रोमानिया के राष्ट्रपति चुनाव के पहले दौर के नतीजे को सर्वोच्च अदालत ने पलट दिया। अदालत ने अपने फैसले में बताया कि प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जाना चाहिए। उन्हें इस नतीजे में रूस के शामिल होने का संदेह है, जिसके कारण राजनेता कैलिन जॉर्जेस्कू सबसे आगे निकले। अदालत का यह फैसला राष्ट्रपति क्लॉस इओहानिस के खुफिया जानकारी का खुलासा करने के बाद आया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान रोमानिया रूसी हमलों का लक्ष्य बन गया था। इस अभियान में कई सोशल मीडिया प्रोफाइल शामिल थे, जो टिकटॉक और टेलीग्राम जैसे प्लेटफार्मों पर जॉर्जेस्कू का समर्थन करते थे।
अदालत ने लिया चुनावी प्रक्रिया रद्द करने का फैसला
शुक्रवार के फैसले में अदालत ने राष्ट्रपति के चुनाव के लिए पूरी चुनावी प्रक्रिया को रद्द करने का फैसला किया। अगालत ने अपने बयान में कहा, राष्ट्रपति का चुनाव करने के लिए चुनावी प्रक्रिया पूरी तरह से दोबारा शुरू की जाएगी, और सरकार आवश्यक कदमों के लिए एक नई तारीख तय करेगी।
कैलिन जॉर्जेस्कू सबसे आगे
बता दें कि जॉर्जेस्कू अपने यूरोपीय संघ विरोधी और नाटो विरोधी रुख के लिए जाने जाते हैं। 25 नवंबर को रोमानिया के राष्ट्रपति चुनाव में सबसे आगे चल रहे थे। 62 वर्षीय कैलिन जॉर्जेस्कु के पास लगभग 23 प्रतिशत वोट थे। वहीं प्रधानमंत्री मार्सेल सिओलाकु 20 प्रतिशत वोट के साथ दूसरे स्थान पर थे। ऐसा माना जा रहा कि जनमत सर्वेक्षण में पांच प्रतिशत वोट पाने वाले जॉर्जेस्कू आठ दिसंबर को एक रन ऑफ वोट में सिओलाकु का सामना करने के लिए तैयार हैं।
आंशिक नतीजों से संकेत मिलता है कि जॉर्जेस्कू, जिन्हें चुनाव से पहले जनमत सर्वेक्षणों में 5 प्रतिशत वोट मिले थे, 8 दिसंबर को एक रन-ऑफ वोट में सिओलाकु का सामना करने के लिए तैयार हैं। इससे पहले एक्जिट पोल के अनुसार, जॉर्जेस्कु सेंटर राइट उम्मीदवार एलिना लासकोनी से आगे चल रहे हैं।