संयुक्त राष्ट्र ने अफगानिस्तान की तालिबान सरकार और म्यांमार के सैन्य शासन को प्रतिनिधित्व देने से इनकार कर दिया है। मौजूदा स्थायी अफगान मिशन ही फिलहाल अफगानिस्तान का यूएन में प्रतिनिधित्व करता रहेगा। माना जा रहा है कि तालिबान की दमनकारी हरकतों के कारण मान्यता न देने फैसला किया गया है।
अफगान मिशन के अनुसार यूएन की मान्यता समिति ने इस विषय पर बैठक करके निर्णय लिया कि मौजूदा अफगान शासन और म्यांमार की सैन्य सरकार को यूएन में सीट नहीं दी जा सकती। नतीजे में अशरफ गनी सरकार के समय नियुक्त किए गए मौजूदा अफगान मिशन का प्रतिनिधित्व बरकार रहेगा। आने वाले दिनों में यही समिति महासभा को अपनी रिपोर्ट देगी।
इस प्रकार अफगान नागरिक अगर यूएन से संपर्क करते हैं तो यही मिशन मदद करेगा। इससे पहले नवंबर में यूएन की विशेष प्रतिनिधि डेबोरा लियन ने कहा था कि तालिबानी यूएन से मान्यता तो चाहते हैं, लेकिन विश्वास का संकट बना हुआ है।
महिलाओं, अल्पसंख्यकों व स्थानीय समुदायों पर उसने जो कदम उठाए, उनसे मान्यता पाने में नई बाधाएं पैदा हुईं। हालांकि, लोगों को संकटपूर्ण हालात से उबारने के लिए उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अफगानिस्तान के नेताओं से वार्ता जारी रखने का निवेदन किया था।
अफगान राजदूत ने कहा हमारा झंडा फहराता रहेगा इस समय अफगान मिशन का नेतृत्व कर रहे राजदूत गुलाम इसाकजई तालिबानी सरकार की कई मुद्दों पर खुली आलोचना करते रहे हैं।
यूएन के ताजा कदम पर उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान का तीन रंग का राष्ट्रीय झंडा ही संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पर फहराता रहेगा। वे पहले भी लड़कियों को शिक्षा की स्वतंत्रता को कुरान की शिक्षा के अनुरूप बता कर तालिबानियों द्वारा लगाए प्रतिबंधों कर चुके हैं। वहीं अंतरराष्ट्रीय राहत से आतंकियों के परिवारों को मदद देने का आरोप लगा चुके हैं।