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अब और गहराएगा चीन-अमेरिका विवाद, उइगर मुस्लिमों के उत्पीड़न के खिलाफ अमेरिकी संसद में बिल पास

Thu, 28 May 2020 06:21 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड डेस्क, वाशिंगटन
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपती शी जिनपिंग - फोटो : फाइल
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कोरोना वायरस संकट के बीच संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएसए) कांग्रेस ने उइगर मुस्लिम को हिरासत में लेने से चीनी अधिकारियों को रोकने के लिए लाए गए विधेयक को मंजूरी दे दी है। अब इस विधेयक को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मंजूरी के लिए व्हाइट हाउस भेजा गया है।

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दरअसल, अमेरिकी कांग्रेस ने बुधवार को चीनी अधिकारियों द्वारा बड़े पैमाने पर किए जा रहे उइगर मुस्लिमों के खिलाफ अत्याचारों को लेकर प्रतिबंधों को अधिकृत करने के लिए एक विधेयक को मंजूरी दी है। माना जा रहा है कि इससे अमेरिका और चीन के रिश्तों में तनाव बढ़ने की संभावना है। 

हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव ने उइगर मानवाधिकार अधिनियम के खिलाफ केवल एक वोट दिया, इसके अलावा सभी वोट इसके पक्ष में पड़े। इसके कुछ घंटों बाद ही विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने हांगकांग मुद्दे पर भी चीन को घेरने के लिए एक कदम उठाया। 
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मानवाधिकार समूहों का कहना है कि कम से कम 10 लाख उइगर और अन्य तुर्की मूल के मुस्लिमों को चीन के उत्तर-पश्चिम में स्थित जीनजियांग प्रांत के कैंपों में रखा जा रहा है। इन कैंपों में उनके साथ मारपीट और तरह-तरह के अत्याचार किए जाते है। साथ ही उनकी ब्रेनवाशिंग भी की जाती है। 

अमेरिका के प्रतिनिधि सभा की स्पीकर नैन्सी पलोसी ने कहा कि यदि अमेरिका व्यापार हित को देखते हुए चीन में हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों पर कुछ नहीं कहेगा तो हम दुनिया में किसी भी स्थान पर नैतिकता के तहत कुछ कहने का अधिकार खो देंगे। 

रिपब्लिकन ऑन द हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी के मुख्य नेता माइकल मकौल ने चीन पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह राज्य-प्रायोजित सांस्कृतिक नरसंहार है। मकौल ने कहा कि बीजिंग ने एक पूरे संस्कृति को मिटाने का प्रयास किया है, वो भी केवल इसलिए क्योंकि यह चीन की कम्युनिस्ट पार्टी के अनुरूप नहीं है। 

उन्होंने कहा कि हम इस मुद्दे पर बेपरवाही के साथ नहीं बैठ सकते और इसको जारी रहते हुए नहीं देख सकते हैं। हमारी चुप्पी जटिल होगी।  

कौन हैं उइगर लोग?

इस्लाम को मानने वाले उइगर समुदाय के लोग चीन के सबसे बड़े और पश्चिमी क्षेत्र शिंजियांग प्रांत में रहते हैं। उइगर पूर्वी और मध्य एशिया में बसने वाले तुर्की जाति की एक जनजाति है। 

इनमें से लगभग 70 प्रतिशत इस क्षेत्र के दक्षिण-पश्चिम में स्थित तारिम घाटी में रहते हैं। उइगर लोग उइगर भाषा बोलते हैं जो तुर्की भाषा से आने वाली एक बोली है।  उइगर एक अल्पसंख्यक तुर्क जातीय समूह है जो मध्य और पूर्वी एशिया के सामान्य क्षेत्र से सांस्कृतिक रूप से जुड़ा हुए हैं। चीन में  उइगरों की आबादी एक करोड़ से अधिक है। 

