लैंगिक समानता के लिए काम करने वाले संयुक्त राष्ट्र के एक संगठन ने निर्णय लेने वाली वैश्विक संस्थाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की मांग की है। संस्थान ने शुक्रवार रात को स्वीकार किए गए एक दस्तावेज में यह मांग की है। दस्तावेज में आयोग ने सभी महिलाओं के मानवाधिकारों और स्वतंत्रता को बढ़ाने और उनकी रक्षा करने में नागरिक समाज की महत्वपूर्ण भूमिका का समर्थन किया।
विज्ञापन
‘कमीशन ऑन स्टेटस ऑफ वूमन’ ने लैंगिक समानता हासिल करने के लिए 25 वर्ष पहले बीजिंग में महिला सम्मेलन में स्वीकार की गई रूपरेखा की पुन: पुष्टि की और आज के कई अहम मुद्दों पर रोशनी डाली। इसमें सार्वजनिक जीवन में पुरुषों और महिलाओं के बीच सत्ता का संतुलन और डिजिटल दुनिया में महिलाओं और लड़कियों के खिलाफ हिंसा का बढ़ता प्रभाव शामिल है।
राजनयिकों ने आखिरी मिनट तक महिला अधिकार रक्षकों, लैंगिक आधारित हिंसा और इससे पहले प्रजनन और यौन स्वास्थ्य एवं अधिकारों की भाषा पर बातचीत की। यूरोपीय संघ ने कहा, वह चाहता था कि 23 पन्नों के इस दस्तावेज में ‘और महत्वाकांक्षी भाषा’ हो। संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्यों ने ‘सहमत निष्कर्षों’ पर चर्चा की और दो सप्ताह चली बैठक के अंत में आयोग के 45 सदस्यों ने इसे सर्वसम्मति से इसे स्वीकार किया।