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UN: अधिकांश एसडीजी लक्ष्यों की धीमी प्रगति, वैश्विक नेताओं ने जताई चिंता; गुटेरस बोले- यह लोगों का सपना है

Mon, 18 Sep 2023 11:54 PM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन

सार

महासभा के अध्यक्ष डेनिस फ्रांसिस की ओर से आयोजित शिखर सम्मेलन 2030 एजेंडा और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निर्धारित समय सीमा के आधे रास्ते को चिन्हित करेगा। सतत विकास पर बुलाए गए उच्च स्तरीय राजनीतिक मंच ने राजनीतिक घोषणा को अपनाया।
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संयुक्त राष्ट्र - फोटो : pixabay
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र महासभा में विश्व के नेताओं ने 17 सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए ऐतिहासिक राजनीतिक घोषणा को स्वीकार कर लिया। हालांकि, नेताओं ने इस बात पर चिंता भी जताई कि इनमें से ज्यादातर लक्ष्यों को हासिल करने की गति बहुत धीमी है या 2015 के आधार रेखा से नीचे आ गए हैं, जब उनकी पहली बार घोषणा की गई थी।

संयुक्त राष्ट्र महासभा का उच्च स्तरीय 78वां सत्र सोमवार को 2023 एसडीजी शिखर सम्मेलन के साथ शुरू हुआ। इसमें 2030 एजेंडा और इसके 17 सतत विकास लक्ष्यों के कार्यान्वयन की समीक्षा की गई। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि इससे लक्ष्यों को हासिल करने के लिए 2030 के लक्ष्य वर्ष तक परिवर्तनकारी और त्वरित कार्यों पर उच्च स्तरीय राजनीतिक मार्गदर्शन प्राप्त हुआ।

राजनीतिक मंच ने राजनीतिक घोषणा को अपनाया

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महासभा के अध्यक्ष डेनिस फ्रांसिस की ओर से आयोजित शिखर सम्मेलन 2030 एजेंडा और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए निर्धारित समय सीमा के आधे रास्ते को चिन्हित करेगा। सतत विकास पर बुलाए गए उच्च स्तरीय राजनीतिक मंच ने राजनीतिक घोषणा को अपनाया। इसमें विश्व के नेताओं ने 2030 एजेंडा और उसके एसडीजी को प्रभावी ढंग से लागू करने और इसमें निहित सभी सिद्धांतों को बनाए रखने के लिए अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

एसडीजी लोगों की आशाएं और सपने हैं
शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने कहा कि आठ साल पहले 2015 में सदस्य देश सतत विकास लक्ष्यों को अपनाने के लिए महासभा हॉल में एकत्र हुए थे। एसडीजी केवल लक्ष्यों की सूची नहीं हैं, बल्कि हर जगह लोगों की आशाओं, सपनों, अधिकारों और अपेक्षाओं को लेकर चलते हैं। इसके बावजूद, केवल 15 फीसदी लक्ष्य ही पटरी पर हैं और कई विपरीत दिशा में जा रहे हैं। किसी को भी पीछे न छोड़ने के बजाय, हम एसडीजी को पीछे छोड़ने का जोखिम उठा रहे हैं।

 

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