ट्रंप प्रशासन के पहले कार्यकाल में भी इसकी कोशिश हुई थी, लेकिन बीते एक दशक से यह नदी समस्या बनी हुई है। मेक्सिको की पर्यावरण मंत्री एलिसिया बारसेना और अमेरिका की पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी के प्रमुख ली जेल्डिन ने गुरुवार को तिजुआना नदी को साफ करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए।
अमेरिका और मेक्सिको के बीच तिजुआना नदी की सफाई को लेकर एक समझौता हुआ है। इस समझौते के तहत वाटर ट्रीटमेंट प्लांट्स का विस्तार किया जाएगा और दोनों देश मिलकर तकनीक और वित्तीय मामले में सहयोग करेंगे। तिजुआना नदी में गंदगी और प्रदूषण एक बड़ी समस्या बना हुआ है। अमेरिका और मेक्सिको की सरकारें कई वर्षों से दोनों देशों की सीमा पर बहने वाली इस नदी को साफ करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिली है। तिजुआना नदी का पानी कैलिफोर्निया में समुद्र में आकर मिलता है, जिससे कैलिफोर्निया के समुद्र तट गंदे हैं और बीते चार वर्षों से प्रदूषण की वजह से इन तटों को बंद करना पड़ा है।
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बीते एक दशक से समस्या बनी हुई है तिजुआना नदी
तिजुआना नदी में अरबों गैलन सीवेज और उद्योगों से निकलने वाला जहरीला कचरा गिरता है। दक्षिणी कैलिफोर्निया में इस नदी के प्रदूषण के चलते अमेरिकी नेवी सील्स की ट्रेनिंग में समस्या हो रही है। क्योंकि नेवी सील्स यहां ट्रेनिंग करके बीमार हो रहे हैं। तिजुआना नदी को साफ करने के लिए अभी तक अरबों डॉलर खर्च किए जा चुके हैं। ट्रंप प्रशासन के पहले कार्यकाल में भी इसकी कोशिश हुई थी, लेकिन बीते एक दशक से यह नदी समस्या बनी हुई है। मेक्सिको की पर्यावरण मंत्री एलिसिया बारसेना और अमेरिका की पर्यावरण सुरक्षा एजेंसी के प्रमुख ली जेल्डिन ने गुरुवार को तिजुआना नदी को साफ करने के समझौते पर हस्ताक्षर किए।
आम लोग हो रहे बीमार
समझौते के तहत मेक्सिको की सरकार नदी की सफाई के लिए बुनियादी ढांचे के विकास में 9 करोड़ डॉलर के अपने आवंटन को पूरा करेगी। साल 2020 से अब तक इस नदी को साफ करने के लिए दोनों देशों की सरकारें 65 करोड़ डॉलर से ज्यादा रकम खर्च कर चुके हैं। साल 2027 तक नदी को साफ करने का लक्ष्य रखा गया है। 195 किलोमीटर लंबी तिजुआना नदी मेक्सिको के तट से अमेरिका के दक्षिणी केलिफोर्निया को पार करते हुए बहती है और प्रशांत महासागर में गिरती है। इस नदी में प्रदूषण के चलते समुद्र में तैरने वाले तैराक, सर्फर और लाइफगार्ड बीमार हो रहे हैं। वहीं पानी में नहीं जाने वाले स्कूली बच्चे, सीमा सुरक्षा बल के जवान और अन्य लोग भी बीमार हो रहे हैं, क्योंकि प्रदूषण झाग बनकर वाष्पित हो जाता है और फिर हवा के जरिए लोगों के शरीर में पहुंच रहा है, जिससे पानी में न जाने वाले लोग भी बीमार हो रहे हैं।