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IAEA: 'ईरान करे सहयोग, परमाणु स्थलों तक तुरंत दे पहुंच', आईएईए ने की मांग; प्रस्ताव से इन देशों ने बनाई दूरी

Wed, 10 Jun 2026 11:05 PM IST
Devesh Tripathi पीटीआई, वियना

सार

आईएईए के बोर्ड ने ईरान से उसके परमाणु कार्यक्रम को लेकर अधिक पारदर्शिता बरतने और निरीक्षकों को जरूरी पहुंच देने की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है। बोर्ड का मानना है कि परमाणु सामग्री की स्थिति और उपयोग की स्वतंत्र पुष्टि के लिए सहयोग आवश्यक है। प्रस्ताव को अधिकांश सदस्य देशों का समर्थन मिला, जबकि कुछ देशों ने इसका विरोध या मतदान से दूरी बनाई। 
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आईएईए ने मांगी तत्काल पहुंच - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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संयुक्त राष्ट्र की परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के बोर्ड ने बुधवार को ईरान से तत्काल सहयोग करने और उसके परमाणु स्थलों तक पूर्ण पहुंच की मांग करते हुए एक प्रस्ताव पारित किया है। प्रस्ताव में कहा गया कि आईएईए को यह सत्यापित करने में सक्षम बनाने के लिए कि परमाणु सामग्री का कोई दुरुपयोग या अन्यत्र हस्तांतरण नहीं हुआ है, जानकारी और पहुंच उपलब्ध कराना आवश्यक है।

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वियना स्थित आईएईए मुख्यालय में हुई मतदान प्रक्रिया में एजेंसी के 35 सदस्यीय बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के 21 देशों ने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। बंद कमरे में हुई बैठक के परिणाम की जानकारी राजनयिकों ने गोपनीयता की शर्त पर दी। रूस, चीन और नाइजर ने प्रस्ताव का विरोध किया, जबकि 10 देशों ने मतदान से दूरी बनाई। एक सदस्य देश बकाया देनदारियों के कारण मतदान नहीं कर सका। यह प्रस्ताव फ्रांस, ब्रिटेन, जर्मनी और अमेरिका ने पेश किया था।

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ईरान पर दबाव बनाने की रणनीति है प्रस्ताव
एक वरिष्ठ पश्चिमी राजनयिक ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि इस प्रस्ताव का उद्देश्य ईरान पर अपने कानूनी सुरक्षा दायित्वों का पालन करने के लिए कूटनीतिक दबाव बनाए रखना है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ा हुआ है। अमेरिका ने बुधवार तड़के ईरान पर हवाई हमले किए, जबकि तेहरान ने क्षेत्र के देशों पर जवाबी कार्रवाई की।

इन बढ़ते हमलों से युद्ध समाप्त करने के प्रयास प्रभावित होने की आशंका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी चेतावनी दी है कि शांति वार्ता में गतिरोध की कीमत तेहरान को चुकानी पड़ेगी। जून 2025 में 12 दिनों तक चले युद्ध के दौरान इस्राइल और अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु स्थलों पर हमले किए जाने के बाद से ईरान ने आईएईए निरीक्षकों को प्रभावित परमाणु स्थलों तक पहुंच नहीं दी है, जबकि परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के तहत उसे एजेंसी के साथ सहयोग करना कानूनी रूप से अनिवार्य है।

बीते साल से अब तक नहीं पता चली यूरेनियम भंडार की स्थिति
जून 2025 में हुई बमबारी के बाद से एजेंसी लगभग हथियार-स्तरीय संवर्धित यूरेनियम के भंडार की स्थिति का भी सत्यापन नहीं कर पाई है। आईएईए के अनुसार, ईरान के पास 60 प्रतिशत तक संवर्धित 440.9 किलोग्राम यूरेनियम का भंडार है। यह 90 प्रतिशत के हथियार-स्तरीय संवर्धन स्तर से तकनीकी रूप से बहुत कम दूरी पर है।

हाल में एपी को दिए एक साक्षात्कार में आईएईए के महानिदेशक रफाइल ग्रोसी ने कहा था कि अगर ईरान अपने कार्यक्रम को हथियार निर्माण की दिशा में ले जाने का फैसला करता है तो यह भंडार उसे 10 तक परमाणु बम बनाने में सक्षम बना सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि ईरान के पास पहले से ऐसा कोई हथियार मौजूद है।

ईरान का संवर्धित यूरेनियम को लेकर अलग दावा
ईरान का कहना है कि वह परमाणु हथियार विकसित नहीं कर रहा है और उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। प्रस्ताव में पिछले 12 महीनों के दौरान अपने अप्रसार संबंधी दायित्वों के पालन में विफल रहने पर ईरान के प्रति "गहरी निराशा" भी व्यक्त की गई है।

आईएईए बोर्ड ने पिछले वर्ष जून में पहली बार 20 वर्षों के बाद आधिकारिक रूप से ईरान को उसके सुरक्षा समझौते के अनुपालन में विफल पाया था। इसके कुछ समय बाद अमेरिका और इजराइल ने ईरान के परमाणु स्थलों पर हमले किए थे। इस विवाद का मुख्य कारण ईरान के कई अघोषित स्थलों पर निरीक्षकों द्वारा पाए गए यूरेनियम के अंशों की जांच है, जो लंबे समय से आईएईए की जांच का विषय बने हुए हैं।

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आईएईए बोला- ईरान से नहीं मिला विश्वसनीय जवाब
आईएईए के अनुसार, 2019 से अब तक ईरान इस परमाणु सामग्री की उत्पत्ति और वर्तमान स्थिति के बारे में "तकनीकी रूप से विश्वसनीय जवाब" देने में विफल रहा है। पश्चिमी अधिकारियों का संदेह है कि ये यूरेनियम अंश इस बात के अतिरिक्त संकेत हो सकते हैं कि 2003 तक ईरान का कोई गुप्त परमाणु हथियार कार्यक्रम था।
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हालांकि बुधवार के प्रस्ताव में ईरान को अतिरिक्त प्रतिबंधों पर विचार के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के पास भेजने की सिफारिश नहीं की गई। ऐसा आखिरी बार फरवरी 2006 में हुआ था, जब ईरान को अनुपालन में विफल पाया गया था।

फिर भी प्रस्ताव में भविष्य में ऐसे कदम की संभावना खुली रखी गई है। इसमें कहा गया है कि आईएईए बोर्ड "आगे की कार्रवाई करने के लिए तैयार रहेगा", जिसमें संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विचारार्थ आईएईए की औपचारिक अनुपालन-विफलता रिपोर्ट के समय और विषयवस्तु पर विचार करना भी शामिल है।

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