अमेरिकी कमांडर ने तीन खतरनाक युद्ध ट्रेंड भी गिनाए
इसके साथ ही इंडो-पैसिफिक कमांड के प्रमुख सैमुअल जे पापारो ने आधुनिक युद्ध के तीन बड़े ट्रेंड गिनाए। उन्होंने कहा कि अब लड़ाई सिर्फ हथियारों से नहीं, बल्कि सूचना और साइबर हमलों से भी लड़ी जा रही है। फर्जी एआई तस्वीरों के जरिए दुश्मन पर मानसिक दबाव बनाया जा रहा है। इसके अलावा सस्ते और बड़ी संख्या में ड्रोन और बिना चालक वाले हथियार युद्ध का चेहरा बदल रहे हैं, जबकि लंबी दूरी की मिसाइलें तेजी से हमला करने की क्षमता बढ़ा रही हैं।
पापारो ने यह भी चेतावनी दी कि चीन, रूस और उत्तर कोरिया के बीच बढ़ता सहयोग अमेरिका के लिए खतरे को और जटिल बना रहा है। उनके मुताबिक, यह गठजोड़ किसी भी क्षेत्रीय संकट को और गंभीर बना सकता है। ताइवान को लेकर अमेरिका ने अपना रुख साफ रखा है। उसने कहा है कि वह ताइवान की रक्षा क्षमता को मजबूत करता रहेगा। यह नीति ताइवान संबंध अधिनियम पर आधारित है, जिसके तहत अमेरिका ताइवान को सुरक्षा सहायता देता है।
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अमेरिका की रणनीति कितनी साफ?
हालांकि अमेरिका की रणनीति साफ है कि वह चीन को सैन्य आक्रामकता से रोकना चाहता है और अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर ताकत बढ़ा रहा है। इसके साथ ही नई तकनीक और आधुनिक हथियारों में तेजी से निवेश किया जा रहा है। पापारो ने कहा कि अमेरिका को अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने के लिए ज्यादा मिसाइल और ड्रोन बनाने होंगे, एयर डिफेंस सिस्टम को मजबूत करना होगा और नौसेना व वायुसेना का विस्तार करना होगा। उन्होंने यह भी माना कि मौजूदा उत्पादन क्षमता युद्ध की जरूरतों के मुकाबले धीमी है।
अपने संशाधन बढ़ा रहा चीन, अमेरिका के लिए खतरा कैसे?
गौरतलब है कि चीन तेजी से अपने सैन्य संसाधन बढ़ा रहा है। 2024 के बाद से चीन 12 पनडुब्बियां, एक विमानवाहक पोत, 10 युद्धपोत और 7 फ्रिगेट तैयार कर चुका है, जो उसकी बढ़ती सैन्य ताकत को दिखाता है। पापारो ने साफ कहा कि 21वीं सदी में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सबसे अहम है। अगर अमेरिका अभी तैयारी और निवेश नहीं करता, तो भविष्य में उसे कमजोर स्थिति में युद्ध का सामना करना पड़ सकता है। कुल मिलाकर, अमेरिका के सामने इस समय दोहरी चुनौती है, एक तरफ ईरान के साथ जारी संघर्ष और दूसरी ओर चीन से बढ़ता खतरा, जो इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर रहा है।