पोलैंड के एक शरणार्थी कैंप में महिलाएं और बच्चे।
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युद्धग्रस्त यूक्रेन से जान बचाकर भागीं महिलाएं और बच्चे मानव तस्करी का शिकार हो रहे हैं। यूक्रेन से सटे पोलैंड, रोमानिया, माल्दोवा, हंगरी और स्लोवाकिया में बने रिफ्यूजी कैंपों में बड़े पैमाने पर मानव तस्कर सक्रिय हो गए हैं, जो इन रिफ्यूजी महिलाओं व बच्चों को अपने चंगुल में फंसा रहे हैं। इनका शारीरिक शोषण भी हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (यूएनएचसीआर) ने कहा, ज्यादातर रिफ्यूजी महिलाएं व बच्चे ही हैं। आपको न केवल इनकी तस्करी बल्कि अन्य शोषण का भी ध्यान रखना होगा।
बॉर्डर पर हजारों लोग मदद के लिए खड़े : रोमानिया, पोलैंड, हंगरी, माल्दोवा और स्लोवाकिया में भारी संख्या में स्थानीय लोग और स्वयंसेवक शरणार्थियों की सेवा में जुट रहे हैं।
यह होता है अंजाम
- पीड़ित महिलाओं को रेडलाइट एरिया में जबरन वेश्यावृत्ति में धकेलना
- अवैध खानों बंधुआ मजदूरी करना
- घरेलू नौकर बनाने के लिए बेचना
- शरीर के अंग निकालकर बेचा जाना
- भीख मांगने के लिए मजबूर करना
- जबरन अपराध करने काे मजबूर करना
25 लाख शरणार्थियों में 10 लाख से ज्यादा बच्चे
यूक्रेन से 25 लाख से ज्यादा लोग भागकर दूसरे देशों में आए हैं। इनमें 10 लाख से ज्यादा बच्चे हैं। इससे यूरोप में मानवीय संकट खड़ा हो गया है और यह दूसरे विश्वयुद्ध के बाद सबसे तेज विस्थापन है।