संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त मिशेल बैशलेट ने शुक्रवार को भारत में किसान आंदोलन से जुड़ी खबरें करने वाले पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई की आलोचना की।
साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी पर शिकंजा कसने के प्रयासों के लिए भी भारतीय अधिकारियों की निंदा की। बैशलेट ने कहा, तीन कृषि कानूनों के खिलाफ जारी किसान आंदोलन ने नियम बनाने से पहले सभी हितधारकों से राय मशविरे की अहमियत समझाई है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में संचार प्रतिबंधों को लेकर भी चिंता जताई।
बैशलेट ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) में 50 से ज्यादा देशों के मानवाधिकार मुद्दों को लेकर चल रहे 46वेंसत्र के दौरान यह टिप्पणी की। यूएनएचआरसी इससे पहले फरवरी की शुरुआत में भी आंदोलन कर रहे किसानों और भारतीय अधिकारियों को संयम बरतने और सर्वसम्मत हल तलाशने की अपील कर चुकी है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त ने कहा, भारत में हजारों किसान लगातार आंदोलन कर रहे हैं। मुझे यकीन है कि दोनों पक्षों के बीच चल रही वार्ताएं इस संकट का ऐसा न्यायसंगत हल मिलेगा, जो सभी के अधिकारों का सम्मान रखेगा।
उन्होंने कहा, आवश्यक मानवाधिकार सिद्धांतों के विपरीत आंदोलन कवर कर रहे पत्रकारों और टिप्पणी करने वाले कार्यकर्ताओं पर देशद्रोह के आरोप लगाना और सोशल मीडिया पर अभिव्यक्ति की आजादी को रोकने के प्रयास परेशान करने वाले हैं।
जम्मू-कश्मीर को लेकर बैशलेट ने कहा कि यूएनएचआरसी राज्य के हालातों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं, जहां संचार माध्यमों पर प्रतिबंध है और सिविल सोसाइटी कार्यकर्ताओं पर शिकंजा कसा जाना लगातार चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा, मोबाइल फोनों पर 4जी इंटरनेट की हालिया बहाली के बावजूद संचार तंत्र बाधित करना जन भागीदारी के साथ-साथ व्यापार, रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
भारत ने कहा- आंदोलनरत किसानों का किया है सम्मान
भारत ने यूएन मानवाधिकार प्रमुख की टिप्पणी के जवाब में कहा कि हमने आंदोलनकारी किसानों के प्रति बेहद सम्मान दिखाया है और कृषि कानूनों पर उनकी चिंताओं को हल करने के लिए उनके साथ लगातार वार्ता कर रहे हैं।
परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि इंद्रमणि पांडे ने आम बहस के दौरान कहा, भारत ने 2024 तक किसानों की आय को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। तीन कृषि कानूनों के निर्माण का उद्देश्य किसानों को उनकी फसलों के अच्छे दाम दिलाना और उनकी आय बढ़ाना है।
खासतौर पर यह छोटे किसानों को लाभ देगा और इसे अपनाने वाले किसानों को अपनी फसल के लिए ज्यादा विकल्प देगा। भारतीय प्रतिनिधि ने अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन की तरफ इशारा करते हुए कहा कि इसका भारतीय जनता ने स्वागत किया है, जिसमें जम्मू-कश्मीर के लोग भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा, हमने जम्मू-कश्मीर में जिला विकास समितियों (डीडीसी) चुनाव कराकर जमीनी स्तर पर लोकतंत्र स्थापित किया है और ‘बैक टू विलेज’ पहल के जरिये बेहतर प्रशासन उपलब्ध कराया है।