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Gaza Conflict: गाजा युद्धविराम वार्ता से अमेरिका ने झाड़ा पल्ला, हमास पर लगाए आरोप; लोगों की भुखमरी बनी चुनौती

Fri, 25 Jul 2025 04:32 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

डेढ़ साल से ज्यादा समय से चल रहे इस्राइल और हमास के बीच के संघर्ष में गाजा की स्थिति बदहाल हो गई है। ऐसे में इस संघर्ष में नया मोड़ तब आया जब कतर में चल रही युद्धविराम वार्ता से अमेरिका ने अपनी टीम वापस बुला ली। राष्ट्रपति ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने हमास पर ईमानदारी से बातचीत न करने का आरोप लगाते हुए कहा कि अब अन्य विकल्पों पर विचार किया जाएगा। इसके बाद इस्राइल ने भी अपनी टीम को वार्ता से हटा लिया।

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गाजा संघर्ष - फोटो : ANI
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विस्तार
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इस्राइल और हमास के बीच लगभग डेढ साल से ज्यादा समय से चल रहे संघर्ष में गाजा पट्टी में जबरदस्त तबाही मची। मौत के मंजर के बढ़ते स्वरूप को देखते हुए हाल के महीनों में कई अमेरिका, कतर और मिस्र जैसे देशों के प्रयास के बाद संघर्ष विराम को लेकर बातचीत भी तेज होने की संभावनाएं दिखने लगी। ऐसे में गुरुवार को अमेरिका ने एक बड़ा फैसला लेते हुए अपने आप को गाजा युद्धविराम वार्ता से पीछे हटने का फैसला किया और कतर में बातचीत कर रही अपनी टीम को वापस बुला लिया। मामले में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने हमास पर युद्धविराम में दिलचस्पी ना होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि हमास का ताजा जवाब दिखाता है कि उसे युद्धविराम में कोई दिलचस्पी नहीं है।

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दूसरे विकल्पों पर करेंगे विचार- स्टीव विटकॉफ
स्टीव विटकॉफ ने कहा कि हमास समन्वित तरीके से नहीं चल रहा और न ही वह ईमानदारी से बातचीत कर रहा है। हम अब दूसरे विकल्पों पर विचार करेंगे, ताकि बंधकों को छुड़ाया जा सके और गाजा में हालात थोड़े बेहतर हो सकें। हालांकि अभी तक अमेरिका किन विकल्पों पर विचार कर रहा है, इस बात का खुलासा नहीं किया गया है।

इस्राइल ने भी अपनी टीम वापस बुलाई
अमेरिका के बाद इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी गुरुवार को अपनी वार्ता टीम को वापस बुला लिया। उनके कार्यालय ने अमेरिका, कतर और मिस्र के प्रयासों की सराहना की, लेकिन बातचीत से हटने के कारण पर कोई विस्तार नहीं दिया।
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वार्ता का संभावित प्रस्ताव क्या था?
बता दें कि गाजा में बिगड़ते हालात को देखते हुए वार्ता में एक 60 दिन का युद्धविराम प्रस्तावित था, जिसमें हमास दस जीवित बंधकों को और 18 मृतकों के शवों को चरणबद्ध तरीके से छोड़ता। बदले में इस्राइल कुछ फलस्तीनी कैदियों को रिहा करता और मानवीय सहायता को बढ़ाता। लेकिन हमास की मांग है कि इस्राइल पूरी तरह पीछे हटे और युद्ध पूरी तरह समाप्त हो, तभी वह सभी बंधकों को छोड़ेगा। वहीं इस्राइल का कहना है कि जब तक हमास सत्ता नहीं छोड़ता और अपने हथियार नहीं डालता, वह युद्ध खत्म नहीं करेगा।

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गाजा संघर्ष - फोटो : ANI

जमीन पर हालात बिगड़ते जा रहे हैं
गाजा में हालात बहुत खराब हो गए हैं। बीते रविवार को गाजा में भोजन लेने पहुंचे लोगों पर हमले में कम से कम 85 फलस्तीनी मारे गए, जो अब तक का सबसे खतरनाक दिन बताया जा रहा है। कई हफ्तों से कतर में इस्राइल और हमास के बीच बातचीत चल रही थी, जिसमें कुछ हल्की प्रगति तो हुई, लेकिन कोई ठोस समझौता नहीं हो पाया। मुख्य विवाद यह है कि युद्धविराम के बाद इजरायली सेना को किस हद तक पीछे हटना होगा।

ट्रंप की शांति योजना को झटका
डोनाल्ड ट्रंप ने खुद को शांति स्थापित करने वाला नेता बताने की कोशिश की थी और इसीलिए वे इस वार्ता में शामिल हुए। उन्होंने इससे पहले इस्राइली प्रधानमंत्री नेतन्याहू से व्हाइट हाउस में मुलाकात की थी, लेकिन कोई ठोस सफलता नहीं मिली।  ट्रंप ने रूस-यूक्रेन युद्ध को भी जल्द खत्म करने का वादा किया था, लेकिन उसमें भी खास प्रगति नहीं हुई है।

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गाजा में भुखमरी की स्थिति
गाजा में स्थिति बेहद खराब है। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, करीब एक लाख महिलाएं और बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार हैं। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी भूख से मौत के मामलों में वृद्धि की पुष्टि की है। इस संघर्ष में गाजा की बदहाल होती स्थिति को लेकर 28 पश्चिमी देशों ने इस्राइल की निंदा करते हुए युद्ध समाप्त करने की मांग की है। 100 से ज्यादा मानवाधिकार और सहायता संगठनों ने भी कहा है कि वहां के लोग भूख से मर रहे हैं और मदद नहीं पहुंच रही।

अमेरिका ने किया अपने सहायता मॉडल का बचाव
वहीं मामले में इस्राइल का कहना है कि वह पर्याप्त सहायता भेज रहा है, लेकिन यूएन एजेंसियां कह रही हैं कि इस्राइल की पाबंदियों और कानून-व्यवस्था की खराब स्थिति के कारण मदद सुरक्षित तरीके से नहीं पहुंच पा रही। हालांकि दूसरी ओर अमेरिका ने अपने सहायता मॉडल का बचाव भी किया। साथ ही कहा कि गाजा में अब तक नौ करोड़ भोजन पहुंचाए जा चुके हैं। लेकिन जमीनी हालात कह रहे हैं कि गाजा अब भी भयंकर मानवीय संकट से जूझ रहा है।

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