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US: क्या CIA ने काले राज छिपाने के लिए खुफिया विभाग की प्रमुख के दफ्तर पर मारा छापा, कौन सी फाइल्स चर्चा में?

Thu, 14 May 2026 06:09 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

खुफिया विभाग की निदेशक तुलसी गबार्ड के दफ्तर पर सीआईए की तरफ से छापेमारी की बात मुख्य रूप से एक व्हिसलब्लोअर के दावों और एक न्यूज चैनल पर की गई ब्रॉडकास्ट से उठी। इसके बाद से ही अमेरिका और दुनिया में सीआईए की तरफ से जब्त 40 बॉक्स की चर्चा शुरू हो गई, जिनमें कथित तौर पर जेएफके हत्याकांड से लेकर विवादास्पद एमके-अल्ट्रा कार्यक्रम तक की फाइल्स के शामिल होने की आशंका जाहिर की गई।  
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अमेरिका के राष्ट्रीय खुफिया विभाग की निदेशक तुलसी गबार्ड। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमेरिका में एक कथित हालिया घटनाक्रम को लेकर सियासी बहस छिड़ गई है। दरअसल, हाल ही में ऐसे दावे हुए हैं कि अमेरिका की विदेश मामलों की खुफिया एजेंसी- सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी (सीआईए) ने ट्रंप सरकार में खुफिया विभाग की प्रमुख बनाई गईं तुलसी गबार्ड के ही दफ्तर पर छापेमारी कर दी। ऐसे आरोप लगाए गए हैं कि सीआईए ने खुफिया विभाग की निदेशक के घर से गोपनीय फाइल्स के करीब 40 बक्से अपने कब्जे में ले लिए। 
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अमेरिका में इस घटना की खबर सामने आने के बाद से ही विवाद इतना बढ़ गया कि तुलसी गबार्ड के दफ्तर को एक बयान जारी करना पड़ा है। साथ ही कई नेताओं ने भी जब्त दस्तावेजों को लेकर कई दावे किए हैं, जिनके बाद से पूरी दुनिया में इनकी चर्चाएं शुरू हो गईं। 

आइये जानते हैं कि यह पूरा मामला क्या है? जिन फाइल्स को जब्त करने की बात हो रही है, वह क्या हैं? क्यों इन्हें लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है?
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क्या है पूरा मामला, कैसे उठी तुलसी गबार्ड के दफ्तर पर छापेमारी की बात?

तुलसी गबार्ड के दफ्तर पर सीआईए की तरफ से छापेमारी की बात मुख्य रूप से एक व्हिसलब्लोअर के दावों और एक न्यूज चैनल पर की गई ब्रॉडकास्ट से उठी थी।

1. व्हिसलब्लोअर जेम्स एर्डमैन III ने दी गवाही
इस विवाद की शुरुआत 13 मई 2026 को हुई, जब लगभग दो दशकों तक काम कर चुके सीआईए के एक वरिष्ठ ऑपरेशंस अधिकारी और व्हिसलब्लोअर जेम्स एर्डमैन III ने संसद के उच्च सदन- सीनेट की होमलैंड सिक्योरिटी एंड गवर्नमेंटल अफेयर्स कमेटी के सामने गवाही दी। हालांकि यह सुनवाई मुख्य रूप से कोरोनावायरस की उत्पत्ति से जुड़े मामलों पर केंद्रित थी, लेकिन इसी दौरान एर्डमैन ने सांसदों को बताया कि सीआईए ने पूर्व राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी (जेएफके) और एमके अल्ट्रा (दिमाग पर नियंत्रण पाने वाला गुप्त कार्यक्रम) से जुड़े दस्तावेजों के 40 बॉक्स गबार्ड के दफ्तर से जब्त कर लिए हैं। एर्डमैन के मुताबिक, गबार्ड इन दस्तावेजों को सार्वजनिक (डीक्लासिफाई) करने की प्रक्रिया में थीं, तभी सीआईए ने अचानक कदम उठाते हुए इन फाइलों को जब्त कर लिया। 

2. फॉक्स न्यूज ने किया इन दावों का प्रसारण  
एर्डमैन की इसी गवाही का हवाला देते हुए, अमेरिकी न्यूज चैनल- फॉक्स न्यूज के टेलीविजन होस्ट जेसी वॉटर्स ने अपने शो में कहा कि सीआईए ने खुफिया विभाग की प्रमुख तुलसी गबार्ड के दफ्तर पर छापा मारा है। वॉटर्स ने शो में कहा कि एजेंटों ने दर्जनों बक्से निकाल लिए हैं, जिनमें दशकों पुराने संवेदनशील दस्तावेज थे। 

3. सांसदों की तरफ से भी मामले को तूल दिया गया
इसके बाद, अमेरिकी संसद के निचले सदन- प्रतिनिधि सभा की सदस्य (सांसद) एना पॉलिना लूना ने भी इन दावों को आगे बढ़ाया और सोशल मीडिया पर सीआईए को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर ये दस्तावेज नहीं लौटाए गए, तो वह सीआईओ को समन जारी करेंगी। 

इन तीन प्रमुख घटनाक्रमों की वजह से ही गबार्ड के दफ्तर पर छापेमारी की बात ने जोर पकड़ा। इसे लेकर बाद में गबार्ड के दफ्तर को बयान जारी करना पड़ा। 

तो क्या सच में खुफिया विभाग की प्रमुख के दफ्तर पर हुई छापेमारी?

