यूएन महासचिव के मुताबिक़ रूस की ओर से इस तरह का एकतरफ़ा कदम यूएन चार्टर और उसके सिद्धांतों के खिलाफ है और यूएन के मैत्रीपूर्ण संबंध घोषणापत्र की भावना के भी विपरीत हैं। उन्होंने कहा कि यह सुरक्षा परिषद द्वारा समर्थित मिंस्क समझौतों पर घातक चोट है। यूएन प्रमुख ने सभी पक्षों से ऐसी कार्रवाई व बयानों से परहेज़ बरतने का आग्रह किया है जिनसे हालात और बिगड़ सकते हैं। उन्होंने जोर दिया कि संवाद और बातचीत के जरिये ही समस्या का समाधान होना चाहिए।
जायज है शांति सेना का इस्तेमाल
शांति सेनाओं के इस्तेमाल को यूएन ने जायज और आम लोगों की रक्षा करने की दिशा में अहम भूमिका निभाने वाला बताया है और कहा है कि यूएन को इन शांति सैनिकों पर गर्व है जो आम लोगों की हिफाजत के लिए अपनी शहादत देते हैं। लेकिन उन्होंने रूस पर यह कहकर गंभीर टिप्पणी की ‘जब किसी एक देश की सैन्य टुकड़ियां, किसी अन्य देश के क्षेत्र में बिना उसकी अनुमति के प्रवेश करती हैं, तो वे निष्पक्ष शांतिरक्षक नहीं हैं और उन्हें किसी भी हाल में शांतिरक्षक नहीं कहा जा सकता।‘
उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र, सुरक्षा परिषद और महासभा के प्रासंगिक प्रस्तावों के अनुरूप, यूक्रेन की संप्रभुता, राजनैतिक स्वतंत्रता और क्षेत्रीय अखंडता के समर्थन में साथ खड़ा है। महासचिव गुतारेस ने कहा कि यूक्रेन के लोगों का अपने मानवीय अभियानों व मानवाधिकारों की रक्षा के प्रयासों के ज़रिए हमारा समर्थन लगातार जारी रहेगा। उन्होंने बिना खून खराबे के इस संकट को सुलझाने के लिये हरसंभव कोशिश करने का संकल्प दोहराया है।