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एक्सप्लेनर: अमेरिका में मंदिर में गोलीबारी की साजिश रचने वाला कौन, क्या श्वेत वर्चस्ववादी बढ़ा रहे नफरत?

Thu, 15 Oct 2026 05:32 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

इलिनोय में हिंदू मंदिर पर सामूहिक गोलीबारी की साजिश रचने वाला 19 वर्षीय एलेक्जेंड्रोस पैपोरेकिस गिरफ्तार। राइफल जाम होने और सहकर्मी की सूचना से टला बड़ा हादसा। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।
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अमेरिका में मंदिर पर हमले की साजिश हुई नाकाम। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अमेरिका के एक मंदिर में हिंदुओं की हत्या की साजिश रची गई। यह साजिश सफल भी हो जाती, लेकिन बंदूक की गड़बड़ी ने दर्जनों लोगों की जान बचा ली। मामला अमेरिका के इलिनॉय का है। यहां के ऑरोरा इलाके में स्थित मंदिर पर हमले की साजिश रचने वाले एक 19 साल के शख्स को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, जिस व्यक्ति- एलेक्जेंड्रोस पैपोरैकिस को पकड़ा गया है, उसकी विचारधारा श्वेत वर्चस्ववादियों (व्हाइट सुप्रिमेसिस्ट) की है। अमेरिका की आबादी में हिंदुओं की संख्या एक फीसदी से भी कम है।  
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आइये जानते हैं कि अमेरिका में हिंदुओं पर हमले की जिस साजिश का खुलासा हुआ है, उसके बारे में अब तक क्या-क्या सामने आया है? यह साजिश नाकाम कैसे हो गई? साजिशकर्ता के बारे में अब तक क्या-क्या सामने आया है? यह श्वेत वर्चस्ववादी क्या होते हैं? कैसे अमेरिका में इस समूह की वजह से हिंदुओं और अन्य धर्मों के खिलाफ नफरत बढ़ी है? आइये जानते हैं...
 
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पहले जानें- अमेरिका में मंदिर पर हमले की साजिश क्या थी?

आरोपी और उसकी पृष्ठभूमि: इस साजिश का मुख्य आरोपी 19 वर्षीय एलेक्जेंड्रोस पैपोरैकिस था। वह पेलेंटाइन  इलिनॉय का रहने वाला था और आर्लिंगटन स्थित एक फास्ट-फूड रेस्तरां- टाको बेल में बीते सात महीने से कैशियर के रूप में काम कर रहा था।

पुलिस के मुताबिक, कार्यस्थल पर उसके सहकर्मियों ने बताया कि वह खुले तौर पर खुद को वाइट सुप्रिमेसिस्ट कहता था और अक्सर नाजी विचारों और सशस्त्र संघर्ष की बातें करता था। उसने सहकर्मियों से कहा था कि वह भारतीयों को मारने का इंतजार नहीं कर सकता। 

हमले की योजना और नफरती विचार: पैपोरेकिस खुद को चरमपंथी, नियो-नाजी और सोशियोपैथिक व्हाइट सुप्रिमेसिस्ट (श्वेत वर्चस्ववादी) बताता था। उसने एक आठ पन्नों का घोषणापत्र भी लिखा था, जिसका शीर्षक था- मैंने क्यों लड़ाई की: ए.के.ए (ऑरोरा के हमलावर का घोषणापत्र)।

अमेरिका के इलिनॉय में मंदिर पर हमले की साजिश रचने वाला एलेक्जेंड्रोस पैपोरेकिस। - फोटो : अमर उजाला
कौन था निशाना: पुलिस की शुरुआती जांच के मुताबिक, उसका मुख्य निशाना ऑरोरा में स्थित सबसे बड़ा हिंदू मंदिर था। जांचकर्ताओं को अंदेशा है कि यह संभावित रूप से श्री वेंकटेश्वर स्वामी बालाजी मंदिर था, जहां रविवार को भारी संख्या में श्रद्धालु जुटते हैं।

इस घोषणापत्र में उसने भारतीयों, यहूदियों और अश्वेतों को सबह्यूमन्स (मानवता से परे) बताया था और भारतीय मूल के लोगों का बड़े पैमाने पर कत्लेआम करने की योजना लिखी थी। उसने गूगल स्ट्रीट व्यू और यूट्यूब के जरिए ऑरोरा स्थित मंदिर की रेकी की थी।


मंदिर पर हमले की साजिश नाकाम कैसे हो गई?

जांचकर्ताओं ने पैपोरैकिस को गिरफ्तार करने के बाद खुलासा किया कि उसकी हिंदू मंदिर पर होने वाले सामूहिक हमले की साजिश दो मुख्य वजहों से नाकाम हो गई...

