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UNICEF: 2025 में दक्षिण एशिया में 4.7 करोड़ बच्चों को होगी मानवीय सहायता की जरूरत; जानें पूरा मामला

Sat, 07 Dec 2024 10:37 AM IST
अभिषेक दीक्षित यूएन हिंदी समाचार

सार

यूनीसेफ की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि मानवीय सहायता अपील के जरिए मिलने वाली धनराशि से बच्चों और उनके परिवारों की स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, संरक्षण, पानी और स्वच्छता जरूरतों की पूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी।
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यूनीसेफ - फोटो : UN
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने कहा है कि दक्षिण एशिया में वर्ष 2025 के दौरान जलवायु संबंधी आपदाओं, अन्य प्रकार के संकटों, स्वास्थ्य आपदाओं और आर्थिक झटकों के कारण, लगभग 4 करोड़ 70 लाख बच्चों को मानवीय सहायता की आवश्यकता होगी। यूनीसेफ ने दक्षिण एशिया के देशों में वर्ष 2025 के दौरान लगभग 2 करोड़ 80 लाख लोगों तक जीवनरक्षक मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए एक अरब 60 करोड़ डॉलर की रकम जुटाने की अपील जारी की है। इनमें लगभग एक करोड़ 60 लाख बच्चे होंगे और इनकी अधिकतर संख्या अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान व अन्य देशों में होगी।

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दक्षिण एशिया के लिए यूनीसेफ के क्षेत्रीय निदेशक संजय विजेसेकेरा ने शुक्रवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा है, 'दक्षिण एशिया में  लाखों बच्चे लगातार गम्भीर होती जलवायु संबंधी आपदाओं से गम्भीर रूप से प्रभावित हो रहे हैं, जिनमें बाढ़ें, भूस्खलन, समुद्री तूफान और सूखा स्थितियां शामिल हैं और ये सब आपदाएँ अक्सर मानसून के मौसम में अधिक घटित होती हैं।'

उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए इन चुनौतियों में सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातस्थितियों, आर्थिक संकटों, और राजनैतिक अस्थिरता के हालात के कारण और भी बढ़ोत्तरी होती है। इनके परिणामस्वरूप बच्चों की जिंदगियां गंभीर जोखिम में पड़ती हैं, जिसमें उनके स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा के साथ-साथ अन्य बुनियादी जरूरतों में भी गम्भीर बाधाएं उत्पन्न होती हैं।
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यूनीसेफ की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि मानवीय सहायता अपील के जरिए मिलने वाली धनराशि से बच्चों और उनके परिवारों की स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, संरक्षण, पानी और स्वच्छता जरूरतों की पूर्ति सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी। दक्षिण एशिया क्षेत्र में बच्चों के लिए मानवीय कार्रवाई के हिस्से के रूप में तीन प्रमुख देशों में सहायता पहुंच बनाने की योजना है। अफगानिस्तान में लगभग एक करोड़ बच्चों तक जीवनरक्षक सहायता और बुनियादी सेवाएं मुहैया कराई जाएंगी।

बांग्लादेश में करीब 5 लाख 29 हजार 623 रोहिंज्या शरणार्थियों सहित कुल करीब 21 लाख लोगों तक कई तरह की सहायता मुहैया कराई जाएगी, जिसमें स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा जरूरतों को पूरा किया जाएगा। इनमें लगभग 11 लाख बच्चे और स्वास्थ्य देखभाल कर्मी भी लाभांवित होंगे, जिन्हें मानसिक स्वास्थ्य और मनोवैज्ञानिक समर्थन मुहैया कराया जाएगा। पाकिस्तान में लगभग 35 लाख बच्चों तक विभिन्न तरह की सहायता पहुंचाने की कोशिश की जाएगी।

अफगानिस्तान्र
अफगानिस्तान में लगभग एक करोड़ 24 लाख बच्चों के लिए मानवीय स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है। उनकी जिंदगियां आर्थिक कठिनाइयों, जलवायु जनित झटकों और महिलाओं पर लगी पाबंदियों के कारण मुश्किल बनी हुई हैं। इस हालात के परिणाम स्वरूप अफगानिस्तान, दक्षिण एशिया में एक ऐसा देश है, जहां मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए सबसे बड़ी अपील जारी की गई है।

बांग्लादेश
बांग्लादेश जलवायु सम्बन्धित आपदाओं और लम्बे चल रहे रोहिंज्या शरणार्थी संकटों के बोझ से जूझ रहा है। गौरतलब है कि बांग्लादेश में 10 लाख से भी अधिक रोहिंग्या शरणार्थी शरण लिए हुए हैं जो बहुत घनी आबादी वाले शिविरों में रहने को विवश हैं। बांग्लादेश में लगभग 32 लाख बच्चे, बाढ़ों, तूफानों और शरणार्थी संकटों के प्रभावों की चपेट में हैं।

पाकिस्तान
पाकिस्तान में करीब दो करोड़ 47 लाख बच्चे जलवायु परिवर्तन, लैंगिक विषमताओं, खाद्य असुरक्षा, उच्च स्तर के कुपोषण और राजनैतिक व आर्थिक अस्थिरता के उच्च प्रभावों की चपेट में हैं। दुनिया भर में जलवायु जोखिमों की दृष्टि से पाकिस्तान का पांचवां स्थान है, जहां बाढ़ें, ताप लहरें जैसी अत्यन्त चरम मौसम घटनाएं बहुत जल्दी-जल्दी घटित होने लगी हैं और वो अधिक विनाशकारी भी बन रही हैं।

अन्य देश
नेपाल भी भूकम्पों, बाढ़ों और भूस्खलों से लगातार प्रभावित होता रहा है। भूटान व नेपाल हिमालय क्षेत्र में अपनी भूस्थिति के कारण भूकंपों के उच्च जोखिम में बने हुए हैं। लगातार आती बाढ़ें और सूखा स्थितियां श्रीलंका की आर्थिक पुनर्बहाली के लिए भी खतरा बनी हुई हैं। मालदीव जलवायु परिवर्तन और बढ़ते समुद्री जल स्तर के साथ-साथ आर्थिक कठिनाइयों के भी जोखिम में हैं।

(नोट: यह लेख संयुक्त राष्ट्र हिंदी समाचार सेवा से लिया गया है।)

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