अमेरिका चीन के बीच पैदा हो गया था युद्ध का खतरा।
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अमेरिका और ईरान के बीच बीते छह महीने से ज्यादा समय से जारी संघर्ष में हाल ही में एक नया मोड़ उस वक्त आया, जब इस जंग की चपेट में चीन तक के आने का खतरा पैदा हो गया। एक हालिया रिपोर्ट में इससे जुड़ा डरावना खुलासा किया गया है और बताया गया है कि इसकी वजह कोई हमला या उकसाने वाली घटना नहीं, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) सिस्टम की गलती बन सकती थी।
यह पूरा खुलासा अमेरिकी मीडिया संस्थान सीएनएन की रिपोर्ट में किया गया है। इस रिपोर्ट ने एक बार फिर दुनियाभर में एआई से पैदा होने वाले खतरे और इसकी सुरक्षा को लेकर किए जा रहे उपायों को लेकर बहस छेड़ दी है। आइये जानते हैं कि जिस घटना को लेकर अब ताजा खुलासे हुए हैं, वह क्या थी? एआई ने क्या रिपोर्ट जारी की थी, जिसने अमेरिका को चीन के खतरे के प्रति अचानक सतर्क कर दिया? अमेरिका ने युद्ध के लिए क्या तैयारी शुरू कर दी थी? कैसे जंग सही समय पर रोकी जा सकी? आइये जानते हैं...
अमेरिका-चीन के बीच होने वाला था संघर्ष।
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अमेरिकी रक्षा मंत्रालय किस तेजी से बढ़ा रहा सेना में एआई का इस्तेमाल?
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के कार्यालय ने जनवरी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक्सीलरेशन स्ट्रैटेजी जारी की, जिसका मकसद सैन्य अभियानों में एआई को अपनाने की प्रक्रिया को तेज करना है। इसके तहत पेंटागन के लगभग 30 लाख नागरिक और सैन्य कर्मियों के हाथों में सीधे एआई मॉडल उपलब्ध कराने की योजना बनाई गई।
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एआई को लेकर पेंटागन की तैयारियां।
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हालांकि, इस तीव्र विस्तार के साथ सुरक्षा जोखिम भी बढ़ रहे हैं, क्योंकि पेंटागन के अलग-अलग विभाग बिना किसी साझा सत्यापन मानक के अलग-अलग एआई टूल का इस्तेमाल कर रहे हैं।
कैसे युद्ध का खतरा पैदा कर सकता है सेना में एआई का इस्तेमाल?
1. गलत सूचना और अचानक युद्ध का खतरा
सैन्य विश्लेषकों के मुताबिक, एआई चैटबॉट ओपन-सोर्स डेटा और गुप्त सिग्नल्स इंटेलिजेंस को मिलाते समय गंभीर गलतफहमी के शिकार हो सकते हैं। अगर सैन्य बल एआई की ओर से तैयार किए गए झूठे डेटा के आधार पर तुरंत हमला या हस्तक्षेप करते हैं, तो महाशक्तियों के बीच अनचाहा या सीधा सशस्त्र संघर्ष छिड़ सकता है।
2. मानकीकरण और सत्यापन की कमी
मौजूदा समय में विभिन्न सैन्य और खुफिया एजेंसियां बिना किसी साझा सुरक्षा या सत्यापन मानकों के अलग-अलग एआई टूल का इस्तेमाल कर रही हैं। जब एआई का गलत निष्कर्ष एक मानक खुफिया रिपोर्ट का रूप ले लेता है, तो वह काफी प्रामाणिक लगता है, जिससे सैन्य अधिकारियों द्वारा बिना गहराई से जांच किए जल्दबाजी में निर्णय लेने का जोखिम रहता है।
3. त्वरित निर्णय का दबाव और जानलेवा चूक
अमेरिका जैसे देश भविष्य के संघर्षों में चीन या अन्य प्रतिद्वंद्वियों से आगे रहने के लिए निर्णय लेने की प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दे रहे हैं। हमलों के लिए लक्ष्य तय करने और युद्धक्षेत्र में संपत्तियों की तैनाती के लिए ऑटोमेटेड प्रणालियों पर अत्यधिक निर्भरता घातक गलतियों का कारण बन सकती है।
4. तकनीक का खतरनाक इरादों के लिए इस्तेमाल
ताकतवर एआई मॉडलों का गलत इस्तेमाल सशस्त्र समूहों की ओर से भी किया जा रहा है। हाल ही में यमन के हूती विद्रोहियों ने मिसाइलों और गाइडेड रॉकेट्स के लिए नेविगेशन और कंट्रोल सॉफ्टवेयर लिखने, ड्रोन स्वार्म्स विकसित करने और टारगेटिंग सिस्टम तैयार करने के लिए एआई मॉडल का इस्तेमाल करने का प्रयास किया था।
5. मानवीय नियंत्रण से बाहर होने का डर
प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि एआई का तीव्र विकास इसे मानवीय सीमाओं व नियंत्रण से बाहर कर सकता है। इसके अलावा, अहम सैन्य और साइबर अभियानों में मानवीय नियंत्रण बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभी कोई मानक लागू नहीं हो पाया है।