ईरान के संयुक्त राष्ट्र में राजदूत अमीर-सईद इरावानी ने आरोप लगाया है कि इस्राइल सरकार ने लेबनान की राजधानी बेरूत में चार वरिष्ठ ईरानी राजनयिकों की हत्या की। उन्होंने इसे जघन्य अपराध करार दिया है। राजदूत ने यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को लिखे पत्र में बताया कि 8 मार्च को रामादा होटल पर इस्राइल ने टारगेटेड स्ट्राइक की, जिसमें राजनयिक मारे गए। उन्होंने कहा कि इससे पहले आईडीएफ (IDF) ने सार्वजनिक रूप से ईरानी अधिकारियों को निशाना बनाने की धमकी दी थी, इसलिए राजनयिकों को सुरक्षा कारणों से होटल में अस्थायी रूप से रखा गया था।
ईरानी राजदूत ने पत्र में कहा राजनयिकों की हत्या, जबकि वे एक संप्रभु राज्य के आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में दूसरे संप्रभु राज्य की सीमा में कार्यरत थे, आतंकवाद की घृणित कार्रवाई और अंतरराष्ट्रीय कानून का गंभीर उल्लंघन है। उन्होंने जोर दिया कि यह यूएन चार्टर और 1973 के अंतरराष्ट्रीय संरक्षित व्यक्तियों की सुरक्षा से संबंधित संधियों का घोर उल्लंघन है, जिसे अनदेखा नहीं किया जा सकता।
US-इस्राइल ने नागरिक अवसंरचना को निशाना बनाया
ईरान के यूएन राजदूत ने आरोप लगाया कि अमेरिका और इस्राइल जानबूझकर नागरिक और नागरिक अवसंरचना को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने कहा वे जानबूझकर और भेदभावपूर्वक मेरे देश के नागरिकों और नागरिक अवसंरचना पर हमला कर रहे हैं। अब तक इन अपराधों में 1,300 से अधिक नागरिक शहीद हो चुके हैं। 9,669 नागरिक स्थलों को नुकसान पहुंचा है, जिनमें 7,943 आवासीय घर, 1,617 वाणिज्यिक केंद्र, 32 चिकित्सा केंद्र, 65 स्कूल और 13 रेड क्रॉस भवन शामिल हैं।
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ईरानी राजदूत ने कहा कि ईंधन भंडारण स्थलों पर हमले से जहरीले प्रदूषक हवा में फैल गए। उन्होंने बताया "7 मार्च की रात, आक्रामक विमानों ने ईंधन भंडारण स्थलों पर भारी हमला किया। विस्फोट से विषाक्त पदार्थ हवा में फैल गए। 8 मार्च की सुबह हुई बारिश ने इन प्रदूषकों को और फैलाया, जिससे सांस की गंभीर समस्या और पर्यावरणीय जोखिम बढ़ गया।" ईरानी राजदूत ने यूएन से कार्रवाई की अपील करते हुए कहा "यदि आज ईरान को निशाना बनाया गया, तो कल कोई अन्य देश भी हो सकता है। सुरक्षा परिषद की चुप्पी गहन रूप से चिंता का विषय है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरंत इस रक्तपात रोकने के लिए कदम उठाना चाहिए।"