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रिपोर्ट: दुनिया में 82 करोड़ लोग सो रहे भूखे तो वहीं 200 करोड़ हैं मोटे

Thu, 08 Aug 2019 09:34 AM IST
Trainee Trainee वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला

सार

  • जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र की बैठक हुई 
  • जलवायु परिवर्तन पर हुई बैठक में वैज्ञानिकों ने आने वाले खतरों के बारे में बताया
  • वैज्ञानिकों ने बताया कि 82 करोड़ लोग भूखे सोते हैं और 200 करोड़ लोग मोटे हैं
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संयुक्त राष्ट्र (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
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विस्तार
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जिनेवा में जलवायु परिवर्तन पर हुई बैठक में वैज्ञानिकों ने विश्व में बढ़ रही वैश्विक असामानता दूर करने पर जोर दिया। वैज्ञानिकों ने 1,000 पृष्ठों की एक रिपोर्ट पेश की। वैज्ञानिकों ने बताया कि आज जहां विश्व में 82 करोड़ लोग अक्सर भूखे सोने को मजबूर हैं, 200 करोड़ लोग मोटे या ओवरवेट हैं।

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इस असमानता को दूर करना जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण के लिए जरूरी है। जिनेवा में जुटे 108 वैज्ञानिकों के समूह ने बुधवार को यह बात कही है।

यहां संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन पर अंतरराष्ट्रीय पैनल द्वारा 195 देशों से मंत्रणा कर एक हजार पृष्ठों की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की गई। इसमें मानव द्वारा भूमि के उपयोग, बढ़ती आबादी की जरूरतों और इनके जलवायु पर असर का आकलन किया गया। 

वैज्ञानिकों ने जैविक-ऊर्जा और जलवायु के लिए गैर-हानिकारक ऊर्जा स्रोतों को औद्योगिकीकरण से पहले (17वीं व 18वीं शताब्दी) के मुकाबले पृथ्वी की तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस पर सीमित रखने में उपयोग बताया। 
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लेकिन यह भी माना कि इसके लिए जमीन के बहुत बड़े हिस्से की जरूरत होगी। इस सदी के मध्य तक विश्व की आबादी 1000 करोड़ हो जाएगी। पृथ्वी पर इतनी जमीन नहीं बचेगी कि लोगों के भोजन की व्यवस्था और जलवायु परिवर्तन पर नियंत्रण साथ-साथ कर सकें। 

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