आज के युवा तेजी से विवाह और गर्भधारण को टाल रहे हैं, जिससे न सिर्फ औसत गर्भधारण की उम्र बढ़ी है, बल्कि बड़ी संख्या में युवा अपनी मनचाही संतान संख्या से भी पीछे रह जा रहे हैं। कुछ देशों में यह समस्या काफी गहरा गई है। विश्व जनसंख्या दिवस पर जारी संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए) की रिपोर्ट में दुनिया के युवाओं की बदलती प्रजनन प्राथमिकताओं और चुनौतियों को लेकर यह खुलासा है।
वैश्विक जनसंख्या वृद्धि की गति भले ही धीमी पड़ रही हो, लेकिन रिपोर्ट दर्शाती है कि समस्या केवल गिरती प्रजनन दर नहीं, बल्कि युवाओं की घटती प्रजनन क्षमता और सीमित विकल्पों की भी है। दुनिया में गर्भधारण की औसत आयु अब 28 वर्ष हो गई है जो प्रजनन संबंधी व्यवहार में व्यापक बदलाव का संकेत है। युवाओं की घटती प्रजनन क्षमता की मुख्य वजह सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय दबावों का संयोजन है।
रिपोर्ट के अनुसार, जलवायु परिवर्तन, युद्ध, महामारी और भविष्य को लेकर अनिश्चितता युवाओं को परिवार बढ़ाने से हतोत्साहित कर रही है। इसके साथ ही महंगा आवास, बच्चों की परवरिश का खर्च, नौकरी की असुरक्षा और प्रजनन स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच जैसे आर्थिक कारण भी निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। इन कारणों से बड़ी संख्या में युवा या तो गर्भधारण को टाल रहे हैं या इच्छित संख्या में संतान पैदा नहीं कर पा रहे हैं।
जापान, इटली, स्पेन, चीन और जर्मनी में सबसे तेज गिरावट
रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में प्रजनन दर में सबसे तेज गिरावट दक्षिण कोरिया, जापान, इटली, स्पेन, चीन और जर्मनी जैसे देशों में देखी जा रही है। इन देशों में औसत प्रजनन दर 1.5 से भी नीचे पहुंच गई है, जो जनसंख्या स्थिरता के लिए आवश्यक प्रतिस्थापन स्तर (2.1) से काफी कम है। इसका मुख्य कारण तेजी से बढ़ती जीवन लागत, महंगे आवास, बाल देखभाल पर अत्यधिक खर्च और कार्यस्थल पर माता-पिता के लिए सीमित सहयोग है।
बदलती पारिवारिक संरचनाओं से जन्म दर पर असर
दक्षिण कोरिया और जापान में विशेष रूप से युवाओं में विवाह और माता-पिता बनने की इच्छा में भारी गिरावट आई है, जहां व्यक्तिगत स्वतंत्रता, करियर प्राथमिकता और सामाजिक दबाव बड़ी भूमिका निभा रहे हैं। चीन में एक दशक पहले समाप्त हुई ‘वन-बच्चा नीति’ का दीर्घकालिक प्रभाव अब भी बना हुआ है, और बढ़ते शहरीकरण के साथ जीवनशैली में बदलाव ने बच्चों की चाहत को और कम कर दिया है। यूरोपीय देशों में भी आर्थिक असुरक्षा, उम्रदराज होती आबादी और बदलती पारिवारिक संरचनाएं जन्म दर को प्रभावित कर रही हैं।