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ट्रंप के खिलाफ उतरी अमेरिकी मीडिया: प्रमुख टीवी चैनलों ने राष्ट्रपति की कवरेज पर लगाई रोक, क्यों लिया फैसला?

Mon, 21 Sep 2026 10:18 PM IST
शिवम गर्ग एएनआई, वॉशिंगटन

सार

व्हाइट हाउस से कुछ चैनलों को प्रतिबंधित किए जाने के बाद बड़े टीवी नेटवर्कों ने संयुक्त रूप से विरोध जताया। इसके बाद राष्ट्रपति के निर्धारित कार्यक्रमों की साझा पूल कवरेज रोक दी गई। ट्रंप के फैसले के बाद अमेरिकी मीडिया में विरोध क्यों बढ़ा?
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ट्रंप बनाम मीडिया - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की ओर से सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित किए जाने के बाद देश के प्रमुख टीवी नेटवर्क ने संयुक्त रूप से विरोध जताया है। एबीसी न्यूज, सीबीएस न्यूज, फॉक्स न्यूज मीडिया और एनबीसी न्यूज समेत व्हाइट हाउस टेलीविजन पूल के सदस्यों ने कहा कि किसी सरकार को अपनी रिपोर्टिंग पसंद न आने के कारण किसी समाचार संगठन की पहुंच सीमित नहीं करनी चाहिए।

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नेटवर्कों ने संयुक्त बयान में कहा कि जनता को अपनी सरकार के बारे में सटीक और स्वतंत्र जानकारी हासिल करने में महत्वपूर्ण हित है। बयान के मुताबिक, किसी समाचार संगठन की रिपोर्टिंग से असहमति के कारण उसकी पहुंच पर रोक नहीं लगाई जानी चाहिए।

राष्ट्रपति के कार्यक्रमों की पूल कवरेज रोकी
सीएनएन के मुताबिक, व्हाइट हाउस टीवी पूल ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन कार्यक्रमों की कवरेज रोक दी है, जिन्हें पूल कवरेज के लिए निर्धारित किया गया था। यह फैसला सीएनएन को उसकी निर्धारित पूल ड्यूटी पूरी करने से रोके जाने के बाद लिया गया। 
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व्हाइट हाउस टीवी पूल में प्रमुख नेटवर्क बारी-बारी से राष्ट्रपति के छोटे कार्यक्रमों और यात्राओं की वीडियो कवरेज करते हैं। इसके बाद यह फुटेज दुनिया भर के समाचार संगठनों, स्थानीय टीवी स्टेशनों और अखबारों के लिए साझा की जाती है।  हालांकि, पूल की ओर से बताया गया कि यह रोक सिर्फ राष्ट्रपति के निर्धारित पूल कार्यक्रमों पर लागू होगी। कांग्रेस, वीआईपी और वॉशिंगटन समेत देश के अन्य हिस्सों में होने वाले चयनित कार्यक्रमों की कवरेज सामान्य रूप से जारी रहेगी।



सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको ने किया मुकदमा
ट्रंप की ओर से तीनों मीडिया संगठनों को व्हाइट हाउस से प्रतिबंधित किए जाने के बाद सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको ने सोमवार को अमेरिकी संघीय अदालत का रुख किया। इन संगठनों ने प्रशासन की कार्रवाई को अमेरिकी संविधान के प्रथम संशोधन के तहत मिले अधिकारों के खिलाफ बताया है। 

रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों संगठन व्हाइट हाउस तक अपने पत्रकारों की पहुंच बहाल करने के लिए अस्थायी रोक लगाने की मांग कर रहे हैं। मामले में इस सप्ताह आपात सुनवाई हो सकती है। 

ट्रंप ने फैसले को बताया 'फेक न्यूज' के खिलाफ कार्रवाई
ट्रंप ने तीनों मीडिया संस्थानों पर रोक लगाने का बचाव किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यह कदम स्वतंत्र प्रेस पर हमला नहीं, बल्कि उनके मुताबिक 'फेक न्यूज' के खिलाफ कार्रवाई है। ट्रंप ने इन मीडिया संस्थानों की रिपोर्टिंग पर भी सवाल उठाए हैं। शनिवार को प्रतिबंध लागू होने के बाद सीएनएन, एमएस नाउ और पोलिटिको के पत्रकारों को व्हाइट हाउस परिसर में प्रवेश नहीं दिया गया और कुछ पत्रकारों के प्रेस पास भी वापस ले लिए गए। 
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प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर बहस तेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अमेरिका में व्हाइट हाउस और मीडिया के बीच संबंधों तथा पत्रकारों की सरकारी संस्थानों तक पहुंच को लेकर बहस तेज हो गई है। प्रमुख टीवी नेटवर्कों का संयुक्त रुख और तीन मीडिया संस्थानों की कानूनी चुनौती अब इस विवाद को अदालत तक ले गई है। 

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