यूक्रेन पर रूस के हमले के कारण सरकारी खजाने पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सरकार और युद्ध का खर्च उठाने के लिए राजस्व जुटाने के नए रास्ते तलाश रहे हैं। इसके लिए ऐसी अर्थव्यवस्था से ज्यादा टैक्स वसूला जा रहा है, जिसका बड़ा हिस्सा सैन्य गतिविधियों पर केंद्रित होता जा रहा है। इस बीच आम नागरिकों की जरूरतें पीछे छूट रही हैं।
रूस के 2027 से 2029 तक के बजट पर गुरुवार को संसद में चर्चा होगी। संसद से बजट को मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही सितंबर में हुए संसदीय चुनावों के बाद कई नए टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव सामने आए हैं।
युद्ध की आग से आम जनता पर पड़ रहा टैक्स का बोझ
पिछले साल क्रेमलिन ने व्यापक स्तर पर टैक्स बढ़ाए थे। इसमें खरीदारी के समय लगने वाले मूल्य वर्धित कर (वैट) में बढ़ोतरी और अधिक छोटे कारोबारों को वैट के दायरे में लाना शामिल था। इस बार टैक्स बढ़ाने का असर सीमित वर्गों पर पड़ेगा। इनमें खनन कंपनियां और निवेश से कमाई करने वाले, संपत्ति बेचने वाले तथा बैंक खातों में जमा रकम से आय पाने वाले संपन्न नागरिक शामिल हैं।
इस साल रूस का बजट घाटा अनुमान से ज्यादा बढ़ गया है। इसकी वजह सैन्य खर्च में भारी बढ़ोतरी और अर्थव्यवस्था की धीमी वृद्धि है। प्रतिबंधों, सैन्य क्षेत्र से बाहर की कंपनियों के लिए ऊंची ब्याज दरों, श्रमिकों की कमी और यूक्रेन के तेल रिफाइनरियों व निर्यात टर्मिनलों पर हमलों ने भी अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाया है।
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पैसों के इंतजाम के लिए क्या करेगा रूस?
कीव स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के अनुसार, अगस्त तक रूस का बजट घाटा 5.8 ट्रिलियन रूबल यानी करीब 72 अरब डॉलर तक पहुंच गया। यह पिछले साल की इसी अवधि के आंकड़े से लगभग 50 प्रतिशत अधिक है। यह संशोधित लक्ष्य 4.8 ट्रिलियन रूबल से भी ज्यादा है।
- खनन कंपनियों पर 20 से 30 प्रतिशत तक अप्रत्याशित मुनाफा कर लगाने का प्रस्ताव है। पिछले साल से कीमतें बढ़ने के कारण जिन कंपनियों को फायदा हुआ है, उन्हें इस टैक्स का भुगतान करना होगा। इसमें लौह अयस्क, निकेल और सोने का उत्पादन करने वाली कंपनियां शामिल हैं।
- एक अन्य प्रस्ताव के तहत ब्याज, लाभांश और संपत्ति बेचने से होने वाली आय पर 13 से 22 प्रतिशत तक टैक्स लगाया जाएगा। फिलहाल 24 लाख रूबल यानी करीब 29,800 डॉलर से कम आय पर 13 प्रतिशत और इससे अधिक राशि पर 15 प्रतिशत टैक्स लगता है।
- एक जनवरी से लागू होने वाले अन्य प्रस्तावों में हर पार्सल पर 100 रूबल का शुल्क और ऑनलाइन खरीदे जाने वाले उन विदेशी सामानों पर 22 प्रतिशत वैट शामिल है, जिनकी कीमत 200 यूरो से कम है और जो पहले टैक्स से मुक्त थे। इसके अलावा, 'अमित्र देशों' के विदेशी निवेशकों के प्रतिबंधित खातों में दिए जाने वाले लाभांश पर 35 प्रतिशत टैक्स लगाने का प्रस्ताव है।
सरकार के टैक्स प्रस्तावों पर क्या बोली आम जनता?
