बीते साल 9 नवंबर को लाल किले के पास हुए धमाके ने देशभर को झकझोर कर रख दिया था। इस हमले में 15 लोगों की मौत हो गई थी। ऐसे में यूएन की एक ताजा रिपोर्ट ने मामले में कई गंभीर सवाल और नई चिंताओं को जन्म दिया है। रिपोर्ट में जैश-ए-मोहम्मद को हमले का जिम्मेदार बताया गया और संगठन की नई साजिश के तहत महिला दहशतगर्दों को लेकर चिंता भी जताई गई है।
पुरानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के पास 9 नवंबर को हुआ जोरदार धमाका पूरे देश के लिए गहरे सदमे की तरह था। इस हमले में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हुए। ऐसे में अब संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की आतंकवाद निगरानी टीम की ताजा रिपोर्ट ने इस हमले से पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के जुड़े होने का दावा किया है। रिपोर्ट में संगठन की नई साजिशों पर भी चिंता जताई गई है, जिसमें महिलाओं के लिए अलग विंग बनाना और आतंकी गतिविधियों में उनकी भागीदारी शामिल है।
क्या है इस नए विंग का मकसद?
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि 8 अक्तूबर को जैश प्रमुख मसूद अजहर ने ‘जमात उल-मुमिनात’ नाम से महिलाओं के लिए एक अलग विंग बनाने की घोषणा की। यूएन टीम के अनुसार, इस विंग का मकसद आतंकी गतिविधियों में सहयोग करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह महिलाओं को शामिल करना संगठन की नई साजिश का हिस्सा हो सकता है, ताकि वह अपने नेटवर्क को बढ़ा सके और सुरक्षा एजेंसियों की नजर से बच सके।
जैश-एक मोहम्मद पर संयुक्त राष्ट्र का रुख
बता दें कि जैश-ए-मोहम्मद को संयुक्त राष्ट्र ने अल-कायदा से जुड़ा आतंकी संगठन घोषित कर रखा है। इसकी स्थापना साल 2000 में हुई थी और यह खासकर जम्मू-कश्मीर और भारत के अन्य हिस्सों में कई बड़े हमलों के लिए जिम्मेदार रहा है। इसके सरगना मसूद अजहर पर यूएन ने यात्रा प्रतिबंध और संपत्ति फ्रीज जैसी पाबंदियां लगा रखी हैं।
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यूएन के देशों की अलग-अलग राय
हालांकि, दूसरी ओर रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सदस्य देशों के बीच जैश की मौजूदा स्थिति को लेकर अलग-अलग राय है। कुछ देश इसे अभी भी सक्रिय और खतरनाक मानते हैं, जबकि एक सदस्य देश ने इसे निष्क्रिय बताया है। इन अलग-अलग आकलनों की वजह से दक्षिण एशिया में आतंकवाद के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहयोग में मुश्किलें आती रही हैं।
रिपोर्ट में मध्य और दक्षिण एशिया आतंकी खतरे का जिक्र
यूएन की रिपोर्ट में मध्य और दक्षिण एशिया में बदलते आतंकी खतरे का भी जिक्र है। इसमें कहा गया है कि कई चरमपंथी संगठन क्षेत्रीय अस्थिरता और सीमापार नेटवर्क का फायदा उठा रहे हैं। लगातार दबाव के बावजूद जैश जैसे संगठन नए तरीके अपनाकर खुद को फिर से संगठित करने और बड़े हमले करने की क्षमता दिखा रहे हैं। इसके साथ ही अलग से, रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक अन्य हमले में शामिल तीन संदिग्धों को जुलाई में सुरक्षा बलों ने मार गिराया था।
गौरतलब है कि यह क्षेत्र में जारी आतंक विरोधी अभियानों को दर्शाता है। कुल मिलाकर देखा जाए तो यूएन की इस रिपोर्ट ने साफ किया है कि भले ही कुछ आतंकी संगठन कमजोर पड़े हों, लेकिन उनकी नई साजिश और प्रतीकात्मक ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता अब भी क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बनी हुई है।