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UN: पाकिस्तान में हो रहे मानवाधिकार हनन की संयुक्त राष्ट्र में कड़ी निंदा; अफगान नागरिकों की मौत पर भी चिंता

Fri, 27 Mar 2026 07:42 AM IST
Shivam Garg एजेंसी, जिनेवा

सार

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 61वें सत्र में पाकिस्तान में हो रहे मानवाधिकार हनन को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की गई। जिनेवा में आयोजित इस सत्र में पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए गए हवाई हमलों में बेकसूर नागरिकों की मौत पर भी कड़ी निंदा हुई। 
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यूएनएचआरसी - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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तेजी से विकसित हो रही अर्थव्यवस्थाओं पर जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद (यूएनएचआरसी) के 61वें सत्र में पाकिस्तान में हो रहे मानवाधिकार हनन पर कड़ी  निंदा की गई। सत्र के दौरान आर्थिक विकास और मानवाधिकारों का हनन शीर्षक से चर्चा हुई। इस दौरान पाकिस्तान द्वारा अफगानिस्तान में किए गए हमलों में बेकसूर अफगान नागरिकों की मौत को लेकर भी गंभीर चिंता जताई गई।
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इस दौरान जापानी मानवाधिकार कार्यकर्ता शुन फुजिकी बोले, करीब 27 वैश्विक मानवाधिकार समझौतों से बंधे होने के बावजूद इस देश में गंभीर उल्लंघन जारी हैं। उन्होंने जबरन गायब किए जाने, यातना और हत्याओं की व्यापक रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि कई नागरिक या तो देश छोड़कर भाग रहे हैं या भय में जी रहे हैं। इंटरनेशनल करियर सपोर्ट एसोसिएशन द्वारा आयोजित इस चर्चा में वैश्विक विशेषज्ञों ने भाग लिया और इस बात का विश्लेषण किया कि एशियाई देशों में तीव्र आर्थिक प्रगति किस प्रकार लगातार हो रहे मानवाधिकार उल्लंघनों को अक्सर नजरअंदाज कर देती है।

विशेषाधिकारों के वैश्विक मानक मानने होंगे
वक्ताओं ने श्रम अधिकारों के हनन व अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश और नागरिक कल्याण को प्राथमिकता न देने वाली विकास नीतियों के व्यापक सामाजिक नतीजों पर प्रकाश डाला। जापान के शुन फुजिकी ने जोर दिया कि हमारा उद्देश्य पाकिस्तान को अलग-थलग करना नहीं, फिर भी पाकिस्तान को व्यापारिक विशेषाधिकारों को बनाए रखने के लिए वैश्विक मानकों का पालन करना होगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय संधियों के प्रति प्रतिबद्धता की गंभीर कमी भी उजागर की।
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भारत में समानता और समावेश के मुद्दे पर चर्चा
यूएनएचआरसी के 61वें सत्र में संभली ट्रस्ट के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह चौहान ने नस्लवाद, भेदभाव और असहिष्णुता की वैश्विक चुनौतियों की पर ध्यानाकर्षित करते हुए समावेशिता के प्रति भारत के सक्रिय दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा, नस्ली भेदभाव और विदेशियों के प्रति घृणा विश्व स्तर पर सबसे बड़ी चुनौतियां हैं। ये मुद्दे न केवल मानवीय गरिमा को ठेस पहुंचाते हैं, बल्कि सामाजिक सद्भाव को भी बाधित करते हैं, जिससे शिक्षा, रोजगार और न्याय तक पहुंच में समान अवसरों में बाधाएं पैदा होती हैं। वह बोले, भारत के ढांचे में सांविधानिक सुरक्षा उपाय समानता को बढ़ावा देते हैं और नागरिकों को भेदभाव से बचाते हैं। चौहान में जोधपुर में किए गए कार्यों की भी जानकारी दी।

बांग्लादेश को भी नसीहत
बांग्लादेश के पूर्व सांसद डॉ. मुहम्मद हबीबे मिल्लत ने कहा, लोकतांत्रिक व नागरिक आजादी के बिना आर्थिक विकास टिकाऊ नहीं है। बांग्लादेश का उदाहरण देते हुए उन्होंने तर्क दिया कि स्थिरता, समृद्धि व जन संतुष्टि लोकतंत्र, धर्मनिरपेक्षता और सभी नागरिकों के लिए समान अधिकारों की बहाली पर निर्भर करती है। बांग्लादेश को चाहिए कि वह टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए काम करे और सभी धर्मों को वरीयता दे।

साधन संपन्न होने पर भी सिंध में गरीबी
विश्व सिंधी कांग्रेस के अध्यक्ष डॉ. लखू लुहाना ने पाकिस्तान, विशेषकर सिंध में बढ़ती गरीबी और असमानता पर चिंता जताई। उन्होंने कहा, संसाधन संपन्न होने के बावजूद इस क्षेत्र में गरीबी बढ़ी है, जो पर्यावरण के क्षरण और बेरोजगारी से और भी बढ़ गई है। लुहाना ने अंतरराष्ट्रीय हितधारकों, विशेष रूप से यूरोपीय संघ की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या उनकी नीतियां वास्तव में मानवाधिकारों को बढ़ावा देती हैं या अनजाने में दमनकारी व्यवस्थाओं का समर्थन करती हैं।
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