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Ukraine: दुनिया में गंभीर हो सकता है खाद्यान्न संकट, यूक्रेन के बंदरगाहों पर रूस ने किया बड़ा हमला

Mon, 04 Sep 2023 03:36 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मॉस्को

सार

जुलाई 2022 में हुए समझौते के तहत यूक्रेन के तीन बंदरगाहों से तीन करोड़ 60 लाख टन अनाज और अन्य सामान निर्यात के लिए तैयार है लेकिन छह हफ्ते पहले रूस ने इस समझौते से अपने हाथ पीछे खींच लिए थे।
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रूस और यूक्रेन युद्ध - फोटो : Social Media
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विस्तार
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यूक्रेन के इजमेल बंदरगाह पर रूस ने बड़ा हमला किया है। यह बंदरगाह यूक्रेन के सबसे बड़े खाद्यान्न निर्यातक बंदरगाहों में से एक है। रूस ने इस बंदरगाह पर ड्रोन हमला किया, जिसमें बंदरगाह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। यह हमला रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयब एर्दोगन के बीच सोमवार को होने वाली अहम मुलाकात से पहले हुआ है। 
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गहरा सकता है वैश्विक खाद्यान्न संकट
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इजमेल बंदरगाह यूक्रेन के ओडिसा क्षेत्र में दानुबे नदी पर बना है। रूस के ड्रोन हमले में बंदरगाह के वेयरहाउस, प्रोडक्शन बिल्डिंग, कृषि मशीनरी और उपकरणों को भारी नुकसान हुआ है। इस हमले में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। बता दें कि यूक्रेन दुनिया के सबसे बड़े खाद्यान्न निर्यातक देशों में से एक है। रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से खाद्यान्न निर्यात बाधित हुआ है और इसका असर पूरी दुनिया में खाद्यान्न संकट के रूप में देखा जा रहा है। खासकर अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के कई देशों में खाद्यान्न संकट ज्यादा गंभीर है। अब अनाज निर्यात के लिए तैयार बंदरगाह पर हमले से खाद्यान्न संकट गहरा सकता है। 

काला सागर समझौता कराने की हो रही कोशिश
वैश्विक संकट को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र और तुर्किए, रूस के साथ खाद्यान्न निर्यात के लिए काला सागर समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे यूक्रेन से खाद्यान्न निर्यात हो सके। इसे लेकर तुर्किए के राष्ट्रपति रेसेप तैयब एर्दोगन और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच सोमवार को अहम बैठक होनी है, लेकिन इस बैठक से पहले ही यूक्रेन के बंदरगाह पर बड़ा हमला हुआ है, जिसमें खाद्यान्न का निर्यात करने वाले यूक्रेन के अहम बंदरगाह को भारी नुकसान हुआ है। जुलाई 2022 में हुए समझौते के तहत यूक्रेन के तीन बंदरगाहों से तीन करोड़ 60 लाख टन अनाज और अन्य सामान निर्यात के लिए तैयार है लेकिन छह हफ्ते पहले रूस ने इस समझौते से अपने हाथ पीछे खींच लिए थे। उसके बाद से दानुबे नदी पर बने बंदरगाहों पर कई बार हमले हो चुके हैं। 
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पुतिन ने की ये मांग
काला सागर समझौता मानने के लिए पुतिन ने कई मांग की हैं। इनमें रूसी उर्वरक कंपनियों के खिलाफ पश्चिमी प्रतिबंधों को हटाने की मांग, अमोनिया निर्यात को फिर से शुरू करने की मांग, भुगतान, रसद और शिपिंग बीमा पर पश्चिमी प्रतिबंधों से राहत देने, रूस के कृषि बैंक रोसेल खोज को अंतरराष्ट्रीय भुगतान नेटवर्क स्विफ्ट से फिर से जोड़ने की मांग शामिल हैं। रूस का कहना है कि अभी तक उसकी मांगें पूरी नहीं हुई है, जिसके चलते ही यूक्रेन के बंदरगाहों पर हमले हो रहे हैं। इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए सोमवार को रूसी राष्ट्रपति पुतिन और तुर्किए के राष्ट्रपति एर्दोगन के बीच सोची के काला सागर रिजॉर्ट में बैठक होगी। 
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