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Report: 'पीएम मोदी के नेतृत्व में पाकिस्तान के उकसावे का करारा जवाब दे सकता है भारत', अमेरिकी रिपोर्ट में दावा

Thu, 09 Mar 2023 02:26 PM IST
वीरेंद्र शर्मा एएनआई, वाशिंगटन

सार

पाकिस्तान का भारत-विरोधी आतंकवादी समूहों का समर्थन करने का एक लंबा इतिहास रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा कथित या वास्तविक पाकिस्तानी उकसावों का सैन्य बल के साथ जवाब देने की अधिक संभावना है।
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पीएम नरेंद्र मोदी। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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अगर चीन और पाकिस्तान ने भारत को उकसाया तो भारत बड़ा पलटवार कर सकता है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी की तरफ से बुधवार को यूएस कांग्रेस में पेश की गई एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत अब चीन या पाकिस्तान की तरफ से की गई किसी भी उकसावे की कार्रवाई को नहीं सहेगा, बल्कि ऐसी किसी भी हरकत पर बड़ा सैन्य पलटवार करेगा।
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चीन-पाकिस्तान को चेताते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि वे लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) व लाइन ऑफ कंट्रोल (एलओसी) पर आदत के मुताबिक, तनावपूर्ण स्थिति पैदा करने से बचें। रिपोर्ट में खासतौर पर पाकिस्तान की तरफ से होने वाली घुसपैठ और सैन्य उकसावे को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा गया है।

अमेरिकी खुफिया एजेंसी की तरफ से हर साल पेश की जाने वाली रिपोर्ट में भारत के लिए खतरों का आकलन करते हुए कहा गया है, पाकिस्तान के साथ तनाव बढ़ने की आशंका ज्यादा है, क्योंकि पाकिस्तान से भारत में आतंक फैलाने का लंबा इतिहास है। अब भी भारत मे आतंक फैलाने की कोशिशें जारी हैं।  पाकिस्तान खराब घरेलू हालात से लोगों का ध्यान हटाने के लिए भारत के साथ टकराव की स्थिति चुन सकता है, लेकिन यह पाकिस्तान के लिए खुदकुशी करने जैसा होगा।
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अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में भारत के लिए खतरों का आकलन भी किया गया है। इस रिपोर्ट को राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के कार्यालय द्वारा अमेरिकी कांग्रेस के सामने पेश किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-चीन द्विपक्षीय सीमा विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने में लगे हुए हैं, लेकिन 2020 में देशों की सेनाओं के बीच हुए संघर्ष के मद्देनजर संबंध तनावपूर्ण ही रहेंगे। इस घटना के बाद से दोनों के बीच संबंध गंभीर स्तर पर हैं।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘विवादित सीमा पर भारत और चीन दोनों द्वारा ‘सेना का विस्तार’ दो परमाणु शक्तियों के बीच सशस्त्र टकराव के जोखिम को बढ़ाता है, जिससे अमेरिकी लोगों तथा हितों को सीधा खतरा हो सकता है। इसमें अमेरिकी हस्तक्षेप की मांग की जाती है। पिछले गतिरोधों से स्पष्ट है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर लगातार निम्न-स्तर के संघर्ष तेजी से बढ़ सकते हैं।’’

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव विशेष रूप से चिंता का विषय है। हालांकि, दोनों देश संभवत: 2021 की शुरुआत में नियंत्रण रेखा पर दोनों पक्षों के फिर से संघर्षविराम पर राजी होने के बाद से अपने संबंधों को मजबूत करने के इच्छुक हैं। इसमें बताया गया है, ‘‘हालांकि, पाकिस्तान का आतंकवादी संगठनों का समर्थन करने का लंबा इतिहास रहा है और पीएम मोदी के नेतृत्व में कथित या वास्तविक पाकिस्तानी उकसावों का जवाब अब भारत द्वारा पहले से कहीं अधिक सैन्य बल के जरिए देने की आशंका है।’’

यूक्रेन और रूस युद्ध से बढ़ी गरीबी
कोविड-19 महामारी के साथ मिलकर यूक्रेन में रूस के युद्ध ने गरीबी में वृद्धि की है। साथ ही आर्थिक विकास में युद्ध ने  बाधा डाली है। घरेलू अशांति, उग्रवाद, लोकतांत्रिक पीछे हटने और अधिनायकवाद के लिए परिपक्व स्थितियों को बढ़ाया है। यूक्रेन में युद्ध ने प्रदर्शित किया है कि अंतरराज्यीय संघर्ष न केवल सीधे तौर पर शामिल पार्टियों को प्रभावित करता है, बल्कि क्षेत्रीय-और यहां तक कि वैश्विक-स्तर पर व्यापक व्यापक सुरक्षा, आर्थिक और मानवीय प्रभाव डाल सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्यों के बीच संभावित संघर्षों में से कुछ निम्नलिखित हैं, जो नतीजों के साथ फैल सकते हैं, जिन पर तत्काल अमेरिकी ध्यान देने की आवश्यकता हो सकती है।

संयुक्त राज्य अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए दुनिया भर में खतरों की यह वार्षिक रिपोर्ट इंटेलिजेंस कम्युनिटी की सामूहिक अंतर्दृष्टि को दर्शाती है, जो नीति निर्माताओं, युद्ध लड़ने वालों और घरेलू कानून प्रवर्तन कर्मियों को सूक्ष्म, स्वतंत्र और साफ-सुथरी खुफिया जानकारी प्रदान करने के लिए हर दिन प्रतिबद्ध है। दुनिया में कहीं भी अमेरिकी जीवन और अमेरिका के हितों की रक्षा करना।

खालिस्तानी आतंक को लेकर अमेरिका ने की निंदा
खालिस्तानी आतंक को लेकर अमेरिका ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका आतंक के किसी भी स्वरूप की निंदा करता है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा, जो अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए हिंसा का सहारा लेते हैं, उनके लिए अमेरिका में कोई जगह नहीं है। बीते कुछ दिनों से दुनियाभर में खालिस्तानी आतंकी सक्रिय हो गए हैं और ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और कनाडा सहित कई दशों में खालिस्तानी आतंकियों ने हिंदू व मंदिरों को निशाना बनाया है। बीते माह 21 फरवरी की ऑस्ट्रेलिया के ब्रिस्बेन में संदिग्ध खालिस्तान आतंकियों ने भारतीय वाणिज्य दूतावास में तोड़फोड़ भी की थी।

रिपोर्ट से बौखलाया पाकिस्तान
अमेरिकी संसद में पेश की गई रिपोर्ट में पाकिस्तान को भारत के खिलाफ आतंकियों को पालने वाला देश बताए जाने से पाकिस्तान बौखला गया है। इस रिपोर्ट को बेबुनियाद बताते हुए पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भारतीय सेना पर आरोप लगाते हुए कहा कि पाकिस्तान खुद आतंक पीड़ित देश है। भारतीय सेना पाकिस्तान के अलग अलग इलाकों में आतंकी गतिविधियों को प्रोत्साहित कर रही है।
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