भारत अमेरिका व्यापार समझौता (प्रतीकात्मक)
- फोटो : एडॉब स्टॉक
अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने भारत से आयात होने वाले वेल्डेड स्टेनलेस स्टील लाइन और प्रेशर पाइप पर चल रही काउंटरवेलिंग ड्यूटी जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट टाल दी है। पहले विभाग को 8 अक्तूबर तक प्रारंभिक फैसला देना था, लेकिन अब यह समयसीमा बढ़ाकर 14 दिसंबर कर दी गई है। यह बदलाव 21 सितंबर से प्रभावी हुआ और इसकी जानकारी अमेरिकी फेडरल रजिस्टर में प्रकाशित नोटिस में दी गई है। इस जांच में तुर्किये से होने वाले इसी तरह के आयात को भी शामिल किया गया है।
आखिर जांच किस बात को लेकर हो रही है?
अमेरिकी वाणिज्य विभाग यह देख रहा है कि भारत और तुर्किये के वेल्डेड स्टेनलेस लाइन और प्रेशर पाइप बनाने वाले उत्पादकों और निर्यातकों को उनकी सरकारों से ऐसी कोई सब्सिडी मिली है या नहीं, जिस पर अमेरिका अतिरिक्त शुल्क लगा सकता है। यह जांच इस बात पर केंद्रित है कि सरकारी वित्तीय मदद से इन विदेशी कंपनियों को अमेरिकी बाजार में अनुचित बढ़त तो नहीं मिली।
समय बढ़ाने की मांग किसने और क्यों की?
जांच शुरू कराने वाली तीन अमेरिकी कंपनियों-ब्रिस्टल पाइप एंड ट्यूब इंक., फेलकर ब्रदर्स कॉरपोरेशन और प्राइमस पाइप एंड ट्यूब इंक ने अतिरिक्त समय मांगा था। इन कंपनियों ने 10 सितंबर को अपनी मांग रखी थी। उन्होंने जांच में शामिल मुद्दों की जटिलता और कथित सब्सिडी कार्यक्रमों की संख्या को समय बढ़ाने की वजह बताया। कंपनियों ने यह भी कहा कि जवाब देने वाली कंपनियों ने वाणिज्य विभाग की शुरुआती प्रश्नावली का जवाब अभी तक नहीं दिया है।
अब जांच में आगे क्या होगा?
अमेरिकी कानून के तहत वाणिज्य विभाग को आम तौर पर जांच शुरू होने के 65 दिनों के भीतर प्रारंभिक फैसला देना होता है। लेकिन टैरिफ एक्ट, 1930 की धारा 703 के तहत समयसीमा को बढ़ाकर अधिकतम 130 दिन किया जा सकता है, अगर याचिकाकर्ता समय पर अनुरोध करे। विभाग ने कहा कि कंपनियों ने तय समय के भीतर अनुरोध किया और इसके कारण भी बताए। इसके बाद विभाग ने समय बढ़ाने के अनुरोध को स्वीकार कर लिया।
मामले से जुड़ी जरूरी बातें
- प्रारंभिक फैसले की पुरानी समयसीमा 8 अक्तूबर थी, जिसे अब बढ़ाकर 14 दिसंबर कर दिया गया है। जांच में भारत के साथ-साथ तुर्किये से आने वाले वेल्डेड स्टेनलेस पाइप भी शामिल हैं।
- अमेरिकी विभाग यह पता लगाएगा कि संबंधित उत्पादकों को सरकारी सब्सिडी मिली या नहीं। जांच शुरू कराने वाली तीन अमेरिकी कंपनियों ने 10 सितंबर को समय बढ़ाने की मांग की थी।
- कंपनियों ने जांच की जटिलता और कथित सब्सिडी कार्यक्रमों की संख्या का हवाला दिया। शुरुआती फैसला यह बताएगा कि कोई ऐसी सब्सिडी मिली है या नहीं और उसकी अनुमानित दर कितनी है।
- समयसीमा बढ़ना भारतीय उत्पादकों के खिलाफ कोई फैसला नहीं है; विभाग को जांच पूरी करने के लिए अतिरिक्त समय मिला है।
क्या भारत पर अभी कोई अतिरिक्त शुल्क लगा है?
मौजूदा समय में यह केवल जांच का चरण है। प्रारंभिक फैसला आने के बाद ही पता चलेगा कि विभाग को ऐसी सब्सिडी मिलने के शुरुआती सबूत मिले हैं या नहीं। इसके बाद अमेरिकी व्यापार प्रक्रिया में एक और अहम भूमिका अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कमीशन की होगी, जो यह देखता है कि इन आयातों से अमेरिकी घरेलू उद्योग को वास्तविक नुकसान हुआ है या नुकसान का खतरा है या नहीं। स्थायी काउंटरवेलिंग ड्यूटी आदेश के लिए इस प्रक्रिया में अंतिम स्तर पर जरूरी सकारात्मक फैसले होने चाहिए। अगर इनमें से कोई जरूरी अंतिम फैसला नकारात्मक रहता है तो ऐसा शुल्क आदेश लागू नहीं किया जाएगा। अगर सभी जरूरी शर्तें पूरी होती हैं, तो अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन वाणिज्य विभाग द्वारा तय दर के आधार पर शुल्क वसूल करेगा।