यूरोपीय संघ (ईयू) ने भारत को यूक्रेन की स्थिति पर अपनी चिंताओं और पूर्वी यूरोपीय देश के खिलाफ किसी भी रूसी आक्रमण की स्थिति में बड़े पैमाने पर होने वाले बदलावों से जुड़ी योजना के बारे में सूचित किया है। यूरोपीय संघ के एक अधिकारी ने बुधवार को भारतीय पत्रकारों के समूह को बताया कि यूरोपीय संघ भारत के साथ लगातार बातचीत कर रहा है, जिसे वह 'मित्र और भागीदार' के रूप में देखता है, ताकि नई दिल्ली को रूसी सैनिकों की ओर से उठाए गए किसी भी बड़े कदम के बाद बदले हुए घटनाक्रम में यूक्रेन की स्थिति के बारे में आकलन और चिंताओं से अवगत कराया जा सके। इस बीच व्हाइट हाउस ने कहा है कि अब रूस कभी भी हमला कर सकता है।
यूरोपीय संघ ने नाटो और उसके अमेरिका जैसे सहयोगियों के साथ मिलकर यूक्रेन के खिलाफ रूस के किसी भी आक्रामकता भरे कदम के जवाब में उठाए जाने वाले कदमों और एक मजबूत प्रतिक्रिया की योजना तैयार की है। अधिकारी ने कहा कि ऐसी स्थिति में बड़े गंभीर परिणाम सामने आएंगे। यूरोपीय संघ, यूक्रेन के साथ खड़ा है, लेकिन साथ ही हम बातचीत और राजनयिक समाधान के लिए सभी रास्ते तलाशने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।
यूरोपीय संघ के अधिकारी ने यूक्रेन की स्थिति के संबंध में संघ के 27 सदस्यों की भारत से अपेक्षाओं के सवाल को टालते हुए कहा कि समूह ने भारतीय पक्ष को अपनी स्थिति, दृष्टिकोण और आकलन के बारे में जानकारी दी है। उन्होंने कहा कि हम विशेष रूप से इस तथ्य पर जोर दे रहे हैं कि यूरोपीय सुरक्षा को रेखांकित करने वाले सिद्धांतों और नियमों का सम्मान किया जाना चाहिए। चाहे वह यूरोप में हो या बाकी दुनिया अंतरराष्ट्रीय शासन की एक नियम-आधारित प्रणाली है जो सभी के लिए रुचिकर है।
भारत ने रूस के खिलाफ कुछ नहीं कहा
उन्होंने कहा कि भारत ने रूस के साथ अपने घनिष्ठ रणनीतिक संबंधों को देखते हुए यूक्रेन सीमा पर रूस की कार्रवाईयों के खिलाफ कोई बात नहीं कही है। हालांकि भारत ने यूक्रेन में तनाव बढ़ाने वाले सभी कदमों का विरोध किया है और सभी देशों के सुरक्षा हितों को सुनिश्चित करते हुए तत्काल सैनिकों की सीमा से वापसी और शांतिपूर्ण माहौल में कूटनीतिक बातचीत करने पर जोर दिया है।
म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में जाएंगे विदेश मंत्री जयशंकर
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर इसी हफ्ते म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में शिरकत करने के लिए यूरोप की यात्रा पर जाएंगे। वह फ्रांस द्वारा बुलाई गई मंत्रिस्तरीय इंडो-पैसिफिक मंच की बैठक में भी भाग लेंगे। संभव है कि इस दौरान यूक्रेन के खिलाफ रूस यदि कोई आक्रामक रुख अख्तियार करता है तो भारत को अपने यूरोपीय संघ के भागीदारों के दबाव का सामना करना पड़ सकता है।
विदेश मंत्री जयशंकर 18 से 20 फरवरी तक अपनी यूरोप की यात्रा के दौरान अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा नीति को लेकर हो रही दुनिया की सबसे बड़ी बैठक में शिरकत करेंगे। इस बीच उनके ईयू के विदेश मामलों और सुरक्षा नीति प्रमुख जोसेप बोरेल के साथ द्विपक्षीय बैठक करने की उम्मीद है। वहीं रूस इस साल सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेगा। इसके बाद विदेश मंत्री जयशंकर फ्रांस जाएंगे और वहां 22 फरवरी को इंडो-पैसिफिक मंच की बैठक में हिस्सा लेंगे।
