ऑस्ट्रेलिया में भारतीय मूल के एक सरकारी कर्मचारी को एक महिला का पीछा करने और उसके तथा उसके परिवार के बारे में जानकारी जुटाने के लिए सरकारी डेटाबेस का इस्तेमाल करने की धमकी देने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कैनबरा की एक अदालत ने उसे जमानत देने से इनकार कर दिया है। ऑस्ट्रेलियन ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (एबीसी) न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, 31 वर्षीय सुयश सिन्हा को मंगलवार को उनके घर पर पुलिस की छापेमारी के बाद गिरफ्तार किया गया।
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सिन्हा बुधवार को ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेरिटरी मजिस्ट्रेट्स कोर्ट में पेश हुए। रिपोर्ट के मुताबिक, विशेष मजिस्ट्रेट लुसिंडा विल्सन ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि शिकायतकर्ता की सुरक्षा और उसके मानसिक एवं शारीरिक कल्याण को लेकर जोखिम "बहुत अधिक" है। रीजन कैनबरा समाचार पोर्टल के अनुसार, सिन्हा पिछले सप्ताह ही ऑस्ट्रेलियाई नागरिक बने थे। उन पर एक महिला का पीछा करने का आरोप है। बताया गया है कि जनवरी में उनकी मुलाकात महिला से एक डेटिंग ऐप के जरिये हुई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, महिला द्वारा उनके प्रस्तावों को ठुकराए जाने के बावजूद सिन्हा उसे लगातार संदेश भेजते रहे। अगस्त में उन्होंने कैनबरा के कोल्स सुपरमार्केट में खरीदारी कर रही महिला के कपड़ों का जिक्र करते हुए कहा कि वह भी वहां मौजूद थे। इसके बाद महिला ने सिन्हा से मिलने के लिए एक पब में जाने पर सहमति जताई, ताकि वह उनसे संपर्क करना बंद करने के लिए कह सके। रिपोर्ट के अनुसार, मुलाकात के दौरान सिन्हा ने बताया कि वह ऑस्ट्रेलियन कैपिटल टेरिटरी (एसीटी) सरकार के वित्त विभाग में काम करते हैं। उन्होंने महिला के एक भाई-बहन का नाम भी लिया और दावा किया कि "सरकारी प्रणालियों में किसी के बारे में भी जानकारी निकाली जा सकती है।"
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समाचार पोर्टल के मुताबिक, इसके बाद महिला को सोशल मीडिया के अलग-अलग खातों से कई फ्रेंड रिक्वेस्ट मिलीं। इन खातों के यूजरनेम डराने वाले थे। इसके बाद महिला ने सितंबर में पुलिस से संपर्क किया। एबीसी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी वकीलों ने अदालत को बताया कि महिला बेहद डरी हुई है और पोस्ट-ट्रॉमैटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर (पीटीएसडी) के लक्षणों का सामना कर रही है। अभियोजन पक्ष ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि सिन्हा का महिला के प्रति जुनून जैसा व्यवहार है और वह उसकी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। साथ ही, वह सबूतों और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश भी कर सकते हैं।
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सीजेपी को विदेश से मिल रही आर्थिक मदद : मैरी मिलबेन
अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन ने बुधवार को आरोप लगाया कि सीजेपी संस्थापक अभिजीत दीपके और उनकी पार्टी को अमेरिका के कुछ दानदाताओं से आर्थिक मदद मिल रही है। उन्होंने भारतीय युवाओं से पार्टी की विघटनकारी सोच के खिलाफ खड़े होने और शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने की अपील की। मिलबेन ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर कहा कि यह चुप रहने का समय नहीं है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन करते हुए कहा कि वह देश की विघटनकारी ताकतों के सामने नहीं झुकेंगे।
इस्राइल से राजनयिक संबंध बहाल करने के बाद कोलंबिया ने यरुशलम में खोला दूतावास
कोलंबिया ने बुधवार को यरुशलम में अपना दूतावास खोला। गाजा युद्ध को लेकर पूर्ववर्ती सरकार द्वारा इस्राइल से राजनयिक संबंध तोड़े जाने के बाद अब रूढ़िवादी राष्ट्रपति अबेलार्डो डी ला एस्प्रिएला की सरकार ने इस्राइल के साथ संबंध बहाल कर लिए हैं। दूतावास का खुलना दोनों देशों के रिश्तों में बड़े बदलाव का संकेत है। कोलंबिया के विदेश मंत्रालय ने दूतावास खुलने को कूटनीतिक उपलब्धि बताया, जबकि इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने इसे इस्राइल-कोलंबिया संबंधों और राजधानी यरुशलम के लिए जश्न का दिन करार दिया।
दोनों देशों ने 1957 में राजनयिक संबंध स्थापित किए थे और उनके बीच सुरक्षा के क्षेत्र में विशेष रूप से करीबी सहयोग रहा है। कोलंबिया अपने सैन्य बेड़े में इस्राइल निर्मित राइफलों और लड़ाकू-बमवर्षक विमानों का इस्तेमाल करता है। हालांकि, वर्ष 2024 में तत्कालीन राष्ट्रपति गुस्तावो पेट्रो ने गाजा पट्टी में इस्राइल के सैन्य अभियानों को लेकर उस पर नरसंहार का आरोप लगाते हुए संबंध तोड़ दिए थे। उन्होंने इस्राइल की कार्रवाई की तुलना नाजी यातना शिविरों से की थी। इजरायल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कोलंबिया के फैसले की निंदा की थी।
