पिछले हफ्ते जी-7 देशों ने चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना के जवाब में जिस अपने अंतरराष्ट्रीय इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का एलान किया था, उस पर वे देश 40 खरब डॉलर से भी ज्यादा खर्च करेंगे। अमेरिका सरकार के एक अधिकारी ने ये जानकारी दी है। बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड (बी3डब्लू) नाम से बनने वाली उस परियोजना के तहत विकासशील देशों में बुनियादी ढांचे को विकसित किया जाएगा।
अमेरिका के अधिकारियों ने दावा किया है कि इस परियोजना के मकसद सिर्फ चीन का मुकाबला करना नहीं है। बल्कि इसके जरिए जी-7 देश दुनिया के सामने एक सकारात्मक विकल्प पेश करेंगे। उससे वे दिखा पाएंगे कि उन देशों के उसूल, प्रतिमान और कारोबार करने के तौर-तरीके क्या हैं। पिछले हफ्ते ब्रिटेन में जब इस परियोजना का एलान हुआ था, तब जी-7 देशों ने दावा किया था कि यह एक पारदर्शी परियोजना होगी, जिसे विकासशील देश कर्ज जाल में फंसने के भय से मुक्त रहते हुए अपना सकेंगे।
इस बीच शुक्रवार को ये खबर आई कि इस वर्ष के पहले पांच महीनों में चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) परियोजना पर खर्च में 13.8 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी। उसने इस दौरान इस पर 7.43 अरब डॉलर खर्च किए। इस तरह साल-दर-साल बीआरआई पर खर्च बढ़ाने का क्रम उनसे जारी रखा है। बीजिंग में जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उसकी कुल अर्थव्यवस्था में 2021 के पहले पांच महीनों में निवेश बढ़ा। उसी क्रम में बीआरआई पर भी खर्च में बढ़ोतरी हुई।
इन आंकड़ों के मुताबिक चीन के मैनुफैक्चरिंग (कारखाना) सेक्टर में साल के पहले पांच महीनों में 7.2 अरब डॉलर का निवेश हुआ, जो पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 11.8 फीसदी ज्यादा है। इसी तरह स्थानीय उद्यमों में निवेश 32.75 अरब डॉलर तक पहुंच गया। चीन ने अतिरिक्त घरेलू उत्पाद में वृद्धि के अनुपात में बीआरआई में निवेश बढ़ाने का पैटर्न बना रखा है। इसलिए घरेलू अर्थव्यवस्था में वृद्धि के साथ बीआरआई में भी निवेश बढ़ जाता है।
पश्चिमी देशों ने अब चीन के इसी मॉडल का जवाब देने की योजना बनाई है। अब अमेरिका इसे अपनी सकारात्मक पहल बताने की कोशिश कर रहा है, लेकिन पिछले हफ्ते बिल्ड बैक बेटर वर्ल्ड परियोजना के एलान के समय जर्मनी की चांसलर अंगेला मैर्केल ने साफ कहा था कि जी-7 की परियोजना अफ्रीका में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगी। उन्होंने कहा था- ‘हम यह मान कर चुप नहीं बैठ सकते कि ये काम चीन करेगा।’ जी-7 की राय है कि बहुत से विकासशील देश इन्फ्रास्ट्रक्चर के मामले में पिछड़े हुए हैं। वहां जी-7 की परियोजना का दिल खोल कर स्वागत किया जाएगा।
चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट की शुरुआत आठ साल पहले हुई थी। बोलचाल की भाषा में इसे 21वीं सदी का सिल्क रोड प्रोजेक्ट भी कहा जाता है। इसके तहत एशिया से यूरोप होते हुए अफ्रीका तक इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित किए जा रहे हैं। इसके तहत चीन 167 देशों के साथ 200 से ज्यादा करार पत्रों पर दस्तखत कर चुका है। इन देशों के साथ चीन का कुल कारोबार 9.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है। चीनी कंपनियां बीआरआई से जुड़ी परियोजनाओं में 136 अरब डॉलर का निवेश कर चुकी हैं। पिछले महीने चीन में पांचवीं सिल्क रोड अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी लगाई गई थी। उस दौरान 24.5 अरब डॉलर की परियोजनाओं के लिए करार पत्रों पर दस्तखत हुए।
इन आंकड़ों से साफ है कि चीन की परियोजना बहुत आगे बढ़ चुकी है। जबकि जी-7 ने अभी सिर्फ पहल की है। उसकी फंडिंग और निर्माण संबंधी ब्योरे अभी दुनिया के सामने नहीं हैं।