उइगरों को केवल एक क्षेत्र के मूल निवासियों के रूप में मान्यता दी जाती है, जोकि चीन का शिंजियांग क्षेत्र है। उन्हें चीन के 55 आधिकारिक तौर पर मान्यता प्राप्त जातीय अल्पसंख्यकों में से एक माना जाता है। उइगरों को चीन द्वारा केवल एक बहुसांस्कृतिक राष्ट्र के भीतर एक क्षेत्रीय अल्पसंख्यक के रूप में मान्यता प्राप्त है और चीन उनके स्वदेशी समूह होने के विचार को खारिज करता रहा है।

उइगरों ने पारंपरिक रूप से तकलीम रेगिस्तान में बिखरे हुए नखलिस्तान में निवास किया है, जिसमें तारिम बेसिन शामिल है, एक ऐसा क्षेत्र जिसपर ऐतिहासिक रूप से चीन, मंगोलों, तिब्बतियों और तुर्किक दुनिया सहित कई सभ्यताओं द्वारा शासन किया गया। 

उइगर 10वीं शताब्दी में इस्लाम के करीब आना शुरू हुए और 16वीं शताब्दी तक बड़े पैमाने पर मुस्लिम बन गए, और जिसके बाद से ही इस्लाम ने  उइगर संस्कृति और पहचान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

'विश्व उइगर कांग्रेस' का अनुमान है कि चीन के बाहर उइगरों की आबादी लगभग 10 लाख से 15 लाख के बीच है।  उइगरों के महत्वपूर्ण प्रवासी समुदाय मध्य एशियाई देशों कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और उज्बेकिस्तान और तुर्की में मौजूद हैं। वहीं, उइगरों के कनाडा, जर्मनी, बेल्जियम, नॉर्वे, स्वीडन, रूस, सऊदी अरब, अफगानिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका और नीदरलैंड में छोटे समुदाय रहते हैं।
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चीन सरकार के साथ उइगरों के तनाव की वजह क्या है?

शिनजियांग प्रांत में रहने वाले उइगर मुस्लिम 'ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट' चलाते रहे हैं जिसका मकसद चीन से अलग होना है। दरअसल, 1949 में पूर्वी तुर्किस्तान, जो अब शिनजियांग है, को एक अलग राष्ट्र के तौर पर कुछ समय के लिए पहचान मिली थी, लेकिन उसी साल यह चीन का हिस्सा बन गया। 

जिसके बाद 1990 में सोवियत संघ के पतन के बाद इस क्षेत्र की आजादी के लिए यहां के लोगों ने काफी संघर्ष किया। उस समय इन लोगों के आंदोलन को मध्य एशिया में कई मुस्लिम देशों का समर्थन भी मिला लेकिन, चीनी सरकार के कड़े रुख के आगे किसी की एक न चली।

बीते कुछ समय के दौरान इस क्षेत्र में हान चीनियों की संख्या में जबर्दस्त बढ़ोत्तरी हुई है। उइगरों का कहना है कि चीन की वामपंथी सरकार हान चीनियों को शिंजियांग में इसीलिए भेज रही है कि उइगरों के आंदोलन 'ईस्ट तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट' को दबाया जा सके। चीनी सरकार की भेदभावपूर्ण नीतियां भी कुछ ऐसा ही दर्शाती हैं। 

शिंजियांग प्रांत में रहने वाले हान चीनियों को मजबूत करने के लिए चीन सरकार हर संभव मदद दे रही है यहां तक कि इस क्षेत्र की नौकरियों में उन्हें ऊंचे पदों पर बिठाया जाता है और उइगरों को दोयम दर्जे की नौकरियां दी जाती हैं। 

कुछ जानकार चीनियों को नौकरियों में ऊंचे पदों पर बिठाने का एक कारण यह भी मानते हैं कि सामरिक दृष्टि से शिंजियांग प्रांत चीन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और ऐसे में चीनी सरकार ऊंचे पदों पर विद्रोही रुख वाले उईगुरों को बिठाकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहती।
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