यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने कहा है कि वह रूस के मिसाइल हमलों का मुकाबला करने के लिए अमेरिका पर 'पैट्रियट' हवाई सुरक्षा मिसाइलें देने का लगातार दबाव बना रहे हैं। उन्होंने इस हफ्ते अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और कांग्रेस को एक पत्र भी भेजा था, जिसमें उन्होंने पैट्रियट पीएसी-3 मिसाइलों की सख्त जरूरत बताई है, लेकिन अभी तक उसका कोई जवाब नहीं मिला है। जेलेंस्की ने चेतावनी दी कि यूक्रेन के पास हथियारों की भारी कमी हो रही है क्योंकि ईरान युद्ध की वजह से अमेरिका की रसद वहां भेजी जा रही है। उन्होंने स्वीडन यात्रा के दौरान कहा कि अमेरिका को इस मामले में तेजी से कदम उठाने चाहिए।
इस बीच स्वीडन की यात्रा के दौरान जेलेंस्की ने एक बड़े रक्षा सौदे की घोषणा की। वहां उन्होंने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के साथ रक्षा सहयोग को लेकर अहम बातचीत की। यूक्रेन स्वीडन से 2.5 अरब यूरो (लगभग 2.9 अरब डॉलर) में 20 आधुनिक 'ग्रिपेन' लड़ाकू विमान खरीदने की योजना बना रहा है। इसके लिए पैसा यूरोपीय संघ से मिले 90 अरब यूरो के कर्ज से दिया जाएगा। सौदा पूरा होने पर स्वीडन 16 पुराने ग्रिपेन विमान दान में देगा। पुराने विमान अगले साल की शुरुआत में मिलेंगे, जबकि नए विमान 2030 से मिलने शुरू होंगे। जेलेंस्की ने कहा कि ये विमान रूस के उन विमानों को रोकने में मदद करेंगे जो यूक्रेन पर शक्तिशाली बम गिराते हैं। यूक्रेन की योजना कुल 150 ग्रिपेन विमान हासिल करने की है।
यूक्रेन अपनी ड्रोन तकनीक की विशेषज्ञता दूसरे देशों के साथ साझा कर रहा है। जेलेंस्की ने बताया कि उनके विशेषज्ञों ने पश्चिम एशिया के देशों, खासकर खाड़ी क्षेत्र में हवाई सुरक्षा को मजबूत करने और वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सुरक्षा में मदद की है। यूक्रेन ने यूरोपीय संघ के देशों के साथ मिलकर ड्रोन बनाने के समझौते भी किए हैं। यूरोपीय देशों को डर है कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की सैन्य योजनाएं यूक्रेन से आगे भी बढ़ सकती हैं। स्वीडन भी यूक्रेन के ड्रोन युद्ध के अनुभव से सीखने के लिए बहुत उत्सुक है।
इससे पहले यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की गुरुवार को स्वीडन की यात्रा पर पहुंचे। वहां उन्होंने स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन के साथ रक्षा सहयोग को लेकर अहम बातचीत की। यूक्रेन पिछले चार साल से ज्यादा समय से रूस के हमले का सामना कर रहा है। इस लंबे युद्ध के दौरान यूक्रेन ने ड्रोन तकनीक में काफी महारत हासिल की है। युद्ध के मैदान में यूक्रेन के ड्रोन 1,250 किलोमीटर लंबी सीमा पर लगातार नजर रख रहे हैं। ये ड्रोन रूस के सप्लाई रास्तों पर सटीक हमले कर रहे हैं, जिससे रूस की बड़ी सेना को पीछे हटना पड़ा है। वॉशिंगटन के एक संस्थान 'इंस्टिट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर' ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि यूक्रेन के ड्रोन हमलों ने रूस की ताकत को सीमित कर दिया है। इन हमलों की वजह से रूस के लिए अपने सैनिकों तक रसद और जरूरी सामान पहुंचाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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रूस ने अब तक यूक्रेन के लगभग 20 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा कर लिया है। इसमें क्रीमिया का इलाका भी शामिल है, जिसे रूस ने 2014 में अपने कब्जे में लिया था। हालांकि, इस जमीन को कब्जाने के लिए रूस को भारी कीमत चुकानी पड़ी है। ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी के प्रमुख ने बताया कि इस युद्ध में अब तक करीब पांच लाख रूसी सैनिक मारे जा चुके हैं।
इन सबके बावजूद, लंबी दूरी की मिसाइलों के मामले में रूस अभी भी यूक्रेन से आगे है। रूस इन मिसाइलों से यूक्रेन के बिजली घरों और शहरों को निशाना बना रहा है। पिछले हफ्ते रूस ने कीव पर करीब 90 मिसाइलें और सैकड़ों ड्रोन दागे थे। कीव पर और बड़े हमलों का खतरा है, लेकिन विदेशी दूतावासों ने अभी शहर नहीं छोड़ा है।