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वीजा नीति पर अमेरिकी अदालत के फैसले से दो लाख भारतीय छात्रों को राहत

Tue, 07 May 2019 01:11 AM IST
गौरव द्विवेदी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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सांकेतिक तस्वीर
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अमेरिका की एक अदालत ने अपने फैसले से करीब दो लाख भारतीयों छात्रों को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने भारतीयों को वीजा नीति में फौरी राहत देने का आदेश दिया है। यह आदेश यूनाइटेड स्टेट सिटीजनशिप और इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) को वह प्रतिकूल नीति लागू करने से रोकता है, जिसके तहत अंतरराष्ट्रीय छात्रों (उनके आश्रित जैसे पति/पत्नी और बच्चे भी) के वहां रहने पर ‘गैरकानूनी उपस्थिति’ करार दिया जाता है।

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कोर्ट का यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ‘गैरकानूनी उपस्थिति’ जैसा कानून एक निश्चित अवधि के लिए अमेरिका में प्रवेश करने से रोक सकता है। अमेरिका से जाने से पहले जो भी व्यक्ति वहां 180 दिन से ज्यादा समय तक गैरकानूनी तरीके से रहा हो तो उसे अगले तीन साल तक दोबारा अमेरिका में जाने से रोका जा सकता है। इसके अलावा अमेरिका में एक साल से ज्यादा समय तक गैरकानूनी तौर पर रहे व्यक्ति को 10 साल तक के लिए यहां आने से रोका जा सकता है। 

यह आदेश 3 मई को उस याचिका के जवाब में आया है, जिसे गिलफोर्ड कालेज, द न्यू स्कूल और कई दूसरों कालेजों ने दायर किया था। मामला कोर्ट में पहुंचने के बाद मेयर ब्राउन में पार्टनर पॉल ह्यू ने बताया था, ‘इसका उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय छात्रों के अधिकारों को सुरक्षित करना है। नई यूएससीआईएस नीति ने दो दशक से भी ज्यादा से चली आ रही आव्रजन की प्रक्रिया को खराब किया है, जो गैरकानूनी है।’
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नए कानून ने शुरू की थी दिक्कत

यह मामला यूएससीआईएस की उस नीति (जिसे फिलहाल कोर्ट ने लागू होने से रोक दिया है) से जुड़ा है, जो 9 अगस्त 2018 को लागू हुई। इसके तहत वीजा अवधि या डिग्री पूरी होते ही विदेशी छात्र अगर अमेरिका में रहते हैं तो उसे ‘गैरकानूनी उपस्थिति’ करार दिया जाएगा। इससे पहले के नियमों के मुताबिक, वीजा अवधि खत्म होने पर भी छात्र 6 महीने तक अमेरिका में रह सकते थे। 

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