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US: ट्रंप की हत्या की साजिश करने वाला पाकिस्तानी व्यक्ति दोषी करार, ईरान के कहने पर बनाया था प्लान

Sat, 07 Mar 2026 08:41 AM IST
अमन तिवारी वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

न्यूयॉर्क की अदालत ने एक पाकिस्तानी नागरिक को डोनाल्ड ट्रंप और अन्य अमेरिकी नेताओं की हत्या की साजिश रचने का दोषी पाया है। वह ईरानी सेना के इशारे पर काम कर रहा था। उसने कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए यह योजना बनाई थी। 

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ट्रंप की हत्या की साजिश करने वाला पाकिस्तानी व्यक्ति दोषी करार - फोटो : ANI Photos
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विस्तार
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न्यूयॉर्क में एक पाकिस्तानी व्यक्ति को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अन्य नेताओं की हत्या की साजिश रचने का दोषी पाया गया है। इस व्यक्ति के संबंध ईरान से हैं। उसने यह साजिश ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए रची थी। सुलेमानी की मौत साल 2020 में एक अमेरिकी हमले में हुई थी।
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मामले में 48 साल के आसिफ रजा मर्चेंट को शुक्रवार को ब्रुकलिन की अदालत में दोषी ठहराया गया। एक फेडरल जूरी ने उसे भाड़े पर हत्या करने और आतंकवाद फैलाने की कोशिश का अपराधी माना। मर्चेंट को अब उम्रकैद की सजा हो सकती है। अमेरिकी अटॉर्नी जनरल पामेला बोंडी ने बताया कि मर्चेंट खास तौर पर ट्रंप को मारने के इरादे से अमेरिका आया था।

आईआरजीसी से मिला दोषी का लिंक
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, मर्चेंट 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (आईआरजीसी) का एक प्रशिक्षित एजेंट था। उसने अदालत में माना कि साल 2024 में आईआरजीसी ने उसे राजनीतिक हत्याओं का इंतजाम करने के लिए अमेरिका भेजा था। उसके निशाने पर ट्रंप के अलावा पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन और निक्की हेली भी हो सकते थे। मर्चेंट ने स्वीकार किया कि उसका मुख्य लक्ष्य ट्रंप ही थे।
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मर्चेंट अप्रैल 2024 में अमेरिका पहुंचा था। जून में वह कुछ लोगों से मिला जिन्हें वह हत्यारा समझ रहा था। असल में वे न्यूयॉर्क पुलिस के अंडरकवर अधिकारी थे। जुलाई 2024 में देश छोड़ने से पहले ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया। पामेला बोंडी ने कहा कि यह आदमी ट्रंप को मारने की उम्मीद में आया था, लेकिन उसका सामना अमेरिकी कानून की ताकत से हुआ।

एफबीआई ने क्या कहा?
एफबीआई के अनुसार, मर्चेंट ने ईरानी शासन के कहने पर अमेरिकी नेताओं की हत्या की योजना बनाई थी। यह लोकतंत्र पर हमला करने की एक नाकाम कोशिश थी। मर्चेंट ने 2022 के अंत में आईआरजीसी के लिए काम करना शुरू किया था। वहां उसने जासूसी और निगरानी की ट्रेनिंग ली थी। इसके बाद उसे अमेरिका में नए लोगों को भर्ती करने के लिए भेजा गया।

मर्चेंट ने गवाही दी कि उसे सुलेमानी की मौत का बदला लेने का काम सौंपा गया था। इसके लिए उसने न्यूयॉर्क में एक परिचित से संपर्क किया। उस व्यक्ति ने पुलिस को इसकी जानकारी दे दी और वह गवाह बन गया। जून 2024 में मर्चेंट ने उस गवाह को बताया कि उसके पास हत्या का एक मौका है। उसने हाथ से बंदूक का इशारा करके अपनी योजना समझाई।
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इन कामों के लिए दिए थे पैसे
मर्चेंट ने अंडरकवर अधिकारियों से तीन काम करने को कहा, जिसमें दस्तावेज चोरी करना, रैलियों में विरोध प्रदर्शन करना और एक बड़े नेता को मारना शामिल था। उसने रैलियों की सुरक्षा के बारे में अपने ईरानी हैंडलर को रिपोर्ट भी भेजी थी। उसने हत्या के लिए 5,000 डॉलर का एडवांस पेमेंट भी किया। 21 जून को पैसे देते समय उसने अधिकारियों से कहा कि अब वे इस काम के लिए साथ हैं। इसके बाद उसने अमेरिका से भागने की तैयारी की, लेकिन पुलिस ने उसे दबोच लिया। मर्चेंट ने माना कि वह जानता था कि आईआरजीसी एक आतंकी संगठन है। वह अपने हैंडलर से मिलने कई बार ईरान भी गया था।

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