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ऑस्ट्रेलिया के नुकसान का खूब उठाया अमेरिकी कंपनियों ने फायदा! चीन को बनाया बाजार

Wed, 07 Apr 2021 05:03 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग

सार

ऑस्ट्रेलिया से बढ़ते कूटनीतिक विवाद के बीच पिछले अक्टूबर में चीन ने अघोषित रूप से ऑस्ट्रेलिया से तमाम वस्तुओं का आयात रोक दिया था। उससे चीजों की हुई कमी को पूरा करने के लिए चीन ने अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और कोलंबिया से कोयले का आयात शुरू कर दिया...
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आस्ट्रेलिया-चीन का झंडा - फोटो : फाइल
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विस्तार
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ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच छिड़े विवाद के कारण चीन ने ऑस्ट्रेलियाई कोयले का आयात रोक दिया। इससे वहां हुई कोयले की कमी के एक बड़े हिस्से को अमेरिकी कंपनियों ने पूरा कर दिया। जानकारों की राय में ये विडंबना ही है कि ऑस्ट्रेलिया अमेरिकी रणनीति का हिस्सा बन कर चीन के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मुहिम में शामिल हुआ, जिसका नुकसान उसे उठाना पड़ा। जबकि अमेरिकी कंपनियों ने इसमें अपने लिए अवसर तलाश लिए।  

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ऑस्ट्रेलिया से बढ़ते कूटनीतिक विवाद के बीच पिछले अक्टूबर में चीन ने अघोषित रूप से ऑस्ट्रेलिया से तमाम वस्तुओं का आयात रोक दिया था। उससे चीजों की हुई कमी को पूरा करने के लिए चीन ने अमेरिका, दक्षिण अफ्रीका और कोलंबिया से कोयले का आयात शुरू कर दिया। जबकि पहले वह कोयले के आयात के लिए मुख्य रूप से इंडोनेशिया, रूस, मंगोलिया और ऑस्ट्रेलिया पर निर्भर था। ऑस्ट्रेलियाई कोयले की कमी को पूरा करने के लिए चीन ने इंडोनेशिया, रूस और मंगोलिया से आयात की मात्रा बढ़ा दी है।

अब चीन में जारी ताजा कस्टम आंकड़ों के मुताबिक बीते फरवरी में अमेरिका ने चीन को लगभग तीन लाख टन कोयले का निर्यात किया। पिछले अक्टूबर तक अमेरिका से चीन को कोकिंग कोयले का कोई निर्यात नहीं होता था। इसी कोयले का इस्तेमाल स्टील उत्पादन में होता है। इसके अलावा चीन ने अमेरिकी कंपनियों से 52.4 अरब डॉलर के ऊर्जा उत्पादों की खरीद का करार भी किया है। पिछले साल चीन ने अमेरिका से जितने ऊर्जा उत्पादों की खरीद का लक्ष्य रखा था, उसका वह 39 फीसदी ही पूरा कर पाया। लेकिन इस साल वह तय लक्ष्य का 80 फीसदी हिस्सा अब तक खरीद चुका है। ये बात दो हफ्ते पहले अमेरिका के पीटरसन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल इकॉनमिक्स के सीनियर फेलॉ चैड बॉवन ने बताई थी।
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दूसरी तरफ सूरत यह है कि ऑस्ट्रेलिया से चीन को होने वाले कोकिंग कोल और थर्मल कोल का निर्यात पिछले दिसंबर में पूरी तरह रुक गए। जबकि बीते अक्टूबर में इन दोनों कोल की 25 लाख टन मात्रा का ऑस्ट्रेलिया ने चीन को निर्यात किया था। हांगकांग के अखबार साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक चीन से विवाद खड़ा होने से पहले ऑस्ट्रेलिया चीन को 60 से 70 लाख टन तक थर्मल और कोकिंग कोल का निर्यात करता था।

पिछले महीने अमेरिकी कोयला कंपनी वॉरियर मेट कोल ने एक प्रजेंटेशन में बताया था कि चीन में ऑस्ट्रेलियाई कोयले पर लगे अघोषित प्रतिबंध से किस तरह अमेरिकी कोयला कंपनियों ने नए अवसर खुले हैं। कॉमोडिटी और ऊर्जा मूल्य एजेंसी अर्गस मीडिया के वरिष्ठ विश्लेषक ली राउ अर्न ने साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट से कहा- ‘(ऑस्ट्रेलिया पर) प्रतिबंध से अमेरिका की विभिन्न कंपनियों के लिए चीन में पैठ बनाने का रास्ता साफ हुआ। अगर ऑस्ट्रेलिया से चीन कोयले की बिक्री जारी रहती तो ऐसा नहीं हो पाता।’

जानकारों का कहना है कि अमेरिका का कोकिंग कोल निर्यात ऑस्ट्रेलियाई कोकिंग कोल की क्वॉलिटी, लगातार सप्लाई की क्षमता, और चीन में जरूरी मात्रा के लिहाज से पूरी भरपाई नहीं कर सकता। इसलिए चीन को कोकिंग कोल की कमी का सामना करना पड़ा है। इसकी वजह से कंपनियों को अपनी जरूरत में कटौती करनी पड़ी है। इसके बावजूद अमेरिका और दूसरे देशों से आयात बढ़ा कर चीन ने इस कमी को काफी हद तक पूरा कर लिया है। इसके अलावा चीन ने अपने घरेलू कोयले का उत्पादन भी बढ़ा दिया है।

ऑस्ट्रेलिया से बढ़े कूटनीतिक विवाद के बीच चीन ने ऑस्ट्रेलिया से झींगा मछली, वाइन, टिंबर, शक्कर और बार्ली का आयात भी रोक दिया था। इससे ऑस्ट्रेलिया को काफी आर्थिक नुकसान हुआ है। दूसरी चीन ने एशिया के दूसरे देशों से इन चीजों का आयात बढ़ा दिया। तो कुल मिला कर ये विवाद ऑस्ट्रेलिया के लिए घाटे का सौदा साबित हुआ, जबकि चीन ने अपने लिए वस्तुओं के नए स्रोत ढूंढ लिए।

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