तुलसी गबार्ड के दफ्तर पर सीआईए की छापेमारी के दावे जरूर सामने आए हैं, लेकिन उनके दफ्तर ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस की प्रेस सचिव ओलिविया कोलमैन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक बयान जारी करते हुए स्पष्ट किया यह झूठ है। सीआईए ने डीएनआई के दफ्तर पर कोई छापा नहीं मारा। 


जिन फाइल्स की जब्ती की उड़ी अफवाह, उन्हें लेकर क्यों तेज हुईं चर्चाएं?

राष्ट्रपति के आदेश की अवहेलना का लगा आरोप: रिपब्लिकन सांसद एना पॉलिना लूना के मुताबिक, राष्ट्रपति ने एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए इन फाइलों को पूरी तरह से सार्वजनिक करने का निर्देश दिया था। सीआईए पर आरोप लगा है कि उसने इन दस्तावेजों को जब्त करके सीधे तौर पर राष्ट्रपति के आदेश का उल्लंघन किया है और प्रक्रिया में बाधा डाली है।

सीआईए का दशकों पुराना झूठ पकड़ में आना: सीआईए ने अतीत में अमेरिकी संसद से यह दावा किया था कि उसके विवादास्पद एमके-अल्ट्रा (शीत युद्ध के दौरान दिमाग पर नियंत्रण के लिए प्रयोग से जुड़े कार्यक्रम) प्रोग्राम से जुड़े सभी दस्तावेज या तो जारी कर दिए गए हैं या फिर 1973 में नष्ट कर दिए गए थे। ऐसे में चर्चाएं तेज हो गईं कि अगर गबार्ड के दफ्तर में दस्तावेजों के ये 40 बॉक्स वास्तव में मौजूद थे, तो इसका सीधा मतलब है कि सीआईए ने कांग्रेस और देश को दशकों तक गुमराह किया है।

जांचकर्ताओं की अवैध जासूसी का आरोप: व्हिसलब्लोअर जेम्स एर्डमैन III ने सिर्फ फाइलों की जब्ती का ही दावा नहीं किया, बल्कि यह सनसनीखेज आरोप भी लगाया कि सीआईए ने तुलसी गबार्ड के दफ्तर में काम कर रहे जांचकर्ताओं के कंप्यूटर और फोन के इस्तेमाल की अवैध रूप से निगरानी की थी। 

जिन फाइल्स के सीआईए से जब्ती की बात उठी, उनमें क्या जानकारी है?

ये फाइलें मुख्य रूप से अमेरिकी इतिहास के सबसे बड़े रहस्यों और विवादास्पद ऑपरेशनों से जुड़ी हैं। इन्हें मुख्य रूप से दो हिस्सों में बांटा जा सकता है।

1. हाई-प्रोफाइल हत्याओं के रिकॉर्ड
इन फाइलों में पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी (जेएफके), उनके भाई रॉबर्ट एफ. कैनेडी (आरएफके) और मानवाधिकार कार्यकर्ता मार्टिन लूथर किंग जूनियर की हत्याओं से जुड़े बेहद संवेदनशील और गोपनीय दस्तावेज शामिल हैं। 

2. एमके-अल्ट्रा माइंड कंट्रोल प्रोग्राम के राज
अमेरिका की तरफ से सोवियत संघ के खिलाफ शीत युद्ध के दौरान (1953 से 1973 के बीच) एक विशेष कार्यक्रम एमके-अल्ट्रा चलाया गया था। सीआईए की तरफ से चलाया गया एक बेहद गुप्त और खौफनाक दिमाग को नियंत्रित करने का रिसर्च प्रोग्राम था। इसे मूल रूप से सोवियत संघ की माइंड-कंट्रोल तकनीक का मुकाबला करने के लिए शुरू किया गया था। 

इन फाइलों में उन अमानवीय प्रयोगों का विवरण है जो मानव व्यवहार को बदलने के लिए किए गए थे। इनमें लोगों पर एलएसडी जैसे नशीले पदार्थों, मनोवैज्ञानिक यातनाएं, नींद से वंचित रखने, सम्मोहन, इलेक्ट्रोशॉक थेरेपी और रेडिएशन का इस्तेमाल किया गया था।

इन दस्तावेजों में इस बात की जानकारी का भी अंदेशा लगाया जाता है कि कैसे यह प्रयोग बिना किसी सहमति या जानकारी के आम अमेरिकी नागरिकों, सैनिकों, कैदियों, मनोरोगियों और यहां तक कि मानसिक रूप से कमजोर बच्चों पर किए गए थे। इसके अलावा इन फाइलों से जुड़े खुलासों में यह बात भी सामने आई है कि सीआईए ने इन क्रूर प्रयोगों को अंजाम देने के लिए द्वितीय विश्व युद्ध के नाजी यातना देने वालों की भी मदद ली थी। 
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इन दस्तावेजों का सामने आना इसलिए इतना अहम माना जा रहा है क्योंकि इसके जरिए अमेरिका की जनता लंबे समय से यह जानना चाहती है कि 70 साल पहले सरकार ने अपने ही नागरिकों के साथ क्या किया था और आज भी सीआईए ऐसे कौन से राज छिपा रही है।


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