अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के एक बड़े और चौंकाने वाले फैसले ने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी है। अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र से जुड़े 31 निकायों समेत कुल 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों और पहलों से खुद को अलग करने का ऐलान किया है। इस पर संयुक्त राष्ट्र ने साफ कहा है कि अमेरिका पर यूएन एजेंसियों को फंड देने की कानूनी जिम्मेदारी बनी हुई है।
न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने ट्रंप के फैसले पर खेद जताया है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के नियमित बजट और शांति मिशनों के लिए सदस्य देशों द्वारा दी जाने वाली राशि कोई विकल्प नहीं, बल्कि यूएन चार्टर के तहत कानूनी दायित्व है। उनके प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने स्पष्ट किया कि अमेरिका सहित सभी सदस्य देशों पर यह जिम्मेदारी लागू होती है।
किस तरह का फैसला लिया गया
राष्ट्रपति ट्रंप ने एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर कर 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों और मंचों से अमेरिकी समर्थन निलंबित कर दिया है। इनमें 35 गैर-यूएन संगठन और 31 संयुक्त राष्ट्र से जुड़े निकाय शामिल हैं। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ये संस्थाएं अमेरिकी राष्ट्रीय हितों के खिलाफ काम कर रही हैं और वोक एजेंडे को बढ़ावा देती हैं। व्हाइट हाउस की सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए इस फैसले की जानकारी दी गई, जबकि यूएन को इसकी कोई औपचारिक सूचना नहीं दी गई।
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जलवायु संस्थानों पर असर
इस फैसले का सबसे गहरा असर पर्यावरण और जलवायु से जुड़े वैश्विक संगठनों पर पड़ा है। अमेरिका ने इंटरनेशनल सोलर एलायंस, इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज, इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी और यूएन फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज से भी दूरी बना ली है। जलवायु संधियों से हटने का यह कदम अप्रत्याशित नहीं माना जा रहा, क्योंकि ट्रंप पहले भी पेरिस जलवायु समझौते से अमेरिका को बाहर कर चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र की चेतावनी
संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि जिन एजेंसियों से अमेरिका हट रहा है, वे अपना काम जारी रखेंगी। यूएनएफसीसीसी के प्रमुख साइमन स्टील ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के इस फैसले से उसकी अर्थव्यवस्था, रोजगार और जीवन स्तर को नुकसान होगा, क्योंकि जलवायु संकट तेजी से गंभीर होता जा रहा है। हालांकि यूएन ने यह भी कहा है कि भविष्य में अमेरिका के लिए दोबारा लौटने के दरवाजे खुले रहेंगे।
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ट्रंप के फैसले पर एक नजर
अमेरिका ने वैश्विक कूटनीति के मोर्चे पर एक बड़ा कदम उठाते हुए 66 अंतरराष्ट्रीय संगठनों, संधियों और मंचों से हटने का आदेश दिया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षरित ज्ञापन के अनुसार, अमेरिका उन संस्थाओं से दूरी बना रहा है, जो उसके मुताबिक राष्ट्रीय हितों के खिलाफ हैं।
इस फैसले में 35 गैर-यूएन संगठन और 31 संयुक्त राष्ट्र से जुड़े निकाय शामिल हैं। इनमें पर्यावरण, जलवायु, ऊर्जा, श्रम, प्रवासन और सामाजिक विकास से जुड़े कई अहम वैश्विक मंच हैं। संयुक्त राष्ट्र पॉपुलेशन फंड, यूएन वाटर, यूएन एनर्जी और इंटरनेशनल ट्रेड सेंटर जैसे संगठनों पर भी इसका असर पड़ेगा। आदेश में सभी अमेरिकी विभागों को तत्काल प्रभाव से फंडिंग और भागीदारी खत्म करने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया है। इससे पहले भी ट्रंप प्रशासन विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनेस्को से अमेरिका को बाहर कर चुका है।
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