अफगानिस्तान के घटनाक्रम को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र को एक बार फिर चेताया है। भारतीय दूत ने यूएन में कहा कि अफगानिस्तान के हालात का पश्चिम एशियाई क्षेत्र पर व्यापक रूप से असर पड़ेगा।
दरअसल, अफगानिस्तान में अगस्त 2021 में 20 साल बाद फिर तालिबान का कब्जा हो गया है। यहां से अमेरिकी फौजों की वापसी के बाद काबिज हुई तालिबानी सरकार को अभी विश्व के कई देशों ने मान्यता नहीं दी है। कई पाबंदियों के कारण देश में आर्थिक व सामाजिक संकट के साथ आतंकवाद का खतरा पैदा हो गया है।
उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में बीते कुछ दिनों में हालात तेजी से बिगड़े हैं। मध्य अगस्त में काबुल पर सुन्नी पख्तुन गुट के नियंत्रण के बाद अंतरराष्ट्रीय पाबंदियों, अफगानिस्तान की संपत्तियां जब्त होने व विदेशी मदद बंद होने का व्यापक असर हुआ है। अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त करने का इंतजार कर रहा तालिबान अमेरिका से बार बार आग्रह कर रहा है कि वह जब्त अफगान संपत्तियों को मुक्त करे।
अगस्त 2021 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने प्रस्ताव संख्या 2593 पारित करते हुए कहा था कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल किसी अन्य देश पर हमले के खतरे के तौर पर नहीं होना चाहिए। यह प्रस्ताव 15 सदस्यीय परिषद में 13 मतों से पारित हुआ था। रूस व चीन प्रस्ताव पर मतदान के वक्त अनुपस्थित रहे थे।