‘जीसीएचक्यू’ के निदेशक फ्लेमिंग ने कहा कि यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद यूरोप में तनाव के बीच चीन की बढ़ती ताकत राष्ट्रीय सुरक्षा का एक मुद्दा है, जिस पर हमारा भविष्य निर्भर करता है। ‘जीसीएचक्यू’ को औपचारिक रूप से सरकारी संचार मुख्यालय के रूप में जाना जाता है।
ब्रिटेन की साइबर-खुफिया एजेंसी के प्रमुख जेरेमी फ्लेमिंग ने चीन पर ‘अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के नियमों को बदलने’ की कोशिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, चीन अपने क्षेत्र में दमन और अन्य देशों में प्रभाव बढ़ाने के लिए अपने आर्थिक व प्रौद्योगिकी दबदबे का इस्तेमाल कर रहा है।
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‘जीसीएचक्यू’ के निदेशक फ्लेमिंग ने कहा कि यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद यूरोप में तनाव के बीच चीन की बढ़ती ताकत राष्ट्रीय सुरक्षा का एक मुद्दा है, जिस पर हमारा भविष्य निर्भर करता है। ‘जीसीएचक्यू’ को औपचारिक रूप से सरकारी संचार मुख्यालय के रूप में जाना जाता है। यह एमआई-5 और एमआई-6 के साथ-साथ ब्रिटेन की तीन प्रमुख खुफिया एजेंसियों में से एक है। थिंक टैंक ‘रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट’ में दिए भाषण में फ्लेमिंग ने आरोप लगाया कि चीन के कम्युनिस्ट अधिकारी दुनिया के प्रौद्योगिकी पारिस्थितिकी तंत्र को आकार देकर रणनीतिक लाभ हासिल करना चाहते हैं। इसे हमें स्वीकार करके उससे निपटने की कोशिश करनी चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि चीन राष्ट्रीय सुरक्षा की परिभाषा को व्यापक अवधारणा में बदल रहा है।
प्रतिष्ठा के लिए युद्ध का मैदान बनी प्रौद्योगिकी
ब्रिटिश साइबर-खुफिया एजेंसी के प्रमुख जेरेमी फ्लेमिंग ने कहा, प्रौद्योगिकी न केवल अवसर, प्रतिस्पर्धा व सहयोग का एक क्षेत्र बन गई है, बल्कि यह नियंत्रण, सिद्धांतों व प्रतिष्ठा के लिए एक युद्ध का मैदान भी बन गई है। फ्लेमिंग के भाषण से पहले चीन में एक अधिकारी ने कहा था कि चीन के प्रौद्योगिक विकास का मकसद चीन के लोगों के जीवन में सुधार लाना है और इससे किसी को कोई खतरा नहीं है।
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निराधार हैं सभी आरोप :चीन
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माओ निंग ने कहा, ये आरोप निराधार हैं। चीन के तथाकथित खतरे की बात करते रहने से टकराव की स्थिति पैदा होगी। इससे किसी को फायदा नहीं होगा और अंतत: कई प्रतिकूल प्रभाव सामने आएंगे।