अपने हित को तरजीह देने का संदेश
पहले ब्रिटेन फिर यूरोपीय देशों और अंत में अमेरिका पर पलटवार कर भारत ने साफ संदेश दिया कि फिलहाल वह सभी मुद्दों पर अपने हित को तरजीह देगा। इस क्रम में रूस से तेल आयात के मामले में ब्रिटेन की विदेश मंत्री ट्रस को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में जयशंकर की खरी खरी सुननी पड़ी। जयशंकर ने यूरोपीय देशों पर भी निशाना साधा। अमेरिका ने जब भारत में मानवाधिकार उल्लंघन का सवाल उठाया तो विदेश मंत्री उसे भी खरी-खरी सुनाने से नहीं चूके।
नए रुख को मिल रही मंजूरी
भारत पर दबाव बनाने में नाकाम रहने के बाद उसके नए रुख को स्वीकार भी किया जा रहा है। मसलन भारत के रुख की आलोचना करने वाले ऑस्ट्रेलिया ने बीते हफ्ते भारत के साथ ऐतिहासिक व्यापार समझौता किया। पहले जून में होने वाले जी-7 बैठक में भारत को न्यौता नहीं भेजने पर मंथन हो रहा था। अब संकेत है कि मेजबान जर्मनी जल्द ही भारत को बैठक में शामिल होने का निमंत्रण भेजेगा।