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Crime: अमेरिका में भारतीय को 20 साल जेल या ₹8.4 करोड़ जुर्माने की सजा संभव; रूस में निर्यात की साजिश के आरोप

Sat, 23 Nov 2024 02:40 AM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

अमेरिकी न्याय विभाग ने भारतीय नागरिक कौशिक पर रूस में अंतिम उपयोगकर्ताओं को नियंत्रित अमेरिकी विमानन घटकों का निर्यात करने की कथित साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। अगर ये आरोप साबित होते हैं तो कौशिक को अधिकतम 20 साल की जेल और 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक जुर्माना हो सकता है।
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न्याय विभाग - सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI / Reuters
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विस्तार
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अमेरिका से एक बड़ी खबर सामने आ रही है जहां अमेरिका के न्याय विभाग ने भारतीय नागरिक संजय कौशिक पर रूस में अंतिम उपयोगकर्ताओं को नियंत्रित अमेरिकी विमानन घटकों का निर्यात करने की कथित साजिश रचने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में न्याय विभाग ने शुक्रवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि कौशिक को 17 अक्टूबर को मियामी में गिरफ्तार किया गया था और गुरुवार को उनके खिलाफ आरोप तय किए गए।
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20 साल तक की हो सकती है सजा
जानकारी के अनुसार अगर कौशिक दोषी पाए गए तो उन्हें प्रत्येक मामले के लिए अधिकतम 20 साल की जेल और 1 मिलियन अमेरिकी डॉलर तक जुर्माना हो सकता है। वहीं बात अगर अदालत की दस्तावेजों की करें तो, मार्च 2023 में, जब रूस ने यूक्रेन पर आक्रमण किया, तब कौशिक ने रूस में स्थित संस्थाओं के लिए अमेरिका से अवैध रूप से एयरोस्पेस सामान और प्रौद्योगिकी प्राप्त करने के लिए एक साजिश रची थी। 

बता दें कि भारतीय नागरिक के कौशिक पर आरोप है कि उन्होंने निर्यात नियंत्रण कानूनों का उल्लंघन करते हुए रूस में अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए नागरिक और सैन्य दोनों प्रकार के विमानन घटकों को अवैध रूप से निर्यात करने की साजिश रची। इसके अलावा उन्हें भारत के माध्यम से ओरेगन से रूस में एक नेविगेशन और उड़ान नियंत्रण प्रणाली के अवैध निर्यात का प्रयास करने और निर्यात के संबंध में झूठे बयान देने का भी आरोप है।
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एक नजर प्रेस विज्ञप्ति पर
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार यह सामान रूस में अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए भेजे जाने के बजाय कौशिक और उनकी भारतीय कंपनी को आपूर्ति करने का झूठा दावा किया गया था। इस मामले में संघीय अभियोजकों ने बताया कि एक मामले में कौशिक और उनके सह-साजिशकर्ताओं ने एक ओरेगन-आधारित आपूर्तिकर्ता से एक एटीट्यूड हेडिंग रेफरेंस सिस्टम (AHRS) खरीदा। AHRS विमान के नेविगेशन और उड़ान नियंत्रण डेटा प्रदान करने वाला उपकरण होता है। 

भारत का अपनाया था रास्ता
बता दें कि कौशिक और उनके सह-साजिशकर्ताओं ने AHRS को रूस में भेजने के लिए भारत का रास्ता अपनाया था, लेकिन इससे पहले ही इसे संयुक्त राज्य अमेरिका से निर्यात करने से रोक दिया गया। AHRS जैसे घटकों को रूस जैसे देशों में निर्यात करने के लिए वाणिज्य विभाग से लाइसेंस की आवश्यकता होती है।
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