्थित जमात-उद-दावा के मुख्यालय जामिया अल-कदसिया में अदा की जानी थी।

अमेरिका ने कब आतंकवादी घोषित किया था?
अमेरिकी वित्त मंत्रालय के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (ओएफएसी) ने 2016 में सरवर और लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के एक अन्य शीर्ष कमांडर शाहिद महमूद को विशेष रूप से वैश्विक आतंकवादी घोषित किया था। इस कार्रवाई का मकसद लश्कर-ए-तैइबा के लिए धन जुटाने और उसे सहायता देने वाले नेटवर्क को बाधित करना था। 

ओएफएसी ने कहा था कि दोनों को संगठन की ओर से या उसके प्रतिनिधि के रूप में काम करने के कारण आतंकवादी घोषित किया गया। इसके साथ ही, अमेरिकी अधिकार क्षेत्र में आने वाली उनकी सभी संपत्तियों और संपत्तियों में उनके हितों पर रोक लगा दी गई थी।

ओएफएसी ने उस समय कहा था, लश्कर-ए-तैयबा के सरवर और महमूद आतंकवादी संगठन के अभियानों को समर्थन देने के लिए धन जुटाने और उसे एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के जिम्मेदार हैं। इस कार्रवाई का मकसद न केवल उनकी गतिविधियों को उजागर करना है, बल्कि लश्कर-ए-ताइबा के वित्तीय नेटवर्क और हिंसक आतंकवादी हमले करने की उसकी क्षमता को भी बाधित करना है। 

लश्कर में सरवर की क्या भूमिका थी?
ओएफएसी के अनुसार, सरवर 10 साल से अधिक समय तक लाहौर में लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष कमांडर रहा था। उसने संगठन में नेतृत्व की कई भूमिकाएं निभाई थीं। वह कम से कम जनवरी 2015 से लश्कर के लाहौर प्रमुख के रूप में काम कर रहा था।

लाहौर प्रमुख के तौर पर सरवर के संगठन में शीर्ष स्तर के आतंकियों से संबंध थे। ओएफएसी ने बताया कि 2012 से 2013 के बीच उसने लश्कर के विदेश मामलों के प्रमुख हाफिज अब्दुल रहमान मक्की के साथ काम किया था। 2013 की शुरुआत में मक्की ने उससे पाकिस्तान के भीतर यात्रा के खर्च के लिए पैसे मांगे थे।
नवंबर 2010 में ओएफएसी ने कार्यकारी आदेश 13224 के तहत मक्की को भी आतंकवादी घोषित किया था।

कब से आतंकवादी संगठन के लिए काम कर रहा था सरवर?
ओएफएसी के अनुसार, सरवर का लश्कर-ए-तैयबा से जुड़ाव 2000 के दशक की शुरुआत से था। संगठन के लाहौर अमीर के तौर पर वह सीधे धन जुटाने के काम में शामिल था। वह संगठन की ओर से धन जुटाने और उसे एक जगह से दूसरी जगह भेजने के लिए पाकिस्तान की औपचारिक वित्तीय व्यवस्था का इस्तेमाल करता था।

ओएफएसी के मुताबिक, 2008 में सरवर ने कारोबारियों के कई प्रतिनिधिमंडलों को लश्कर-ए-तैयबा के ठिकानों पर ले जाकर संगठन के लिए चंदा मांगा था।ओएफएसी के मुताबिक, 2009 के मध्य तक सरवर लाहौर में लश्कर-ए-ताइबा के लिए धन जुटाने वाले विभाग के दो प्रमुख लोगों में शामिल था।
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