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UN: हर 10 मिनट में एक महिला की मौत, महिलाओं को जान से मारने की भयावह वास्तविकता

Tue, 26 Nov 2024 12:30 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र यूएन हिंदी समाचार

सार

महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस की 25वीं वर्षगांठ पर जारी इस रिपोर्ट में, ‘फेमिसाइड’ यानी लैंगिक कारणों से महिलाओं व लड़कियों को जान से मार दिए जाने के वैश्विक संकट पर प्रकाश डालते हुए, तत्काल कार्रवाई का आह्वान किया गया है।
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मैक्सिको में एक मां, हत्या का शिकार हुई अपनी बेटी की तस्वीर, अपने लॉकेट में लगाकर रखती हैं। - फोटो : UN Women
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विस्तार
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वर्ष 2023 में हर दिन 140 महिलाएं-लड़कियां अपने साथी या करीबी रिश्तेदार के हाथों मौत का शिकार हुई हैं - यानी हर 10 मिनट में, एक महिला की मौत। महिला सशक्तिकरण के लिए यूएन संस्था (UN Women) और मादक पदार्थों एवं अपराध पर यूएन कार्यालय (UNODC) की सोमवार को एक जारी एक रिपोर्ट में यह भयावह वैश्विक वास्तविकता सामने आई है।
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महिलाओं के खिलाफ हिंसा के उन्मूलन के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस की 25वीं वर्षगांठ पर जारी इस रिपोर्ट में, ‘फेमिसाइड’ यानी लैंगिक कारणों से महिलाओं व लड़कियों को जान से मार दिए जाने के वैश्विक संकट पर प्रकाश डालते हुए, तत्काल कार्रवाई का आह्वान किया गया है।

यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस अवसर पर कहा है, "महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा की महामारी, मानवता को शर्मसार करती है। दुनिया को इस आह्वान पर ध्यान देना होगा। हमें न्याय और जवाबदेही के लिए तत्काल कार्रवाई और मुद्दे की पैरोकारी करने के लिए समर्थन की आवश्यकता है।”
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यह रिपोर्ट, 25 नवंबर से 10 दिसंबर तक चलने वाले, 16 दिनों के वार्षिक सक्रियता अभियान के शुरू में जारी की गई है। इस वर्ष, महिलाओं के खिलाफ हिंसा में चिंताजनक वृद्धि की ओर ध्यान आकर्षित करने के लिए UNITE अभियान की थीम है, "हर 10 मिनट में एक महिला की हत्या होती है।" #कोईबहानानहीं। महिलाओं के खिलाफ हिंसा खत्म करने के लिए एकजुट हों।”

क्षेत्रीय असमानताएं, सार्वभौमिक मुद्दा 
‘फेमिसाइड’ यानी लैंगिक वजहों से महिलाओं व लड़कियों को जान से मार दिए जाने की घटनाएं, सीमाओं, सामाजिक आर्थिक स्थितियों और संस्कृतियों से परे है। हालांकि, विभिन्न क्षेत्रों के अनुरूप, इसकी गंभीरता में अंतर हो सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रीका में अंतरंग साथी हिंसा और पारिवारिक कारणों से संबंधित महिलाओं की हत्या की सबसे अधिक दर दर्ज की गई।

यहां 2023 में 21 हजार 700 महिलाओं की हत्या हुई। इसके बाद अमेरिका और ओशीनिया का स्थान रहा। यूरोप और अमेरिका में, ‘फेमिसाइड’ के क्रमशः 64 प्रतिशत और 58 प्रतिशत मामले सामने आए, जिसमें से अधिकांश पीड़ितों को उनके अंतरंग साथियों के हाथों मारा गया था।

इसके विपरीत, अफ्रीका और एशिया में महिलाओं के अपने साथियों की तुलना में, परिवार के सदस्यों द्वारा मारे जाने की अधिक संभावना नजर आई, जिसे लैंगिक भेदभाव के लिए जिम्मेदार सांस्कृतिक एवं सामाजिक आयाम का सूचक माना जा सकता है।

आंकड़ों और जवाबदेही में गंभीर अंतर
चिंताजनक संख्या सामने आने के बावजूद, सुसंगत और व्यापक आंकड़ों की कमी एक महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है। 2023 में केवल 37 देशों ने अंतरंग साथी और पारिवारिक वजहों से महिलाओं को जान से मारने की घटनाओं के आंकड़े रिपोर्ट किए, जो 2020 में 75 देशों की तुलना में बड़ी गिरावट है। आंकड़ों की इस कमी के कारण, इस तरह के अपराधों के रुझानों की निगरानी करने और जवाबदेही तय करने के प्रयासों के रास्ते में बाधाएं आती हैं।

UN Women  और UNODC ने महिलाओं के ख़िलाफ़ हिंसा की समस्या से निपटने के लिए एक व्यापक रणनीति बनाई है, जिसके तहत व्यवस्थित आंकड़ा संग्रहण की आवश्यकता पर बल दिया गया है। सटीक और पारदर्शी आंकड़े, नीतिगत कार्रवाई, प्रगति की निगरानी तथा यह सुनिश्चित करने के लिए ज़रूरी है कि सरकारें, लैंगिक समानता के लिए अपनी प्रतिबद्धताओं के लिए जवाबदेह रहें।

एक वैश्विक जनादेश 
2025 में बीजिंग घोषणापत्र और कार्रवाई के मंच की 30वीं वर्षगांठ नजदीक है। साथ ही, सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी), खासतौर पर लैंगिक समानता के लिए लक्ष्य 5 को हासिल करने की पांच साल की समय सीमा भी करीब आ रही है। ऐसे में, यह रिपोर्ट त्वरित कार्रवाई के लिए एक पुकार की तरह है। यूएन वीमेन की कार्यकारी निदेशक सीमा बहाउस का कहना है, "महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा अपरिहार्य नहीं है - इसे रोका जा सकता है।"

उन्होंने "मजबूत कानून, बेहतर डाटा संग्रहण, अधिक सरकारी जवाबदेही, शून्य-सहिष्णुता संस्कृति और महिला अधिकार संगठनों एवं संस्थागत निकायों के लिए वित्तपोषण में वृद्धि" की आवश्यकता पर बल दिया। नवीनतम रिपोर्ट में, अपराधियों को जवाबदेह ठहराने वाली आपराधिक न्याय प्रणालियों को तुरन्त मज़बूत करने आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही, सुरक्षित एवं पारदर्शी रिपोर्टिंग तंत्र तक पहुंच व हिंसा से बचे लोगों के लिए पर्याप्त सहायता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।"

सीमा बहाउस ने कहा, "चूंकि अभी 16 दिनों का वार्षिक सक्रियता अभियान शुरू हो रहा है, इसलिए महिलाओं के जीवन की रक्षा के लिए तत्काल क़दम उठाना बेहद ज़रूरी हो जाता है।"
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(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)
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