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अमेरिका खुफिया विभाग की रिपोर्ट: मोदी सरकार में पाकिस्तानी उकसावे का जवाब देने की संभावना ज्यादा, चीन से तनाव बेहद गंभीर  

Tue, 08 Mar 2022 11:03 PM IST
Amit Mandal वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

ओडीएनआई ने कहा कि नई दिल्ली और बीजिंग के बीच संबंध 2020 में घातक संघर्ष के मद्देनजर तनावपूर्ण बने रहेंगे, जो दशकों में सबसे गंभीर हैं।
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Narendra Modi and Imran khan - फोटो : PTI
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विस्तार
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अमेरिकी खुफिया विभाग ने अमेरिकी कांग्रेस को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन में भारत की ओर से किसी भी पाकिस्तानी उकसावे का सैन्य ताकत के साथ जवाब देने की संभावना पहले के मुकाबले अधिक है। नेशनल इंटेलिजेंस के निदेशक (ओडीएनआई) के कार्यालय द्वारा जारी यूएस इंटेलिजेंस कम्युनिटी के वार्षिक खतरे के आकलन में यह भी कहा गया है कि विवादित सीमा के मुद्दे पर भारत और चीन दोनों का सैन्य विवाद दो परमाणु शक्तियों के बीच सशस्त्र टकराव के जोखिम को बढ़ाता है। इसमें अमेरिकी व्यक्तियों और हितों के लिए सीधे खतरे शामिल हैं और अमेरिका को इसमें हस्तक्षेप करना चाहिए। 

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भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव चिंताजनक 
इसमें कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव विशेष रूप से चिंता का विषय है। पाकिस्तान का भारत विरोधी आतंकी समूहों का समर्थन करने का एक लंबा इतिहास रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा पहले की तुलना में कथित या वास्तविक पाकिस्तानी उकसावे के लिए सैन्य ताकत के साथ जवाब देने की अधिक संभावना है। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते तनाव और कश्मीर में हिंसक अशांति या भारत में एक और आतंकवादी हमला होने की सूरत में लड़ाई की अत्याधिक संभावना है। 

नई दिल्ली और बीजिंग के बीच संबंध तनावपूर्ण बने रहेंगे
ओडीएनआई ने कहा कि नई दिल्ली और बीजिंग के बीच संबंध 2020 में घातक संघर्ष के मद्देनजर तनावपूर्ण बने रहेंगे, जो दशकों में सबसे गंभीर हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले गतिरोध ने दिखाया है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा पर लगातार छोटे टकराव के तेजी से बड़ा रूप लेने की क्षमता है। भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध पैंगोंग झील क्षेत्रों में हिंसक झड़प के बाद शुरू हुआ और दोनों पक्षों ने धीरे-धीरे हजारों सैनिकों के साथ-साथ भारी हथियारों को लेकर अपनी तैनाती बढ़ा दी। 15 जून, 2020 को गलवान घाटी में एक घातक झड़प के बाद तनाव बढ़ गया था। 
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अपनी रिपोर्ट में ओडीएनआई ने कहा कि बीजिंग एक युगांतकारी भू-राजनीतिक बदलाव के हिस्से के रूप में तेजी से प्रतिस्पर्धी हो रहे अमेरिकी-चीन संबंधों को देखता है। साथ ही वाशिंगटन के राजनयिक, आर्थिक और सैन्य उपायों को चीन का उदय रोकने और कम्युनिस्ट पार्टी के शासन को कमजोर करने के लिए व्यापक अमेरिकी कोशिश के रूप में देखता है।

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