बातचीत की दिशा में हैं हमारे प्रयास : ईयू
यूरोपीय संघ के अधिकारी ने आगे कहा कि हम जो बताना चाहते हैं, वह यह है कि हमारे सभी प्रयास बातचीत की दिशा में हैं, लेकिन हम अपने सिद्धांतों पर दृढ़ हैं, जिन पर बातचीत नहीं की जा सकती, क्योंकि वे यूरोप की सुरक्षा तंत्र के सार को परिभाषित करते हैं। अधिकारी ने कहा कि यूरोप में सुरक्षा तंत्र को एकतरफा रूप से फिर से परिभाषित करने के प्रयास स्वीकार्य नहीं हैं, क्योंकि यह उन मूल सिद्धांतों को कमजोर करेगा जिन पर इसका निर्माण किया गया है, चाहे वह हेलसिंकी अंतिम अधिनियम 1975 हो या 1990 का पेरिस चार्टर हो।
सैन्य जमावड़ा दोनों पक्षों के लिए खतरा
अधिकारी ने कहा कि सैनिकों और हथियारों का भारी मात्रा में एक जगह एकत्र होना, यूक्रेन के सामने ही नहीं बल्कि स्पष्ट रूप से दोनों पक्षों के लिए खतरा है। पिछले सात वर्षों में यूक्रेन को क्रीमिया के अवैध कब्जे और डोनबास की स्थिति जैसी आक्रामक घटनाओं जैसे अन्य कृत्यों का सामना करना पड़ा है।
यूक्रेन सीमा पर रूसी सैनिकों के जमावड़े और अभ्यास करने के सवाल पर ईयू के अधिकारी ने कहा कि संघ को आशा है कि रूस सैनिकों को वापस बुलाएगा और हेलसिंकी अंतिम अधिनियम व पेरिस चार्टर के अंतर्गत बातचीत और अपनी चिंताओं को जाहिर करने की दिशा में आगे बढ़ेगा।
उम्मीद की किरण नजर आई
उन्होंने कहा कि बीते दो दिनों में हमें उम्मीद की किरण नजर आई है, परंतु जमीनी हकीकत अभी भी अस्पष्ट है.. हमें आशा है कि यह अच्छे संकेत जल्द ही साकार होंगे। हम देखेंगे कि क्या यह संकेत जमीनी स्तर पर ठोस रूप में सामने आते हैं या नहीं।
अब कभी भी हो सकता है हमला : व्हाइट हाउस
यूक्रेन संकट को लेकर गहराती आशंकाओं के बीच अमेरिका ने एक बार फिर कहा है कि रूस अब कभी भी हमला कर सकता है। व्हाइट हाउस ने बुधवार को कहा कि चूंकि राष्ट्रपति जो बाइडन ने उप राष्ट्रपति कमला हैरिस और विदेश मंत्री टोनी ब्लिंकन को म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में शिरकत के लिए भेजा है। जहां यह दोनों ही नेता दुनिया के दूसरे देशों को मॉस्को के खिलाफ एकजुट करने के प्रयास करेंगे। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने आशंका जताई कि ऐसी स्थिति में हमला कभी भी हो सकता है।
साकी ने रोज होने वाली प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि रूस कभी भी हमला कर सकता है। यह किसी मनगढ़ंत बहाने से होगा, जिसे वह आक्रमण करने की वजह बताएगा। हम इसके बारे में पहले ही बात कर चुके हैं, हमने अतीत में भी ऐसे हथकंडों को देखा है। मसलन रासायनिक हथियार होने के आरोप, रूसी सैनिकों पर ऐसे हमले की कहानी जो वास्तव में हुआ ही नहीं या फिर डोनबास में उकसावे का कोई दावा भी किया जा सकता है।
उन्होंने पत्रकारों से कहा कि ऐसे में आपको अपनी आंखें खुली रखनी चाहिए। एक सवाल के जवाब में, साकी ने संवाददाताओं से कहा कि कई तरह के झूठे दावे और बहाने हो सकते हैं, जो आक्रमण की बताए जाएंगे। उन्होंने कहा कि हैरिस और ब्लिंकन दोनों ही नेता 18 से 20 फरवरी तक होने वाले सम्मेलन में शिरकत के लिए जर्मनी की उड़ान भरने जा रहे हैं।