सीआईएसए पर ट्रंप प्रशासन का एक्शन
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अमेरिका की साइबर सुरक्षा एजेंसी, साइबर सुरक्षा और बुनियादी ढांचा सुरक्षा एजेंसी (सीआईएसए) ने अपने चुनाव सुरक्षा से जुड़े कई कर्मचारियों को प्रशासनिक अवकाश पर भेज दिया है। इससे देशभर के राज्य और स्थानीय चुनाव कार्यालयों को मिलने वाली अहम सुरक्षा मदद प्रभावित हो सकती है। एक सूत्र के अनुसार, सीआईएसए के 17 कर्मचारियों को हाल ही में छुट्टी पर भेज दिया गया है। ये कर्मचारी चुनाव अधिकारियों को साइबर हमलों, रैंसमवेयर और भौतिक सुरक्षा खतरों से बचाने के लिए प्रशिक्षण और आकलन दे रहे थे। वहीं 10 क्षेत्रीय चुनाव सुरक्षा विशेषज्ञ, जिन्हें 2024 के चुनावों से पहले नियुक्त किया गया था, भी इस फैसले से प्रभावित हुए हैं। इनका काम चुनाव अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करना था।
सीआईएसए के फैसले पर अधिकारियों ने जताई चिंता
इस फैसले को लेकर राज्य के चुनाव अधिकारियों ने चिंता जताई है। केंटकी के सचिव माइकल एडम्स (रिपब्लिकन)ने कहा कि सीआईएसए के ग्राउंड स्टाफ ने स्थानीय चुनाव कार्यालयों की बहुत मदद की है। वहीं, मिशिगन की सचिव जोसलीन बेंसन (डेमोक्रेट) ने भी कहा कि सीआईएसए चुनाव सुरक्षा के लिए एक अहम सहयोगी रही है।
सीआईएसए से नाराज हैं राष्ट्रपति ट्रंप
यह फैसला ऐसे समय पर आया है जब सीआईएसए की भविष्य की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके सहयोगी एजेंसी की चुनाव सुरक्षा और गलत सूचना रोकने की नीतियों को लेकर नाराज रहे हैं। ट्रंप के नए सुरक्षा सचिव क्रिस्टी नोएम ने हाल ही में कहा कि सीआईएसए अपने असली मिशन से भटक गई है।
ट्रंप के पहले कार्यकाल में हुआ था CISA का गठन
बता दें कि, सीआईएसए को 2018 में ट्रंप प्रशासन के दौरान अमेरिका के महत्वपूर्ण ढांचे जैसे बांध, परमाणु संयंत्र, बैंक और मतदान प्रणालियों की सुरक्षा के लिए बनाया गया था। लेकिन 2020 के चुनावों और कोविड-19 से जुड़ी गलत सूचनाओं पर एजेंसी की भूमिका को लेकर विवाद जारी है। सीआईएसए की आगे की योजना को लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।