गाजा और वेस्ट बैंक के मुद्दे पर बुधवार को न्यूयॉर्क में सुरक्षा परिषद की बैठक हुई। इस बैठक में वेस्ट बैंक में इस्राइल के कथित कब्जे की आलोचना की गई। गौरतलब है कि यह बैठक बोर्ड ऑफ पीस की बैठक से एक दिन पहले हुई है। बोर्ड ऑफ पीस पर अभी दुनिया की निगाहें लगी हुई हैं।
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों की बुधवार को बैठक हुई। इस बैठक में गाजा संघर्ष विराम समझौते को स्थायी बनाने की मांग की गई और साथ ही इस्राइल के वेस्ट बैंक में कब्जे की योजना की कड़ी आलोचना की गई। सुरक्षा परिषद ने इस्राइल की योजना को टू स्टेट सॉल्यूशन की संभावनाओं के लिए खतरा बताया। गौरतलब है कि सुरक्षा परिषद की बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा गठित बोर्ड ऑफ पीस की बैठक से एक दिन पहले हुई।
विज्ञापन
सुरक्षा परिषद की बैठक में क्या हुआ
न्यूयॉर्क में सुरक्षा परिषद का उच्च स्तरीय सत्र पहले गुरुवार को होना था, लेकिन बोर्ड ऑफ पीस की बैठक को देखते हुए इसे एक दिन पहले ही आयोजित किया गया।
15 सदस्यों वाली सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान अकेला ऐसा देश है, जिसने बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने का न्योता भी स्वीकार किया।
सुरक्षा परिषद की बैठक के दौरान इस्राइल ने विवादित वेस्ट बैंक में इस्राइल द्वारा जमीन कब्जाने की कथित कोशिश की कड़ी आलोचना की और इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा, 'वेस्ट बैंक पर अपना नियंत्रण बढ़ाने के इस्राइल के हालिया गैर-कानूनी फैसले बहुत परेशान करने वाले हैं।'
सुरक्षा परिषद की बैठक में पाकिस्तानी विदेश मंत्री के अलावा ब्रिटेन, इस्राइल, जॉर्डन, मिस्त्र और इंडोनेशिया के विदेश मंत्री भी शामिल हुए। बीते दिनों कई अरब देशों ने अपील की थी कि बोर्ड ऑफ पीस की बैठक से पहले संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक बुलाई जाए, जिसमें वेस्ट बैंक और गाजा पर चर्चा होनी चाहिए।
बैठक में फलस्तीन के राजनयिक रियाद मंसूर ने कहा, जमीन कब्जाना यूएन चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के सबसे बुनियादी नियमों का उल्लंघन है। यह राष्ट्रपति ट्रंप की योजना का उल्लंघन है, और गाजा में चल रही शांति कोशिशों के लिए भी बड़ा खतरा है।'
इस्राइल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने आरोप लगाया कि सुरक्षा परिषद इस्राइली विरोध से भरी हुई है और उन्होंने जोर देकर कहा कि बाइबिल की धरती पर इस्राइल से ज्यादा मजबूत अधिकार किसी का नहीं है। सार ने ये भी कहा कि पूरी दुनिया की निगाहें बोर्ड ऑफ पीस की बैठक पर लगी हैं और सुरक्षा परिषद पर किसी का ध्यान नहीं है।