संबंध तोड़ने के बाद पेट्रो ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक के रामल्ला में कोलंबिया का दूतावास खोलने की योजना की घोषणा की थी, लेकिन यह राजनयिक मिशन कभी शुरू नहीं हो सका। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थन से सत्ता में आए डी ला एस्प्रिएला की सरकार के लिए इस्राइल के साथ संबंध बहाल करना प्राथमिकता बन गया।
व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी जकारिया ने ट्रंप को कहा हसबैंड, अब हो रही आलोचना
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई व्हाइट हाउस प्रेस सेक्रेटरी केटी जकारिया पहली ही प्रेस ब्रीफिंग के बाद आलोचनाओं में घिर गई हैं। एक सवाल का जवाब देते समय वह इतनी हड़बड़ा गईं कि उन्होंने 'हसबैंड' (पति) और 'प्रेसिडेंट' (राष्ट्रपति) शब्दों को आपस में मिक्स कर दिया। केटी जकारिया ने अपनी पहली ब्रीफिंग को महज 14 मिनट में ही खत्म कर दिया। इस छोटी सी ब्रीफिंग में उन्होंने सिर्फ एक बड़ी खबर साझा की। उन्होंने बताया कि व्हाइट हाउस ने ग्रीस में अमेरिकी राजदूत किम्बर्ली गुइलफॉयल से इस्तीफा देने को कहा था, जिसके तुरंत बाद उन्होंने अपना पद छोड़ दिया है। उन्होंने केवल तीन पत्रकारों को सवाल पूछने का मौका दिया। जिन तीन पत्रकारों को सवाल पूछने के लिए चुना, वे सभी डोनाल्ड ट्रंप और रिपब्लिकन पार्टी के समर्थक माने जाने वाले मीडिया आउटलेट्स फॉक्स न्यूज, ब्रिटबार्ट और डेली मेल से थे।
तुर्किये में मिला 4,700 साल पुराने जहाज का मलबा
पुरातत्वविदों ने तुर्की के दक्षिणी प्रांत अंटाल्या में मौजूद केकोवा द्वीप के तट के पास दुनिया के सबसे पुराने जहाज के मलबे की खोज की है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह व्यापारिक जहाज करीब 4,700 साल पुराना है। यानी यह उस दौर का है जब मिस्र में गीजा के महान पिरामिड का निर्माण हो रहा था। इस खोज ने ग्रीस के डोकोस द्वीप के पास मिले 4,200 साल पुराने जहाज के रिकॉर्ड को तोड़कर दुनिया के सबसे पुराने मलबे का नया खिताब अपने नाम कर लिया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह लगभग 10 मीटर (32 फीट) लंबा एक छोटा व्यापारिक जहाज था। यह भूमध्य सागरके एक प्रमुख व्यापारिक मार्ग से गुजरते समय हादसे का शिकार हो गया था। हजारों साल बीत जाने के कारण जहाज की लकड़ी तो पूरी तरह सड़कर खत्म हो चुकी है, लेकिन समुद्र की सतह से 30 मीटर नीचे उसका सामान पूरी तरह सुरक्षित मिला है। गोताखोरों ने वहां से तीन बड़े पत्थरों के लंगर और 30 से अधिक मिट्टी के बड़े जार बरामद किए हैं।
यूक्रेनी सेना ने रूसी तेल रिफाइनरियों पर फिर किए हमले
रूस और यूक्रेन के अधिकारियों ने बताया कि रूस की ओर से संक्षिप्त युद्धविराम के प्रस्ताव को ठुकराए जाने के बाद यूक्रेन ने रूसी तेल रिफाइनरियों पर फिर से हमले शुरू कर दिए हैं। दोनों देशों के बीच जारी संघर्ष के बीच इन हमलों से रूस के ऊर्जा बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की यूक्रेन की रणनीति एक बार फिर सामने आई है।
हिंद महासागर के द्वीपीय देश मॉरीशस में पुलिस की गोली से एक महिला के घायल होने के बाद विरोध-प्रदर्शन तेज हो गए। इसके मद्देनजर सरकार ने हालात संभालने के लिए रात में कर्फ्यू लगाने का फैसला किया है। मॉरीशस अपने खूबसूरत पर्यटन स्थलों और अफ्रीका के सबसे स्थिर लोकतंत्रों में से एक के रूप में जाना जाता है।
शुक्रवार को एक पुलिस अधिकारी ने एक महिला को गोली मारकर घायल कर दिया था, जिसके बाद कई दिनों से जारी विरोध-प्रदर्शन और तेज हो गए। स्थिति से निपटने के लिए पुलिस की अर्धसैनिक इकाई स्पेशल मोबाइल फोर्स को तैनात किया गया। कर्फ्यू के तहत राजधानी पोर्ट लुइस और कई अन्य कस्बों में लोगों को मंगलवार रात साढ़े आठ बजे से बुधवार सुबह छह बजे तक घरों के अंदर रहने का निर्देश दिया गया था।
प्रदर्शन पिछले सप्ताह पानी की किल्लत और महंगाई के विरोध में शुरू हुए थे। हालांकि, पोर्ट लुइस के दक्षिण-पश्चिम में स्थित ब्यू बासिन-रोज हिल में गोलीबारी की घटना के बाद हिंसा बढ़ गई। मॉरीशस की अर्थव्यवस्था में वित्तीय सेवाओं और पर्यटन की अहम भूमिका है। अपने आलीशान समुद्र तटीय रिसॉर्ट के लिए मशहूर इस द्वीपीय देश में इससे पहले 1999 में इसी तरह की अशांति देखने को मिली थी। उस समय पुलिस हिरासत में एक लोकप्रिय संगीतकार की मौत के बाद कई दिनों तक दंगे हुए थे।
गोली लगने से घायल महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस ने बताया कि इस मामले में एक अधिकारी को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीन अन्य को निलंबित कर दिया गया है। गोलीबारी की जांच जारी है।