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यूएन: अमेरिका की प्राथमिकताएं क्या? ईरान में परमाणु से भारत के साथ ट्रेड डील तक, फारुकी ने बताई ट्रंप की सोच

Wed, 23 Sep 2026 09:43 AM IST
ज्योति भास्कर एएनआई, न्यूयॉर्क।

सार

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता बिलाल फारुकी ने संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की प्राथमिकताओं, ईरान नीति, रूस-यूक्रेन युद्ध और भारत-अमेरिका संबंधों पर बात की। ट्रंप ने यूएनजीए में शांति, समृद्धि और संप्रभुता पर जोर दिया।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (फाइल) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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अमेरिकी विदेश विभाग के हिंदी और उर्दू प्रवक्ता बिलाल फारुकी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के 81वें सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के संबोधन पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने अमेरिका की विदेश नीति की तीन प्रमुख प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया। फारुकी के अनुसार, ये प्राथमिकताएं विश्व में शांति स्थापित करना हैं। दूसरी प्राथमिकता समृद्धि सुनिश्चित करना है। तीसरी प्राथमिकता अपनी संप्रभुता की रक्षा करना है। अमेरिका अपनी संप्रभुता की सुरक्षा के लिए लगातार प्रतिबद्ध रहेगा। हालांकि, शांति को सबसे महत्वपूर्ण फोकस क्षेत्र बताया गया है।

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राष्ट्रपति ट्रंप ने यूएनजीए में अपने संबोधन में इस बात पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र को अपने मूल उद्देश्य पर वापस लौटना चाहिए। इसका मतलब केवल बातचीत या बैठकें आयोजित करना नहीं है। संयुक्त राष्ट्र को केवल चर्चाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बल्कि, इसे ठोस समझौतों पर पहुंचना चाहिए। विशेष रूप से शांति समझौतों को हासिल करना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे शांति समझौते ही अंततः वैश्विक समृद्धि की ओर ले जा सकते हैं। ये वे तीन मुख्य प्राथमिकताएं हैं जिन्हें राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने भाषण में रेखांकित किया है। फारुकी ने बताया कि अमेरिका इन लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सक्रिय रूप से काम करने को तैयार है। उन्होंने अमेरिका के दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से प्रस्तुत किया। ये प्राथमिकताएं वैश्विक स्थिरता और विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं। अमेरिका इन प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।

ईरान को लेकर अमेरिका का रुख क्या है?

बिलाल फारुकी ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष पर राष्ट्रपति ट्रंप की स्थिति को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि इस संघर्ष के पहले दिन से ही ट्रंप का रुख बिल्कुल साफ रहा है। सबसे महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उसे ऐसे हथियार रखने की भी इजाजत नहीं मिलेगी। दूसरा, ईरान क्षेत्र में विभिन्न आतंकवादी समूहों को व्यापक समर्थन देता है। इनमें हमास, हिजबुल्लाह और हूती जैसे समूह शामिल हैं। ईरान द्वारा इन समूहों को दिया जाने वाला समर्थन पूरी तरह से बंद होना चाहिए। तीसरा, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर ईरान के हमलों के प्रयासों को भी तुरंत रोकना होगा। यह क्षेत्र वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। अमेरिका इन सभी मुद्दों पर कड़ी निगरानी रख रहा है।

रूस और ईरान पर प्रतिबंधों का नया कानून क्या कहता है?

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता बिलाल फारुकी ने लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम 2026 पर भी टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सुबह के बयान में इस नए कानून का जिक्र किया था। नए कानून से राष्ट्रपति को अतिरिक्त विकल्प प्राप्त हुए हैं। ये विकल्प उन्हें यह तय करने की शक्ति देते हैं कि इन शक्तियों का उपयोग करना है या नहीं। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वीकार किया कि उनके पास अब ये विकल्प उपलब्ध हैं। हालांकि, उन्हें यह तय करना होगा कि इनका उपयोग कैसे या किस स्थिति में करना है। यह कानून अमेरिकी विदेश नीति में एक नया आयाम जोड़ता है। यह प्रतिबंधों को लेकर लचीलापन प्रदान करता है।

रूस-यूक्रेन युद्ध पर अमेरिका का क्या संदेश है?

राष्ट्रपति ट्रंप का मुख्य संदेश लगातार यही रहा है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को रोका जाना चाहिए। इस संघर्ष के कारण भारी संख्या में लोगों की जान गई है। युद्ध के कारण बड़े पैमाने पर विनाश हुआ है। यह युद्ध निश्चित रूप से समाप्त होना चाहिए। अमेरिका एक समझौते की सुविधा के लिए पूरी तरह से तैयार है। अमेरिका के विशेष दूत ने कुछ समय पहले दोनों देशों का दौरा भी किया था। हालांकि, किसी भी समझौते की शर्तों पर अंतिम निर्णय यूक्रेन और रूस के नेताओं पर ही निर्भर करता है। अमेरिका केवल मध्यस्थता की भूमिका निभा सकता है। वह दोनों पक्षों को बातचीत के लिए प्रोत्साहित कर रहा है।

भारत-अमेरिका संबंधों पर इस कानून का क्या असर होगा?

लिंडसे ओ. ग्राहम रूस और ईरान प्रतिबंध अधिनियम 2026 के भारत-अमेरिका संबंधों पर संभावित प्रभाव के बारे में बिलाल फारुकी ने बताया। उन्होंने कहा कि अभी तक कोई विशिष्ट विवरण उपलब्ध नहीं है। यह कानून हाल ही में पारित हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही कहा है कि वह स्थिति की समीक्षा करेंगे। अब उनके पास इन अतिरिक्त विकल्पों के साथ निर्णय लेने का अवसर है। व्यापार समझौते के संबंध में फारुकी ने कहा कि इस समय कोई नई जानकारी नहीं है। हालांकि, एक निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था तक पहुंचने की उम्मीद बनी हुई है। उन्होंने यह भी दोहराया कि अमेरिका और भारत के संबंध बहुत मजबूत हैं। दोनों देशों के बीच मजबूत व्यापारिक संबंध हैं। यह संबंध भविष्य में और भी मजबूत होने की संभावना है।

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