राइफल का जाम होना
11 अक्तूबर को 19 वर्षीय आरोपी ऑरोरा स्थित हिंदू मंदिर में सामूहिक गोलीबारी करने के इरादे से पहुंचा था। हालांकि, जब उसने गोली चलाने की कोशिश की, तो उसकी एआर-स्टाइल राइफल जाम हो गई। बंदूक न चलने की वजह से वह बिना गोलीबारी किए ही तुरंत गाड़ी चलाकर वहां से भाग निकला।

अमेरिका में सिख और हिंदू सबसे ज्यादा बन रहे निशाना। - फोटो : अमर उजाला
सहकर्मी की सतर्कता
घर लौटने के बाद पैपोरैकिस ने इंटरनेट पर बंदूक का जाम ठीक करने का तरीका खोजा। इसके बाद उसने फास्ट-फूड रेस्तरां के अपने एक सहकर्मी को फोन और मैसेज करके बताया कि बंदूक जाम होने की वजह से वह भाग आया है और बंदूक ठीक करके दोबारा हमले की कोशिश करना चाहता है। उसने सहकर्मी के साथ अपने आठ पन्नों के नफरती मैनिफेस्टो और टैक्टिकल गियर की तस्वीरें भी साझा कीं।

पुलिस ने कैसे धर-दबोचा?
बताया गया है कि जैसे ही पैपोरैकिस ने अपनी साजिश का खुलासा किया, वैसे ही खतरे की गंभीरता को समझते ही सहकर्मी ने तुरंत पुलिस को अलर्ट कर दिया। सूचना मिलते ही पेलेंटाइन और माउंट प्रॉस्पेक्ट पुलिस ने अमेरिका की संघीय खुफिया एजेंसी- एफबीआई से संपर्क किया और उसके सहयोग से संयुक्त अभियान चलाया। 11 अक्तूबर की शाम को पैपोरैकिस को उसके घर के बाहर से ही गिरफ्तार कर लिया। 

गिरफ्तारी के दौरान उसके घर से बिना सीरियल नंबर वाली राइफल, 300 से अधिक कारतूस, बॉडी आर्मर और हुकेनक्रॉस प्रतीक बरामद किए गए। उस पर आतंकवादी धमकी देने और गैर-कानूनी हथियार रखने के गंभीर आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं। अदालत ने उसे बिना जमानत के हिरासत में रखने का आदेश दिया है।

ये भी पढ़ें: अमेरिका में हिंदू मंदिर पर हमले की साजिश नाकाम: दूतावास ने पुलिस की तारीफ, प्रवासी भारतीयों को लेकर क्या कहा?

कौन होते हैं श्वेत वर्चस्ववादी, जिनकी विचारधारा से प्रेरित था साजिशकर्ता?

जांच एजेंसियों की तरफ से अब तक की गई तहकीकात में पैपोरैकिस के श्वेत वर्चस्ववादियों से जुड़ाव के संकेत मिले हैं। माना जा रहा है कि वह व्हाइट सुप्रिमेसिस्ट की विचारधारा से प्रेरित था। श्वेत वर्चस्ववादी वे नस्लवादी व्यक्ति या समूह होते हैं जो यह मानते हैं कि श्वेत लोग खास तौर से उत्तरी और पश्चिमी यूरोपीय मूल के लोग अन्य सभी नस्लों और समुदायों से श्रेष्ठ हैं। 

क्या है इस समूह का मूल एजेंडा और तरीका
  • श्वेत वर्चस्ववादी मानते हैं कि समाज और व्यवस्था पर केवल श्वेतों का प्रभुत्व होना चाहिए। अपनी इन मान्यताओं को स्थापित करने के लिए ये समूह अक्सर नफरती अपराधों, हिंसा और घरेलू आतंकवाद का सहारा लेते हैं।
  • पैपोरैकिस को नियो नाजी समूह का समर्थक बताया गया है। नियो नाजी श्वेत वर्चस्ववाद का एक और हिंसक रूप है, जो जर्मनी के नाजी नेता एडॉल्फ हिटलर और उसकी आर्यन नस्लीय श्रेष्ठता के विचारों का समर्थन करता है।
  • अमेरिका के नियो-नाजी देश में रहने वाले यहूदियों, अश्वेत लोगों, मुस्लिमों, भारतीयों/दक्षिण एशियाई लोगों और अन्य अल्पसंख्यक समूहों के प्रति गहरी नफरत रखते हैं। 

अमेरिका के इतिहास में कितना गहरा रहा है श्वेत वर्चस्ववाद?

