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अमेरिका: गर्भपात पर छिड़ी बहस में जताए जा रहे हैं महिलाओं को घर के दायरे में समेटने के अंदेशे!

Mon, 09 May 2022 03:13 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

विश्लेषक फिलिपोविच ने अपनी एक रिपोर्ट में भविष्यवाणी की है कि गर्भपात का अधिकार खत्म करने के बाद कंजरवेटिव तबके सिर्फ वहीं नहीं थमेंगे। उसके बाद वे गर्भनिरोधकों और समलैंगिक विवाहों के खिलाफ लड़ाई छेड़ देंगे। उन्होंने लिखा- ‘मुद्दा कभी भी सिर्फ गर्भपात का अधिकार छीनना नहीं था। बल्कि मुद्दा वैसी संस्कृति थोपने का है, जो अमेरिकी दक्षिणपंथी चाहते हैं...
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अमेरिकी गर्भपात कानून - फोटो : Agency
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विस्तार
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गर्भपात के अधिकार के मामले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के संभावित फैसले की खबर लीक होने के बाद देश में मची हलचल थमने का नाम नहीं ले रही है। देश के प्रोग्रेसिव खेमों में ये अंदेशा गहरा गया है कि इस फैसले के बाद देश में महिलाओं, समलैंगिकों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और आम तौर पर अल्पसंख्यकों के बुनियादी अधिकारों पर रूढ़िवादी समूहों के हमले और तेज हो जाएंगे।

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टीवी चैनल सीएनएन की वेबसाइट पर एक रिपोर्ट में विश्लेषक जिल फिलिपोविच की एक टिप्पणी का हवाला दिया गया है, जिसके मुताबिक संभावित फैसले के गहरे और दूरगामी नतीजे होंगे। फिलिपोविच ने लिखा है- ‘इससे अमेरिकी महिलाओं का भविष्य संदिग्ध हो जाएगा। इस फैसले का संदेश यह होगा कि महिलाएं इस देश में समान नागरिक के रूप में जिंदगी नहीं जिएंगी। यह फैसला महिलाओं से यह निर्णय लेने का बुनियादी हक छीन लेगा कि उनके शरीर के अंदर जो होता है, उसके बारे में तय करने का हक उन्हें ही है।’

गर्भनिरोधक और समलैंगिक विवाह भी आएंगे चपेट में

फिलिपोविच ने भविष्यवाणी की है कि गर्भपात का अधिकार खत्म करने के बाद कंजरवेटिव तबके सिर्फ वहीं नहीं थमेंगे। उसके बाद वे गर्भनिरोधकों और समलैंगिक विवाहों के खिलाफ लड़ाई छेड़ देंगे। उन्होंने लिखा- ‘मुद्दा कभी भी सिर्फ गर्भपात का अधिकार छीनना नहीं था। बल्कि मुद्दा वैसी संस्कृति थोपने का है, जो अमेरिकी दक्षिणपंथी चाहते हैं। वे चाहते हैं कि सार्वजनिक जीवन यानी आर्थिक एवं राजनीतिक क्षेत्र- पर पुरुषों का कब्जा रहे, महिलाएं पुरुषों पर निर्भर रहें और वे घर पर रह कर बच्चों को पालें।’

विश्लेषक एलिस स्टीवर्ट ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट का ऐसे फैसले को वे कंजरवेटिव समूह अपनी जीत मानेंगे, जो डोनाल्ड ट्रंप को वोट देते हैं। एक अन्य विश्लेषक फ्रीडा घिटिस ने ध्यान दिलाया है कि लैटिन अमेरिकी देशों और आयरलैंड जैसे कंजरवेटिव देशों में अब गर्भपात के अधिकार के पक्ष में माहौल बना है। आयरलैंड में 2018 के जनमत संग्रह में बहुमत ने यह अधिकार देने के पक्ष में राय जताई। लेकिन अमेरिका ने उलटी दिशा पकड़ ली है। घिटिस ने उल्लेख किया है कि अमेरिका में भी जनमत सर्वेक्षणों में ज्यादातर लोगों की राय गर्भपात के अधिकार के पक्ष में सामने आई है। लेकिन देश में अल्पमत समूह सीनेट और सुप्रीम कोर्ट के जरिए अपनी सोच सब पर थोपने में सक्षम बने हुए हैं।

अमेरिका में मातृ मृत्यु दर सबसे ज्यादा

विश्लेषक निकोल हेमर ने एक टिप्पणी में ध्यान दिलाया है कि सभी औद्योगिक देशों के बीच अमेरिका में मातृ मृत्यु दर सबसे ज्यादा है। कोविड-19 महामारी के पहले भी ये दर बढ़ रही थी। खास कर ब्लैक महिलाओं में ये दर काफी ऊंची रही है। ऐसे में जब कोर्ट गर्भपात का अधिकार खत्म कर देगा और गर्भपात की सेवाएं महिलाओं की पहुंच से दूर हो जाएंगी, तो माताओं गर्भावस्था संबंधी समस्याओं के कारण की मृत्यु की घटनाएं और बढ़ जाएंगी।

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इस बीच प्रोग्रेसिव संगठनों ने सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी पर गर्भपात का अधिकार सुरक्षित करने के लिए कानून पारित करने के लिए दबाव बढ़ा दिया है। देश भर में हो रहे कार्यक्रमों में मांग की जा रही है कि राष्ट्रपति बाइडन सीनेट में फिलिबस्टर नियम को खत्म करें, ताकि साधारण बहुमत से ऐसा कानून पारित हो सके।

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