मॉस्को की सड़कों पर टैक्स और वित्तीय स्थिति के बारे में पूछे जाने पर लोगों ने नाराजगी और मजबूरी, दोनों जाहिर कीं। 39 वर्षीय डेनिस बिस्ट्रोव ने कहा, "उन्हें सरकारी खजाने के लिए पैसे चाहिए, उन्हें लोगों से, आम लोगों से ज्यादा वसूली करनी है।"
92 वर्षीय नेली गोडुनोवा ने कहा, "आप क्या कर सकते हैं? मेरी चार विश्वविद्यालय डिग्रियां हैं, और आप जानते हैं, वे सभी मुफ्त थीं। सच है, मैंने इस देश को बहुत कुछ दिया है। लेकिन कोई बात नहीं... अगर आपने कुछ कमाया है, तो आपको वापस देना होगा।"
करीब 70 वर्ष के सर्गेई सुकाचेव ने कहा, "हर कोई अच्छी तरह जानता है कि यह पैसा सैन्य अभियान के लिए जा रहा है, है न? सच कहूं तो एक कारोबारी के तौर पर मुझे कुछ नुकसान हुआ है, लेकिन मैं साफ तौर पर समझता हूं कि बेहतर है कि हम टिके रहें और अपना लक्ष्य हासिल करें।"
सेना और सैन्य अभियान को वित्तीय मदद देने की कोशिश
कंसल्टेंसी कंपनी मैक्रो-एडवाइजरी लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस वीफर के मुताबिक, रूस के पास 2027 और संभवत: 2028 में बजट घाटे को पूरा करने के लिए पर्याप्त वित्तीय संसाधन हैं। हालांकि, इसके लिए टैक्स बढ़ाने के साथ ही परिवारों और कारोबारों की लागत भी बढ़ानी पड़ रही है।
उन्होंने कहा, "इसका मतलब है कि सामान्य आर्थिक विकास या बुनियादी ढांचे के लिए बहुत कम पैसा उपलब्ध है। मूल रूप से, बजट अब ऐसे दौर में पहुंच रहा है, जहां इसका मुख्य उद्देश्य सेना और सैन्य अभियान को वित्तीय मदद देना है।" वीफर ने कहा, "इसलिए अर्थव्यवस्था का संतुलन काफी बिगड़ रहा है। हालांकि अभी थोड़ी सकारात्मक वृद्धि बनी हुई है, लेकिन इसकी वजह राज्य से जुड़ी कंपनियों और उद्योगों में सरकारी खर्च है। वहीं, अर्थव्यवस्था के बाकी हिस्से को गंभीर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है या वे नाकाम हो रहे हैं।"
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विदेशी कंपनियों में बढ़ रहा पुतिन की सरकार का नियंत्रण
जर्मनी की खुदरा कंपनी मेट्रो की रूस स्थित सहायक कंपनी को एक कानून के तहत अपने नियंत्रण में ले लिया गया। यह कानून 'अमित्र देशों' की कंपनियों का अस्थायी प्रशासन अपने हाथ में लेने की अनुमति देता है। इसके बाद कंपनी से युद्ध प्रयासों के लिए एक अरब रूबल यानी करीब 1.2 करोड़ डॉलर का योगदान लिया गया। जर्मनी में मेट्रो एजी के मुख्यालय ने कहा कि इस दान में उसकी कोई भूमिका नहीं थी। कंपनी ने कहा कि यह योगदान "हमारे रुख या हमारे कारोबार चलाने के तरीके को नहीं दर्शाता।"
मेट्रो रूस, जो अब जर्मनी स्थित मुख्यालय के नियंत्रण में नहीं है, ने कहा कि 'नेशनल फ्रंट-एवरीथिंग फॉर विक्ट्री' फंड को दिया गया यह योगदान सैनिकों के लिए वाहन, संचार उपकरण और ड्रोन रोधी उपकरण खरीदने में इस्तेमाल होगा। रूस यूक्रेन में अपने युद्ध को 'विशेष सैन्य अभियान' कहता है।
वीफर के अनुसार, रूस विदेशी कंपनियों पर नियंत्रण इसलिए भी कर सकता है, क्योंकि वह विदेशों में जब्त या फ्रीज की गई रूसी संपत्तियों को वापस हासिल करने के लिए किसी समझौते की तैयारी कर रहा हो। हालांकि, जबरन योगदान लेने की इस घटना से यह आशंका भी बढ़ती है कि वित्त मंत्रालय विदेशी कंपनियों को अतिरिक्त राजस्व का स्रोत मानने लगे।
क्या सच में खराब है रूस की हालत?
सरकार पहले ही बैंकों के जरिए युद्ध का खर्च उठाने का इंतजाम कर चुकी है। कीव स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स के अनुसार, बैंकों से रक्षा कंपनियों को कर्ज दिलाकर युद्ध की लागत का एक हिस्सा संघीय बजट के बजाय बैंकों और सरकारी नियंत्रण वाली कंपनियों के खातों पर डाला जा रहा है।
पैसे जुटाने का एक अन्य स्रोत नेशनल वेल्थ फंड है। यह तेल और गैस के निर्यात से होने वाली कमाई से बनाया गया रिजर्व फंड है। लेकिन खर्च के लिए उपलब्ध इसकी तरल संपत्तियां, जिनमें चीनी मुद्रा और सोना शामिल हैं, घटकर जीडीपी के 1.7 प्रतिशत रह गई हैं।
कीव स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स का कहना है कि फिलहाल रूस की वित्तीय स्थिति स्थिर है। हालांकि, संस्थान ने आगाह किया कि सरकार के पास विकल्प सीमित हैं। वैश्विक ऊर्जा कीमतों में गिरावट या वित्तीय व्यवस्था पर भरोसा कम होने जैसी किसी प्रतिकूल स्थिति से यह नाजुक संतुलन तेजी से बिगड़ सकता है।