विदेश मंत्री जेम्स क्लेवेरली ने शनिवार को घोषणा की कि ब्रिटिश-ईरानी नागरिक अलीरेजा अकबरी को फांसी पर लटकाए जाने के बाद ब्रिटेन ने ईरान के प्रोसिक्यूटर जनरल मोहम्मद जफर मोंटाजरी पर प्रतिबंध लगा दिया है। प्रतिबंध के तहत मोंटाजरी की एक संपत्ति को जब्त कर दिया जाएगा। इसके साथ ही उनके लिए ब्रिटेन की यात्रा प्रतिबंधित रहेगी। वहीं, दूसरी ओर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की से फोन पर बात की है।
क्लेवेरली ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, मोहम्मद जफर मोंटाजरी के खिलाफ प्रतिबंध ब्रिटेन के आक्रोश को दिखाता है। उन्होंने कहा कि प्रोसिक्यूटर जनरल ईरान में राजनीतिक उद्देश्यों के लिए मौत की सजा का इस्तेमाल करते हैं। यह प्रतिबंध भारी मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए शासन को जिम्मेदार ठहराने के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दिखाता है। विज्ञप्ति में ब्रिटिश सरकार ने अलीरेजा अकबरी की फांसी राजनीतिक रूप से प्रेरित कृत्य बताया गया है।
ब्रिटेन की सरकार ने इस बात पर गौर किया है कि ईरान में लंबे समय से चल रहे हिजाब विरोधी प्रदर्शनों के बीच चार लोगों को फांसी दी गई। मोहम्मद मोंटाजरी प्रोसिक्यूटर जनरल रहे हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री सुनक ने अलीरेजा अकबरी को फांसी की सजा दिए जाने की निंदा की और इसे कायरतापूर्ण कृत्य करार दिया। उन्होंने ट्वीट कर कहा, ईरान में ब्रिटिश ईरानी नागरिक अलीरेजा अकबरी को फांसी की सजा दिए जाने से स्तब्ध हूं। यह एक क्रूर और कायराना हरकत है, जिसे एक ऐसे बर्बर शासन ने अंजाम दिया, जिसमें अपने ही लोगों के मानवाधिकारों का कोई सम्मान नहीं है। मेरी संवेदनाएं अलीरेजा के दोस्तों और परिवार के साथ हैं।
जेम्स क्लेवेरली ने भी फांसी की सजा की निंदा की। एक ट्वीट में उन्होंने कहा, ब्रिटेन ने ईरान के प्रोसिक्यूटर जनरल पर प्रतिबंध लगा दिया है। आजे उसे मंजूरी देना अलीरेजा अकबरी की फांसी पर हमारे आक्रोश को रेखांकित करता है। ईरान के प्रोसिक्यूटर जनरल मृत्युदंड का इस्तेमाल करने के केंद्र में हैं। हम उनके शासन को मानवाधिकारों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार ठहराते हैं।
सीएनएन ने शनिवार को ईरानी न्यायपालिका से जुड़े आउटलेट मिजान का हवाला देते हुए बताया था कि ईरान ने भ्रष्टाचार और जासूसी के आरोपों में एक ब्रिटिश-ईरानी नागरिक अलीरेजा अकबरी को फांसी पर लटकाया है। समाचार रिपोर्ट के अनुसार, अकबरी पर ब्रिटिश खुफिया एजेंसी एमआई6 के लिए जासूस के रूप में काम करने का आरोप लगाया गया था।
अलीरेजा अकबरी को कथित तौर पर विभिन्न मुद्राओं में दो मिलियन अमेरिकी डॉलर से ज्यादा दिए गए थे। ईरानी मीडिया का हवाला देते हुए सीएनएन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अकबरी ने कथित तौर पर विदेशी अधिकारियों के साथ देश के प्रमुख परमाणु वैज्ञानिक मोहसिन फखरीजादेह सहित 178 ईरानी आंकड़ों के बारे में जानकारी साझा की थी।