अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में पाम बे सिटी काउंसिल के सदस्य यानी पार्षद चैंडलर लैंगविन अपने विवादास्पद सोशल मीडिया पोस्ट्स को लेकर घिर गए हैं। लैंगविन ने भारतीय समुदाय के खिलाफ नफरत भरे बयान दिए, जिसमें उन्होंने भारतीयों को देश से निष्कासित करने तक की मांग की। इस बयान के बाद अमेरिकी सांसदों और भारतीय-अमेरिकी समूहों ने उनके इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।
स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लैंगविन ने तीन हफ्तों के भीतर कई पोस्ट्स किए, जिनमें उन्होंने भारतीय समुदाय को निशाना बनाया। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा कि आज मेरा जन्मदिन है और मैं चाहता हूं कि ट्रंप सभी भारतीय वीजा रद्द कर दें और उन्हें तुरंत निर्वासित करें। अमेरिका अमेरिकियों के लिए है।
लगातार दे रहे थे भारत विरोधी बयान
एक अन्य पोस्ट में उन्होंने लिखा कि जो लोग सिर्फ भारतीयों को नौकरी देते हैं, भारत में पैसे भेजते हैं, भारतीय चुनावों में हिस्सा लेते हैं, अमेरिकी सरकारी इमारतों पर भारतीय झंडा फहराने की मांग करते हैं और जिनके परिवार का कोई सदस्य अमेरिकी सेना में सेवा नहीं करता, उनकी निष्ठा भारत के प्रति है और उन्हें निष्कासित कर देना चाहिए।
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29 सितंबर से, भारतीय-अमेरिकी समूहों ने पाम बे सिटी काउंसिल की बैठकों में इस मुद्दे को उठाया और लैंगविन के इस्तीफे की मांग की। काउंसिल ने इस मामले में तीन से दो के वोट से सेंशर प्रस्ताव पारित किया। इसके तहत लैंगविन को काउंसिल की समितियों से हटा दिया गया, उन्हें मंच पर बोलने से रोका गया और यह भी तय किया गया कि वे बिना सर्वसम्मति के कोई नया प्रस्ताव नहीं रख सकेंगे। सेंट्रल फ्लोरिडा पब्लिक मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, यह प्रस्ताव उनके व्यवहार पर सार्वजनिक निंदा का प्रतीक है।
राजनीतिक और सामाजिक विरोध
राष्ट्रीय स्तर पर भी इस विवाद ने व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की है। हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स नामक संगठन ने फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डीसेंटिस से खुले पत्र में लैंगविन को पद से हटाने की मांग की। एशियन अमेरिकन होटल ओनर्स एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष भरत पटेल ने कहा कि लैंगविन की टिप्पणियां इतिहास की सबसे अंधेरी नफरत भरी भाषा की याद दिलाती हैं, जो हिंसा को भड़का सकती हैं। वहीं, भारतीय-अमेरिकी बिजनेस एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रशांत पटेल ने इसे गंभीर रूप से समाज को बांटने वाला कदम बताया।
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अमेरिकी सांसदों की तीखी प्रतिक्रिया
रिपब्लिकन पार्टी के कई सदस्यों, जैसे फ्लोरिडा के सांसद माइक हेरिडोपोलोस और सीनेटर रिक स्कॉट, ने भी लैंगविन की भाषा की आलोचना की। भारतीय-अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि यह अस्वीकार्य और खतरनाक है कि 2025 में भी कोई निर्वाचित अधिकारी भारतीय-अमेरिकियों के सामूहिक निष्कासन की बात कर रहा है। यह ट्रंप की ‘मास ICE रेड्स’ जैसी अमानवीय नीतियों की याद दिलाता है।
लैंगविन की सफाई और माफी
कड़ी आलोचना के बीच लैंगविन ने आठ अक्तूबर को ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए देशभक्त हिंदू अमेरिकियों से माफी मांगी, लेकिन साथ ही कहा कि वे सभी अवैध और अधिकांश कानूनी आप्रवासन के विरोधी हैं। उन्होंने कहा कि वे अपनी सीट छोड़ने का इरादा नहीं रखते। लैंगविन ने दावा किया कि भारतीय समुदाय के कुछ सदस्यों से उनकी सकारात्मक बातचीत हुई है और वे “कॉमन ग्राउंड” खोजने की कोशिश कर रहे हैं। अमेरिका में लगभग 50 लाख भारतीय मूल के लोग रहते हैं, जिनमें से करीब 2.1 लाख फ्लोरिडा में हैं।