फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ukraine: माता-पिता और मंगेतर से मिलने के लिए तय किया 3700 किमी का सफर, रूसी हमले से पहले थी केवल कुछ मिनटों की दूरी

Sun, 22 May 2022 07:16 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कीव

सार

रूस के हमले के बाद केवल 10 किलोमीटर दूर रहने वाले अपने माता-पिता और मंगेतर से मिलने में सफल न हो पाने पर एक शख्स ने वहां पहुंचने के लिए 3700 किलोमीटर की यात्रा तय की है।
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

यूक्रेन के त्सिरकुनी के एक गांव में रहने वाले सर्ही बेल्याएव (32) के घर से उनकी मंगेतर के घर तक का सफर महज 10 मिनट का था, जो खारकीव में स्थित है। लेकिन, रूस के हमले ने यहां हालात को एकदम बदल दिया है। रूसी सैनिकों ने 24 फरवरी को खारकीव की ओर बढ़ने के साथ बेल्याएव के गांव में तबाही बरपाने में केवल कुछ घंटे लगे थे। 

विज्ञापन


अगली सुबह यूक्रेन के लोगों का एक तरह से पूरा जीवन ही बदल गया था। बेल्याएव के लिए द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से यूरोप में सबसे बड़े विवाद का अग्रिम मोर्चा अब उनके और उनकी मंगेतर नटाली ड्रोज्ड (28) व उनके परिवार के बीच बाधा बन गया था। दोनों को मिलाने वाला पुराना रास्ता अब पार न किया जा सकने वाला एक बड़ा अवरोध बन गया था।

बेल्याएव अपनी 66 वर्षीय बीमार मां गलिना के लिए चिंतित थे और अपनी मंगेतर से मिलना चाहते थे। बेल्याएव के दिमाग में एक विचार आया। यह एक जुए की तरह ही था। पहले उन्होंने इसे विचार को खारिज किया फिर इसी पर काम करने का फैसला किया। यह विचार था 10 किलोमीटर की यात्रा को 3700 किलोमीटर की दूरी तय करके पूरा करना।
विज्ञापन


एक पेशेवर पोकर खिलाड़ी बेल्याएव का कहना है कि रूस से लात्विया के रास्ते रूसी सीमा तक, लिथुआनिया और पोलैंड सीमा पर और फिर पश्चिम की ओर से खारकीव पहुंचना, यह थोड़ा पागलपन से भरा जरूर था लेकिन संभव था। युद्ध के शुरुआती दिनों में अपने गांव में आग लगने के बाद बेल्याएव और उनके भाई यूरी (45) स्ट्रिलेचा के लिए रवाना हो गए थे। 

यहां भी रूस का कब्जा था, लेकिन आग नहीं लगी थी। बेल्याएव ने उन परिवारों से बात करनी शुरू की जो पोलैंड जाना चाहते थे। इसके बाद उन्होंने चार कारों के एक काफिले में शामिल होने का फैसला किया। उनकी होंडा एकॉर्ड बहुत बुरी हालत में थी लेकिन उनके पास कोई और रास्ता नहीं था। यूरी ने अपने कुत्ते की देखभाल के लिए वहीं रहने का फैसला किया।

दो अजनबियों के साथ बेल्याएव ने शुरू किया सफर
बेल्याएव की कार में उनके साथ दो और लोगों, एमिल (28) और उनकी मंगेतर कात्या (22), ने चार अप्रैल को दोपहर एक बजे अपना सफर शुरू किया। उन्होंने कहा कि हमें रूसी सैनिकों ने बताया था कि बॉर्डर खुला होगा जो पास ही था, लेकिन ऐसा नहीं था। हमारे पास यही रास्ता था कि दूसरी बॉर्डर क्रॉसिंग तक पहुंचने के लिए 70 किमी का सफर तय करें। 

ये 70 किलोमीटर बेल्याएव के लिए बहुत मुश्किल थे। इस दौरान उन्हें कई चेकप्वाइंट से गुजरना पड़ा। कुछ रूसी सैनिकों ने उन्हें आगे भी नहीं बढ़ने दे रहे थे। इस वजह से बीच में उन्हें रास्ता भी बदलना पड़ा। कहीं-कहीं पर उन लोगों से लंबी पूछताछ की गई। लेकिन इन सब चुनौतियों को किसी तरह पार करते हुए बेल्याएव की यात्रा एक बार फिर शुरू हुई।

15 मई को पहुंचे कीव, पुलिस ने भी की थी पूछताछ
धीरे-धीरे इस सफर को तय करते हुए वह 15 अप्रैल की दोपहर को कीव पहुंचे। यहां 11 दिनों में पहली बार अपने दोस्त के यहां सोने के लिए उन्हें बिस्तर नसीब हुआ। यहां से वह पोल्टावा पहुंचे जहां माता-पिता के लिए दवाइयां लीं। उन्होंने अपने पिता को फोन किया और बताया कि कोई दवाई लेकर आया है। जब उनके पिता वहां पहुंचे तो उन्होंने बेल्याएव को देखा।

इसके बाद वह नटाली के घर की ओर चले लेकिन 50 मीटर पहले ही उन्हें पुलिस ने रोक लिया। उन्हें बेल्याएव के कंबल और कार की हालत देखकर शक हो रहा था। लेकिन, पूछताछ के बाद उन्होंने उसे जाने दिया और अंतत केवल 10 मिनट का सफर कई दिनों में तय करने के बाद वह अपनी मंगेतर से मिल पाए। इसे लेकर नटाली ने कहा, 'घर तो घर है।'

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें