ये खबर चौंकाने वाली है कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने उसके साथ हुए 23 अरब रक्षा सौदे को रद्द करने की धमकी है। इस करार के तहत यूएई अमेरिका में बने एफ-35 लड़ाकू विमान और उन्नत किस्म के ड्रोन की खरीदारी करने वाला है। बुधवार को अमेरिकी अखबार द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने अपनी एक्सक्लूसिव खबर में बताया कि फारस की खाड़ी में चीन बढ़ती भूमिका के मुद्दे पर अमेरिका और यूएई के मतभेद खड़े हो गए हैं। इसी कारण यूएई ने इस रक्षा सौदे को रद्द करने की धमकी है।
यूएई बोला चीनी जासूसी से बचाना असंभव
अमेरिका ने शर्त रखी है कि उसके जो हथियार यूएई को मिलेंगे, उन्हें चीनी जासूसी से बचा कर रखना यूएई की जिम्मेदारी होगी। इन हथियारों की बिक्री का करार पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शासनकाल में हुआ था। इस बीच यूएई में चीनी जासूसी की आशंका से अमेरिका अधिक चिंतित होता गया है। अब यूएई ने कहा है कि उसके लिए चीनी जासूसी से बचाए रखने की शर्त स्वीकार करना कठिन है।
वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक सौदा रद्द करने की धमकी यूएई के एक जूनियर अधिकारी की तरफ से लिखे गए पत्र में दी गई है। इसे अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों ने इस बात का संकेत माना है कि यूएई सचमुच सौदा रद्द करना नहीं चाहता। बल्कि वह बातचीत में अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
कुछ समय पहले वेबसाइट यूरेशियन टाइम्स ने खबर दी थी कि यूएई में चीन के एक संबंधी निर्माण को अमेरिकी एतराज के कारण रोक दिया गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने आशंका जताई थी कि चीन अबू धाबी में वह निर्माण सैनिक उद्देश्य से कर रहा है। यूएई सरकार के राजनयिक सलाहकार अनवर गर्गाश ने तब यूरेशियन टाइम्स को बताया था कि अमेरिकी आपत्ति के कारण काम रोका गया है, हालांकि अबू धाबी के अधिकारी यह नहीं मानते कि चीनी परियोजना का मकसद सैनिक उपयोग है।
गहरे हो रहे हैं यूएई और चीन के रिश्ते
पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि यूएई के साथ चीन के रिश्ते लगातार गहरे हो रहे हैं। इससे अमेरिका असहज हुआ है। अपनी नाराजगी जताने के लिए अमेरिका ने एफ-35 विमानों की सप्लाई में देर कर दी है। हालांकि उसने यह कहा है कि कुछ समय बाद इन विमानों की सप्लाई के लिए वह वचनबद्ध है।
जानकारों का कहना है कि अमेरिका को खास एतराज यूएई में चल रहे चीनी कंपनी हुवावे के 5जी परीक्षणों से है। अमेरिका हुवावे पर जासूसी के आरोप लगाता रहा है। 2020 में उसके दबाव में कई देशों ने इस कंपनी के साथ हुए समझौतों को रद्द कर दिया था। लेकिन यूएई ने अपने यहां इस कंपनी को भी 5जी का परीक्षण करने की अनुमति दी है और अपने फैसले पर वह कायम है।
जानकारों का कहना है कि न सिर्फ यूएई, बल्कि दूसरे खाड़ी देश भी अपनी अर्थव्यवस्थाओं को बहुआयामी बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वे अपनी कच्चे तेल के निर्यात पर से अपनी निर्भरता घटना चाहते हैं। नई अर्थव्यवस्था बनाने में वे जिन देशों की मदद ले रहे हैं, उनमें चीन भी है। इससे अमेरिका के साथ उनके रिश्तों में तनाव पैदा हो रहा है।