  • अमेरिका के इतिहास में श्वेत वर्चस्ववाद के अलग-अलग रूप रहे हैं। जैसे कु क्लक्स क्लैन (केकेके), नस्लवादी स्किनहेड्स, हथियारबंद मिलिशिया और क्रिश्चियन आइडेंटिटी (ईसाई पहचान) जैसे कट्टरपंथी आंदोलन।
  • मौजूदा समय में ये समूह श्वेत नस्लीय गौरव और पहचान की रक्षा के नाम पर अपनी कट्टरपंथी विचारधारा को ऑनलाइन और सोशल मीडिया के जरिए समाज में सामान्य बनाने का प्रयास करते हैं।


कैसे अमेरिका में इस समूह की वजह से अन्य धर्मों के खिलाफ नफरत बढ़ी है?

अमेरिका में बीते कुछ वर्षों में हिंदुओं के खिलाफ नफरती अपराधों का आंकड़ा बढ़ा है। एफबीआई के आंकड़ों और अलग-अलग अध्ययनों से यह सामने आया है कि अमेरिका में हाल के वर्षों में श्वेत वर्चस्ववादी समूहों, दक्षिणपंथी विचारधारा और उग्र अप्रवासी विरोधी बयानबाजी की वजह से हिंदुओं, सिखों और अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ नफरत बढ़ी है।


1. मंदिर-पूजास्थलों पर हमले

अमेरिका में मंदिरं पर हालिया समय में हुए हमले। - फोटो : अमर उजाला
  • एफबीआई के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में कुल नफरती अपराधों में लगभग 7% की गिरावट दर्ज की गई है। 
  • लेकिन इसके उलट हिंदुओं के खिलाफ अपराधों में 12% से 28% और सिख विरोधी अपराधों में 24.6% की भारी बढ़ोतरी देखी गई है। 
  • नागरिक अधिकार संगठनों का मानना है कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है, क्योंकि कई मामले रिपोर्ट नहीं हो पाते हैं।
  • अमेरिका में अति-दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं और चरमपंथियों की ओर से एच-1बी वीजा कार्यक्रम और अप्रवासन को लेकर भ्रम फैलाया जाता है।
  • यह झूठा दावा किया जाता है कि भारतीय और दक्षिण एशियाई अमेरिकी नागरिक उनकी नौकरियां छीन रहे हैं और अमेरिका की जनसांख्यिकी बदल रहे हैं। 
  • उदाहरण के लिए सिख और पंजाबी ट्रक ड्राइवरों को सड़क दुर्घटनाओं के बाद बलि का बकरा बनाया गया, जिससे सितंबर 2025 में सिख विरोधी मामलों में तेजी आई।

ये भी पढ़ें: इलिनॉय मंदिर पर हमले की साजिश: विदेश मंत्रालय ने जताई चिंता, कहा- यूएस में बढ़ रही नस्लीय और भारत विरोधी नफरत

कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के एक सर्वेक्षण के अनुसार, 2025 की शुरुआत से अमेरिका में हर 4 में से 1 यानी 25 फीसदी भारतीय-अमेरिकी को नस्लीय या नफरती तानों का सामना करना पड़ा है। रिपोर्ट में अमेरिका को ऑनलाइन/डिजिटल नस्लवाद का केंद्र बताया गया।
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2. सार्वजनिक बयान, नस्लीय टिप्पणियां और उत्पीड़न


हनुमान जी की मूर्ति पर आपत्तिजनक बयान (टेक्सास, सितंबर 2025): डलास/इरविंग (टेक्सास) में स्थापित 90 फीट ऊंची हनुमान जी की मूर्ति पर कुछ रिपब्लिकन नेताओं व कट्टरपंथियों ने आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं। उनकी ओर से भारतीय प्रवासियों के खिलाफ नफरती बयानबाजी की। दिवाली के दौरान नकाबपोश प्रदर्शनकारियों ने प्रवासियों के खिलाफ पोस्टर्स लहराए।

बिंदी लगाने पर नस्लीय ट्रोलिंग (जुलाई 2026): भारतीय मूल की अमेरिकी डॉक्टर करिश्मा रेड्डी को माथे पर बिंदी लगाने और गायों के प्रति हिंदू श्रद्धा को लेकर सोशल मीडिया पर भारी नफरती टिप्पणियों और "भारत वापस जाओ" के तानों का सामना करना पड़ा।

भारतीय-अमेरिकी सांसद को धमकी (2026): फ्लोरिडा के एक स्थानीय चुने हुए प्रतिनिधि द्वारा अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति को अमेरिका से निकालने (डिपोर्ट करने) का आह्वान किया गया। 

सिख ट्रक ड्राइवरों को निशाना बनाना (सितंबर 2025): फ्लोरिडा में हुई एक सड़क दुर्घटना के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानों में सिख और पंजाबी ट्रक ड्राइवरों के खिलाफ नफरती माहौल बनाया गया।
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