इस संकट से पहले वैश्विक युवा रोजगार की दर साल 2019 में 13.6 फीसदी थी। जबकि करीब 26 करोड़ 70 लाख युवाओं के पास न तो कोई रोजगार था और न ही उनके पास कोई शिक्षा या प्रशिक्षण था। आईएलओ का अध्ययन कहता है कि कोरोना संकट ने 2019 के अंतिम तिमाही की तुलना में 2020 की दूसरी तिमाही में 10.7 फीसदी कार्य समय कम किया है, जो कि 30 करोड़ 50 लाख नौकरियों के बराबर है।
लेकिन, एक ओर जहां इस संकट से सभी आयु वर्ग के लोग प्रभावित हो रहे हैं, आईएलओ ने विभिन्न देशों के ताजा डाटा के बारे में बताया कि फरवरी के बाद युवाओं में बेरोजगारी बड़े स्तर पर बढ़ी है और युवा महिलाएं इससे विशेष तौर पर प्रभावित हुई हैं। उदाहरण के तौर पर कनाडा में फरवरी से अप्रैल तक कुल बेरोजगारी दर छह फीसदी बढ़ी है। लेकिन, युवा पुरुषों के लिए यह दर 27.1 तो युवा महिलाओं के लिए 28.4 फीसदी रही।
कुछ ऐसी ही स्थिति अमेरिका और कुछ अन्य देशों की है। हालांकि, आईएलओ ने कहा कि अभी उसके पास यह तय करने के लिए पर्याप्त डाटा नहीं है कि कोरोना की संकट की शुरुआत से अब तक युवा बोरोजगारी की दर क्या रही है।
लेकिन, 29 साल और इससे कम आयु के लोगों पर किए गए एक सर्वे में सामने आया है कि पूरी दुनिया में 17 फीसदी ऐसे लोगों के पास अब काम नहीं है लेकिन संकट आने के समय उनके पास काम था। अध्ययन में यह भी सामने आया है कि जो लोग संकट के दौरान भी काम करते रहे हैं उनके काम के घंटों में भी 23 फीसदी तक कटौती हुई है।